‘देश की कीमत पर सत्ता चाहते थे...’, विभाजन विभीषिका दिवस पर कांग्रेस पर बरसे CM योगी, बोले- आज भी बांटने की सियासत

Amrit Vichar Network
On

सरदार पटेल की प्रतिमा से लोकभवन तक निकाली मौन पदयात्रा

विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस पर CM योगी आदित्यनाथ ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि सत्ता की लिप्सा में देश का विभाजन हुआ। उन्होंने लखनऊ में मौन पदयात्रा निकालकर विभाजन पीड़ितों को श्रद्धांजलि दी।

लखनऊ, अमृत विचार। विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस के अवसर पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि सत्ता हासिल करने की लिप्सा इतनी बढ़ गई थी कि एक सनातन राष्ट्र के टुकड़े कर दिए गए। करोड़ों हिंदुओं को अपनी मातृभूमि और जन्मभूमि से विस्थापित होना पड़ा। लाखों हिंदू, बौद्ध, सिख और जैन लोगों का कत्लेआम हुआ, लेकिन उस समय उनकी सुनवाई करने वाला कोई नहीं था।

मुख्यमंत्री ने कहा कि विभाजन केवल इतिहास का एक अध्याय नहीं, बल्कि मानवता के इतिहास के सबसे काले अध्यायों में से एक है। विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस अतीत की गलतियों से सीखने और उन्हें दोबारा न दोहराने की प्रेरणा देता है।

‘सिर्फ स्मरण से समस्या का समाधान नहीं होगा’

योगी आदित्यनाथ ने कहा कि इतिहास के काले अध्यायों से सीखना जरूरी है। केवल उनका स्मरण करने से समस्या का समाधान नहीं होगा। यह सवाल आज भी सामने है कि विभाजन की परिस्थितियां क्यों पैदा हुईं, इसके लिए कौन जिम्मेदार था, दोषियों को कितनी सजा मिली और आखिर कब तक देश इसकी कीमत चुकाता रहेगा।

उन्होंने कहा कि इतिहास सिर्फ परीक्षा का पाठ्यक्रम नहीं है। इतिहास गौरवशाली क्षणों पर गर्व करने के साथ अतीत की गलतियों के परिमार्जन का अवसर भी देता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस मनाने के पीछे भी यही भावना रही है।

आपसी अंतर्विरोध और जातिगत विभाजन को बताया गुलामी का कारण

मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत के गुलाम होने के पीछे दो बड़े कारण रहे- आपसी अंतर्विरोध और जाति व क्षेत्र के आधार पर विभाजन। इन अंतर्विरोधों के साथ षड्यंत्र भी जुड़े और षड्यंत्रकारी सफल हुए। इसका परिणाम देश की गुलामी के रूप में सामने आया। उन्होंने कहा कि समाज इस भावना के साथ एकजुट होकर संघर्ष नहीं कर सका कि हमला किसी दूसरे पर हो रहा है तो हम क्यों बोलें। इसी सोच का दुष्परिणाम देश की गुलामी और भारत के विभाजन के रूप में सामने आया।

स्वतंत्रता सेनानियों के संघर्ष का किया जिक्र

योगी ने स्वतंत्रता संग्राम में महात्मा गांधी, सरदार पटेल, नेताजी सुभाष चंद्र बोस, राजगुरु, चंद्रशेखर आजाद और रानी लक्ष्मीबाई जैसे महान सेनानियों के संघर्ष को याद किया। उन्होंने कहा कि जिस देश में ‘स्वराज हमारा जन्मसिद्ध अधिकार है’ जैसे मंत्र गूंजे, उसे अंततः विभाजन की भारी कीमत चुकानी पड़ी।

‘1947 में कुछ लोगों की नजर सत्ता पर थी’

मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि 1947 में जो लोग मौन थे, उनकी नजरें सत्ता पर थीं और वे देश की कीमत पर सत्ता हासिल करना चाहते थे। उन्होंने कहा कि आज भी कुछ राजनीतिक दल अपने निहित स्वार्थों के लिए समाज को जाति और क्षेत्र के आधार पर बांटने का काम करते हैं। योगी ने कहा कि समाज को कभी हिंदू-सिख के नाम पर तो कभी जाति और क्षेत्र के नाम पर बांटा गया। इसका परिणाम कमजोर भारत के रूप में सामने आया और विभाजन की कीमत निर्दोष भारतीयों को चुकानी पड़ी।

बांग्लादेश में हिंदुओं के मुद्दे पर विपक्ष को घेरा

मुख्यमंत्री ने बांग्लादेश में हिंदुओं पर होने वाले अत्याचारों का जिक्र करते हुए विपक्षी दलों पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि ऐसे मामलों पर कुछ दल वोट बैंक खिसकने के डर से मौन रहते हैं। योगी ने कहा कि जो लोग सत्ता को निजी संपत्ति और पारिवारिक विरासत मानते हैं, वे देश के साथ विश्वासघात करते हैं और अराजकता व अव्यवस्था को बढ़ावा देते हैं।

सरदार पटेल की प्रतिमा से लोकभवन तक निकाली मौन पदयात्रा

विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हजरतगंज चौराहा स्थित सरदार पटेल की प्रतिमा से लोकभवन तक करीब आधा किलोमीटर की मौन पदयात्रा निकाली। पदयात्रा के जरिए विभाजन के दौरान जान गंवाने वाले लोगों और विस्थापन की पीड़ा झेलने वाले परिवारों को श्रद्धांजलि दी गई।

लोकभवन पहुंचने के बाद मुख्यमंत्री ने विभाजन की त्रासदी पर आधारित प्रदर्शनी और लघु फिल्म देखी। उन्होंने कलाकारों की लाइव पेंटिंग भी देखी। इस दौरान उन्होंने विभाजन के समय भारत आए विस्थापित परिवारों के सदस्यों से मुलाकात की। प्रभावित परिवारों ने मुख्यमंत्री के सामने अपनी पीड़ा और अनुभव साझा किए।

यह भी पढ़ें:-Barabanki News : डीएम के ड्रीम प्रोजेक्ट को ठेंगा! कचहरी गेट के बगल चल रहा अवैध बाइक स्टैंड, सुरक्षा व्यवस्था पर भी बड़ा सवाल

संबंधित समाचार