बौद्ध धर्म के अनुयायियों को सौंपा जाए महाबोधि मंदिर का प्रबंधन, राज्यसभा में सपा सांसद ने की मांग
नई दिल्ली/लखनऊ। राज्यसभा में समाजवादी पार्टी के सांसद रामजीलाल सुमन ने बृहस्पतिवार को बिहार के बोध गया स्थित महाबोधि मंदिर के प्रबंधन का मुद्दा उठाते हुए मांग की कि इसका नियंत्रण बौद्ध धर्म के अनुयायियों को सौंपा जाए। उच्च सदन में शून्यकाल के दौरान यह मुद्दा उठाते हुए सुमन ने कहा कि महाबोधि मंदिर अंतरराष्ट्रीय महत्व का स्थल है और यह वही स्थान माना जाता है जहां गौतम बुद्ध को ज्ञान की प्राप्ति हुई थी।
उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि इसे विश्व धरोहर स्थल के रूप में मान्यता प्राप्त है और लगभग 55 करोड़ लोग यानी दुनिया की लगभग सात प्रतिशत आबादी बौद्ध धर्म का पालन करती है। अन्य धार्मिक संस्थानों के प्रबंधन का उदाहरण देते हुए उन्होंने सवाल किया, "क्या अयोध्या मंदिर की प्रबंधन समिति में कोई मुस्लिम, सिख या ईसाई सदस्य है?"
उन्होंने कहा कि आम तौर पर धार्मिक स्थलों का प्रबंधन उसी धर्म के लोगों को सौंपा जाता है और यही सिद्धांत महाबोधि मंदिर पर भी लागू होना चाहिए। सपा सदस्य सुमन ने मंदिर के वित्तीय प्रबंधन पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि मंदिर को खासा राजस्व मिलता है, लेकिन इसके उपयोग और प्रबंधन को लेकर सवाल उठते रहे हैं।
उन्होंने गया के हवाई अड्डे का नाम गौतम बुद्ध के नाम पर रखने की मांग भी की तथा इसे सांस्कृतिक पहचान और धार्मिक भावना से जुड़ा विषय बताया। वर्तमान में मंदिर का प्रबंधन महाबोधि मंदिर प्रबंधन अधिनियम 1949 के तहत गठित समिति द्वारा किया जाता है, जिसमें बौद्ध और गैर-बौद्ध दोनों सदस्य शामिल होते हैं। यह व्यवस्था लंबे समय से देशभर के बौद्ध समुदाय के बीच विवाद का विषय रही है।
