यूपी में बढ़ी तपिश और धूप ने झुलसाया : पारा 42 डिग्री, जल्द राहत के नहीं आसार
लखनऊ, अमृत विचार : सूरज के तल्ख तेवर को देखते हुए शहर में गर्मी और तपिश से राहत मिलने की उम्मीद नहीं दिख रही है। शुक्रवार को अधिकतम तापमान 42 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम 25 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहा। अन्य दिनों की अपेक्षा तपिश अधिक रही। गर्मी और तेज धूप से लोग बेहाल हो गए। दोपहर में सड़कों पर सन्नाटा सा छाया रहा। जरूरी काम होने पर ही लोग घरों से निकले।
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हालांकि घर, आफिस और दुकानों में भी भीषण गर्मी से लोग बेहाल रहे। सड़कों पर कोई छाता तो कोई अंगौछा से सिर व मुंह ढककर निकला। विभागीय स्तर से भी कोई इन्तजाम नजर नहीं आए। ग्रामीण इलाकों में दोपहर में एक तरह से आग बरसी। दोपहर में गेहूं कटाई समेत अन्य कृषि कार्य प्रभावित रहे।
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किसानों ने सुबह और शाम को कटाई की। पशु-पक्षी भी बेहाल दिखे। वहीं, मौसम विभाग ने बढ़ते तापमान को देखते हुए 48 घंटे के लिए अलर्ट जारी किया है। शनिवार को भी गर्मी और तपिश से राहत मिलने की उम्मीद नहीं है। पारा 43 डिग्री के आसपास रहेगा।
गोशालाओं में अलर्ट, लापरवाही पर होगी कार्रवाई
सीवीओ डॉ. सुरेश कुमार ने गोशालाओं के लिए अलर्ट जारी किया है। गोवंशों को गर्मी, धूप और लू से बचाने के निर्देश दिए हैं। कहा कि दोपहर में टीनशेड पन्नी, तिरपाल आदि से ढके रहें। टिनशेड के ऊपर पराली बिछा दें। इससे टिनेशड नहीं तपेंगे। गोवंशों को ताजा पानी पिलाएं, चारा व साइलेज दें। चिकित्सक नियमित जाकर स्वास्थ्य परीक्षण करें। लापरवाही मिली तो कार्रवाई करेंगे।
अयोध्या में 43 डिग्री पहुंचा पारा , अब वार्म नाइट की चेतावनी
वैशाख के माह में पड़ रही ज्येष्ठ माह जैसी गर्मी ने लोगों का हाल बेहाल कर दिया है। जिले में शुक्रवार को अधिकतम तापमान सामान्य से 4.4 डिग्री बढ़कर 43 डिग्री सेल्सियस दर्ज हुआ। हालांकि न्यूनतम तापमान सामान्य के आसपास ही रहा। वहीं मौसम वैज्ञानिकों ने आगामी दिनों वार्म नाइट (गर्म रात) की भी संभावना जताई है।
वर्ष 2026 का सबसे गर्म दिन रहा शुक्रवार
अप्रैल माह से ही गर्मी ने अपने तेवर दिखाने शुरू कर दिए हैं। सुबह से ही कड़ी धूप निकल रही है, आसमान से सीधे जमीन पर आ रही सूर्य की किरणें लोगों को झुलसा रही हैं। इस पर गर्म हवाओं ने लू की स्थिति ला दी है। हाल यह है कि लोग दोपहर में घरों से निकलने में परहेज कर रहे हैं। शहर से लेकर ग्रामीण इलाकों तक, विशेषकर रामपथ पर स्थित बाजारों में दोपहर के समय सन्नाटा पसरा दिख रहा है। श्रद्धालु भी सुबह-शाम दर्शन पूजन कर रहे हैं। साथ ही रात में ही अयोध्या की छटा निहारते दिख रहे हैं।
दोपहर में सूनी रहीं सड़कें, बाजारों में सन्नाटा
वहीं, आचार्य नरेंद्र देव कृषि व प्रौद्योगिकी विवि के मौसम वैज्ञानिक डॉ. अमरनाथ मिश्र के अनुसार अभी तापमान में और बढ़ोतरी हो सकती है। आगामी 24 घंटे में पूर्वी उत्तर प्रदेश में मौसम शुष्क बने रहने, औसत तापमान सामान्य से 3-4 डिग्री सेल्सियस अधिक रहने तथा हवा सामान्य व सामान्य से तेज गति से पश्चिमी (लू) चलने की संभावना है।
हीट वेव व वार्म नाइट करेगा लोगों को परेशान
-मौसम विभाग के अनुसार जब किसी जगह का स्थानीय तापमान लगातार तीन दिन तक वहां का सामान्य तापमान से तीन डिग्री से अधिक बना रहे तो उसे लू या हीट वेव कहते है। वहीं, जब न्यूनतम तापमान भी सामान्य से तीन-चार डिग्री ज्यादा दर्ज होने लगे तो ऐसी स्थिति को वार्म नाइट (गर्म रात) कहते हैं। आगामी दिनों इसका बसर ज्यादा दिखेगा।
