Bareilly: 14 साल बीते...बजट के जाल में फंसी बदायूं सिंचाई परियोजना
बरेली, अमृत विचार। बरेली और बदायूं के करीब साढ़े तीन सौ गांवों के किसानों को सिंचाई के लिए भरपूर पानी का सपना दिखाने वाली बदायूं सिंचाई परियोजना 630 करोड़ फूंकने के चौदह साल बाद भी बंद जैसी स्थिति में गई है। वजह यह है इसके लिए 1554.50 करोड़ की आवश्यकता है। इसको लेकर पिछले साल पुनरीक्षित बजट का प्रस्ताव केंद्रीय जल आयोग भेजा गया था, जिसे मंजूरी नहीं मिली है। यह परियोजना आज बढ़कर 2184 करोड़ की हो चुकी है।
बदायूं सिंचाई परियोजना पर 2011 में काम शुरू कराकर बसपा अगले ही साल सत्ता से बाहर हो गई थी। सपा सत्ता में आई तो बजट रिवाइज हुआ और 332 करोड़ की इस परियोजना की लागत 630 करोड़ पहुंच गई। सपा की सरकार ने 2015 में अवशेष 298 करोड़ का बजट अवमुक्त भी कर दिया। इस धनराशि से 311 हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण हुआ और रामगंगा पर बैराज बनने के साथ उसके दोनों ओर पानी रोकने के लिए 12-12 किमी लंबाई के एफलक्स बनाए गए। 2018 में जब यह काम पूरा हुआ तो सपा को हटाकर भाजपा की सरकार आ चुकी थी और बजट की कमी से काम बंद हो चुका था। इसके बाद इस परियोजना की बागडोर तत्कालीन सिंचाई मंत्री धर्मपाल सिंह ने संभाल ली। बजट लगातार रिवाइज हो ही रहा था कि धर्मपाल सिंह के कार्यकाल के बीच 2019 में यह 2100 करोड़ तक पहुंच गया। इस बीच धर्मपाल को सिंचाई मंत्री पद से हटाए जाने के बाद से परियोजना सफेद हाथी साबित हो रही है।
धर्मपाल सिंह के कार्यकाल में 1470 करोड़ बढ़ी लागत
जब परियोजना की शुरुआत हुई थी, तब भूमि का मुआवजा सरकारी कीमत पर दिया जाता था। 2015 में किसान चार गुने रेट की मांग करने लगे। इस बीच यह शासनादेश भी आ गया।। इसी कारण परियोजना की लागत 630 करोड़ पहुंच गई। 2017 में एक बार फिर सत्ता परिवर्तन के बाद धर्मपाल सिंह सिंचाई मंत्री बने तो रिवाइज एस्टीमेट के जरिए यह परियोजना 630 करोड़ से 2184 करोड़ की लागत पर पहुंच गई। कई गुना लागत बढ़ने से ही परियोजना पर बादल छाने लगे।
मंजूरी मिलने के बाद भी नहीं मिला बजट
अब 1250 किसानों से करीब नौ सौ हेक्टेयर भूमि खरीदने के लिए करीब 1554 करोड़ रुपये की जरूरत है। 2019 में धर्मपाल सिंह के कार्यकाल में शासन की वित्त समिति ने पुनरीक्षित बजट स्वीकृत कर दिया था। इसके बाद पिछल साल मंत्रिमंडल की बैठक में सीएम से भी इसकी मंजूरी मिलने का दावा किया गया। यही नहीं, 2184.54 करोड़ रुपये का पुनरीक्षित बजट का प्रस्ताव बीते वित्तीय वर्ष में केंद्रीय जल आयोग को भेजा गया। लेकिन फिर भी कुछ हुआ नहीं।
परियोजना के आंकड़े:
कुल खर्च: 630.04 करोड़ रुपये
शेष बजट की जरूरत: 1554.50 करोड़ रुपये
बैराज का काम: 90 प्रतिशत पूरा
शेष नहरों की खोदाई: 611.45 किलोमीटर
काम ठप होने का समय: वर्ष 2019 से
बाढ़ खंड एक्सईएन नीरज कुमार ने बताया कि बदायूं सिंचाई परियोजना में 2019 से बजट नहीं मिलने की वजह से कमा बंद पड़ा है। 2184.54 करोड़ रुपये का पुनरीक्षित बजट का प्रस्ताव केंद्रीय जल आयोग को भेजा गया है। परियोजना अगर मानकों पर खरी उतरी तो प्रधानमंत्री सिंचाई परियोजना में शामिल हो जाएगी, लेकिन मानक पर खरी नहीं उतरी तो प्रदेश सरकार की कैबिनेट में स्वीकृति मिलने के बाद प्रक्रिया आगे बढ़ सकेगी।
