Bareilly News : दरगाह आला हजरत के उलामा बोले, 'विकसित भारत-2047' एक महत्वाकांक्षी विजन

Amrit Vichar Network
Edited By Ateeq Khan
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स्वतंत्रता दिवस के उपलक्ष्य पर दरगाह आला हजरत स्थित मदरसा मंजरे इस्लाम में गोष्ठी 

2047 में भारत अपनी आज़ादी के सौ साल पूरे होने का जश्न मनाएगा। भविष्य की दिशा भी तय करेगा। इस संदर्भ में, "विकसित भारत 2047" का विज़न सिर्फ़ एक राजनीतिक नारा नहीं, बल्कि देश की एक बड़ी महत्वाकांक्षा है।

अमृत विचार : आला हजरत के मदरसा मंजरे इस्लाम में स्वतंत्रता दिवस के उपलक्ष्य पर आयोजित एक कार्यक्रम में मुफ्ती सलीम नूरी ने कहा कि, 'विकसित भारत 2047' सिर्फ राजनीतिक नारा नहीं बल्कि एक महात्वाकांक्षी विजन है। मुफ्ती अख्तर रजवी ने कहा कि इसका मकसद, एक ऐसा भारत बनाना है, जो आर्थिक रूप से मजबूत, वैज्ञानिक रूप से आत्मनिर्भर, सामाजिक रूप से न्यायपूर्ण और वैश्विक स्तर पर प्रभावशाली भारत है। 

कार्यक्रम की अध्यक्षता मदरसे के प्रधानाचार्य मुफ्ती मोहम्मद आकिल रजवी ने की।  "जश्ने आजादी और मुस्लिम नौजवानों की जिम्मेदारी" विषय पर निबंध प्रतियोगिता हुई। 

मदरसा मंज़रे इस्लाम के शिक्षक मुफ़्ती सलीम बरेलवी ने छात्रों को संबोधित करते हुए कहा कि किसी देश के जीवन में एक सदी बहुत लंबा समय नहीं होता, फिर भी यह तरक्की और बदलाव को मापने के लिए काफी अहम है। जब कोई ऐसा मौका देश की आज़ादी से जुड़ा हो तो यह सिर्फ़ जश्न का नहीं बल्कि सोचने-समझने का भी समय होता है—यह देखने का कि क्या हासिल हुआ क्या खोया? भविष्य किस दिशा में जाना चाहिए।

भविष्य की दिशा तय करेगा भारत

2047 में भारत अपनी आज़ादी के सौ साल पूरे होने का जश्न मनाएगा। भविष्य की दिशा भी तय करेगा। इस संदर्भ में, "विकसित भारत 2047" का विज़न सिर्फ़ एक राजनीतिक नारा नहीं, बल्कि देश की एक बड़ी महत्वाकांक्षा है।

मुफ्ती अख्तर रजवी ने कहा कि 'विज़न इंडिया 2047' कोई एक कानून या सरकारी प्रोग्राम नहीं है; बल्कि यह एक लंबे समय का राष्ट्रीय पॉलिसी फ़्रेमवर्क है, जिसका मकसद 2047 तक भारत को एक विकसित देश बनाना है। ऐसा भारत बनाना है जो आर्थिक रूप से मज़बूत, वैज्ञानिक रूप से आत्मनिर्भर,सामाजिक रूप से न्यायपूर्ण और वैश्विक स्तर पर प्रभावशाली हो।

विकास में युवाओं का अहम योगदान

मुफ्ती जमील ने कहा कि देश की तरक्की में मुस्लिम युवाओं की बड़ी भूमिका है। वे भारत की युवा आबादी का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। उनमें बौद्धिक, रचनात्मक और उद्यमी क्षमता है, जिससे वे राष्ट्रीय विकास में बड़ा योगदान दे सकते हैं।

मुफ्ती मोइन बरकाती ने कहा कि यह बताने कि शायद ही जरूरत है कि क़ुरान की सबसे पहली आयत "पढ़ो" (इक़रा) के आदेश से शुरू होती है, जो ज्ञान हासिल करने पर जोर देती है। इसी वजह से इस्लामिक सभ्यता ने इतिहास में विज्ञान, चिकित्सा, गणित, खगोल-विज्ञान और दर्शन के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान दिया है।

 

शोध-उद्यमशीलता में आगे बढ़ें 

कारी अब्दुर्रहमान ने कहा कि शिक्षा भविष्य के लिए सबसे बड़ा निवेश है। मास्टर कमाल ने कहा कि आज शिक्षा को पहली प्राथमिकता देने की जरूरत है। मौलाना मुजीब ने कहा कि भारत आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, स्पेस रिसर्च, बायोटेक्नोलॉजी, ग्रीन एनर्जी और डिजिटल इकॉनमी में तेजी से आगे बढ़ रहा है। मुस्लिम युवाओं को यूनिवर्सिटी, रिसर्च संस्थानों, इनोवेशन लैबोरेटरी, स्टार्टअप इनक्यूबेटर और वैज्ञानिक संगठनों से जुड़ना चाहिए। 

मुफ्ती कलीम ने कहा कि भारत का संविधान सभी नागरिकों को समान अधिकार, समान अवसर और समान जिम्मेदारियां देता है। इसलिए, मुस्लिम युवाओं को संवैधानिक मूल्यों, लोकतांत्रिक परंपराओं, राष्ट्रीय एकता और आपसी सौहार्द को बढ़ावा देते आगे बढ़ना चाहिए। दरगाह के मीडिया प्रभारी नासिर कुरैशी ने कहा कि इस दौरान छात्रों को तिरंगा झंडे विरतित किए गए। 

 

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