जिला एपिडेमोलॉजिट डॉ. अरविंद श्रीवास्तव के अनुसार जैसे ही तापमान 37 डिग्री से ऊपर बढ़ता है तो हमारा शरीर वातावरणीय गर्मी को शोषित कर शरीर के तापमान को प्रभावित करने लगता है। गर्मी में सबसे बड़ी समस्या होती है लू लगना। अंग्रेजी में इसे (हीट स्ट्रोक) या सन स्ट्रोक कहते हैं। गर्मी में उच्च तापमान में ज्यादा देर तक रहने या गर्म हवा के सम्पर्क में आने पर लू लगती है। बताया कि गर्मी में शरीर के द्रव्य बाडी फल्यूड सूखने लगती हैं। शरीर से पानी नमक की कमी होने पर लू लगने का खतरा ज्यादा रहता है। बताया कि शराब की लत हृदय रोग पुरानी बीमारियों, मोटापा, पार्किंसंस रोग, अनियंत्रित मधुमेह के शिकार लोगों को लू लगने की ज्यादा संभावना होती है।
हीट स्ट्रोक के लक्षण
-गर्म लाल शुष्क त्वचा का होना, पसीना न आना।
-तेज पल्स होना
-उथले श्वास गति में तेजी।
-व्यवहार में परिवर्तन, भ्रम की स्थिति।
-सिरदर्द, मितली, थकान और कमजोरी होना चक्कर आना।
-मूत्र न होना अथवा इसमें कमी।
क्या करें
-प्रचार माध्यमों पर हीट वेव/लू की चेतावनी पर ध्यान दें।
-अधिक से अधिक पानी पियें, यदि प्यास न लगी हो तब भी।
-हल्के रंग के पसीना शोषित करने वाले हल्के वस्त्र पहनें।
-धूप के चश्मे, छाता, टोपी, व चप्पल का प्रयोग करें।
- अगर आप खुले में कार्य करते है तो सिर, चेहरा, हाथ पैरो को गीले कपड़े से ढके रहें तथा छाते का प्रयोग करें।
-लू से प्रभावित व्यक्ति को छाया में लिटाकर सूती गीले कपड़े से पोछे अथवा नहलाये तथा चिकित्सक से सम्पर्क करें।
-ओआरएस, घर में बने हुये पेय पदार्थ जैसे लस्सी, चावल का पानी (माङ), नींबू पानी, छाछ आदि का उपयोग करें।-यदि मूर्छा या बीमारी अनुभव करते है तो तुरंत चिकित्सीय सलाह लें।
क्या न करें-
-जानवरों एवं बच्चों को कभी भी बंद या खड़ी गाड़ियों में अकेला न छोंडे।
-दोपहर 12 से तीन बजे के मध्य सूर्य की रोशनी में जाने से बचें।
-सूर्य के ताप से बचने के लिये जहां तक संभव हो घर के निचली मंजिल पर रहें।
-गहरे रंग के भारी तथा तंग कपड़ें न पहनें।
-जब बाहर का तापमान अधिक हो तब श्रमसाध्य कार्य न करें।
-अल्कोहल, चाय, व कॉफी पीने से परहेज करें।
अब घरों के बाहर नहीं दिखाई देती चरही
रामनगरी में पहले की गलियों और घरों के बाहर चरही (मिट्टी या पत्थर के बने पानी के बर्तन) दिखाई देती थीं। भक्त भाव से लोग रोजाना इनमें साफ पानी भरते थे। गर्मी के मौसम में प्यासे पशु-पक्षी इन चरहियों से अपनी प्यास बुझाते थे। यह परंपरा सदियों पुरानी थी, जो करुणा और राम भक्ति की मिसाल मानी जाती थी। अब बदलते समय के साथ यह परंपरा लगभग लुप्त हो चुकी है।
भीषण गर्मी में पानी पीने को तरस रहे पशु-पक्षी, शहरों में ज्यादा समस्या
आधुनिक जीवनशैली, व्यस्तता और शहरीकरण ने घरों के बाहर चरही रखने की प्रथा को खत्म कर दिया है। अब सड़कों पर प्लास्टिक की बोतलें या कंक्रीट के जंगल नजर आते हैं। भीषण गर्मी में तापमान 42 डिग्री के पार पहुंच रहा है। जलाशय और तालाब सूख चुके हैं। पशु-पक्षी पानी की तलाश में भटक रहे हैं। कई पक्षी प्यास से बेहाल होकर गिर जाते हैं, जबकि गली-कूचों में भटकते मवेशी पानी के लिए तरसते नजर आते हैं। पर्यावरणविदों का कहना है कि बढ़ती आबादी, निर्माण कार्य और जल स्रोतों का सूखना इस संकट को बढ़ा रहा है। कुछ जागरूक नागरिक अब घर की बालकनी या घरों के बाहर छोटे बर्तन रख रहे हैं, लेकिन यह पर्याप्त नहीं है।
बोले लोग, परंपरा जीवित रखने का करें प्रयास
-रायगंज निवासी राधेश्याम मोदनवाल बताते हैं कि हमारे मोहल्ले में मोदनवाल समाज के लोगों की संख्या ज्यादा है। हमारी परंपरा थी कि हम घरों के सामने जानवरों को पानी पीने के चरही रखते थे। इसमें रोजाना सुबह शाम ताजा पानी भरा जाता था। आज की नई पीढ़ी इसके महत्व को नहीं समझ पा रही है। पशु प्रेमी अवधेश पांडेय ने बताया कि प्रशासन और समाज को इस पर ध्यान देने की जरूरत है। स्कूलों में बच्चों को यह परंपरा सिखाई जाए, मंदिरों के आसपास चरहियां लगाई जाएं और लोगों को जागरूक किया जाए। हमें मिलकर इस परंपरा को जीवित करना होगा।
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