असहयोग आंदोलन की तैयारियों को धार देने चार बार बरेली आए थे महात्मा गांधी

असहयोग आंदोलन की तैयारियों को धार देने चार बार बरेली आए थे महात्मा गांधी

बरेली, अमृत विचार। 1857 की क्रांति में बरेली की महत्वपूर्ण भूमिका के चलते राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का यहां से गहरा जुड़ाव रहा। वह जिले में चार बार आए थे। उन्होंने स्वतंत्रता आंदोलन को धार दी थी। उन्हीं की प्रेरणा से जिले के क्रांतिकारियों ने असहयोग आंदोलन में सहयोग किया था। वहीं, गांधी जी के आने …

बरेली, अमृत विचार। 1857 की क्रांति में बरेली की महत्वपूर्ण भूमिका के चलते राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का यहां से गहरा जुड़ाव रहा। वह जिले में चार बार आए थे। उन्होंने स्वतंत्रता आंदोलन को धार दी थी। उन्हीं की प्रेरणा से जिले के क्रांतिकारियों ने असहयोग आंदोलन में सहयोग किया था। वहीं, गांधी जी के आने पर जिले की महिलाओं ने आजादी के आंदोलन को तेज करने के लिए अपने जेवर और बचत के पैसे भी निकालकर उन्हें दे दिए थे।

क्रांति की इबारतें, अशफाक उल्ला और उनका युग जैसी पुस्तकें लिखने वाले बरेली के लेखक सुधीर विद्यार्थी की पुस्तक बरेली एक कोलाज के मुताबिक अक्टूबर व नवंबर 1920 और 1921 में महात्मा गांधी का बरेली दौरा रहा था। गांधीजी के पहली बार बरेली आने पर हिंदू मुस्लिम एकता और मजबूत हुई। साथ ही सभी धर्म व जातियों के लोग एकजुट होकर अंग्रेजों के विरोध में उठ खड़े हुए।

बरेली नगर पालिका ने किया था गांधी जी का सम्मान

बरेली में असहयोग की लहर के दौरान गांधी जी पहली बार 17 अक्टूबर 1920 को मुहम्मद अली व शौकत अली के साथ यहां आए थे। यहां दूर-दूर से लोग उन्हें देखने व सुनने आए थे। मोती पार्क में हुई विराट सभा में महात्मा गांधी ने जनता को संबोधित करते हुए कहा कि चूंकि आप लोग अब इतने निडर हो गए हैं कि कहने की कोई बात ही नहीं है।

अत: मैं आपसे ये ही उम्मीद करूंगा कि आप ऐसे ही बने रहें। वहीं, अगर आप में शक्ति हो तो आप अपने स्कूलों की स्वतंत्रता को बनाएं रखें। अगर आप लोग सरकार की ओर से मिलने वाले अनुदान को न लेंगे तो स्कूल स्वत: ही स्वतंत्र हो जाएंगे। साथ ही बरेली नगर पालिका की ओर से उनका अभिनंदन करते हुए सम्मान पत्र भी सौंपा गया।

कांग्रेसी नेता द्वारिका प्रसाद के घर में ठहरे थे गांधी जी

एक महीने बाद ही गांधी जी नवंबर 1920 में फिर यहां आए। बरेली कांग्रेस समिति के निमंत्रण पर वह आर्य समाजी स्वामी सत्यदेव परिव्राजक को लेकर पहुंचे थे। उस समय वह तत्कालीन कांग्रेसी नेता पं. द्वारिका प्रसाद के घर ठहरे थे। अगले दिन कुतुबखाना के सामने उन्होंने जनसभा की। वहां भी बरेली की जनता उन्हें देखने के लिए पिछली बार की ही भांति बेहद उत्साहित थी।

1921 में गांधी जी ने द्रौपदी देवी से साझा की थी अपनी रणनीति

1921 में असहयोग आंदोलन की तैयारी में ही तीसरी बार बापू बरेली आए। जहां इस बार भी वह कांग्रेस नेता पं. द्वारिका प्रसाद के घर ठहरे। उन्होंने इस बार आजादी में महिलाओं की महत्वपूर्ण भूमिका को समझते हुए द्रौपदी देवी से असहयोग आंदोलन की रणनीति को साझा किया। इसी संबंध में बरेली के जुबली पार्क में उन्होंने जनता को संबोधित किया।

जब महिलाओं ने सहायता के लिए गांधी जी को भेंट किए 1650 रुपये

साइमन कमीशन के विरोध में दामोदर स्वरूप सेठ की अध्यक्षता में मोती पार्क में सभा का आयोजन किया गया। जहां 18 मई 1928 को महात्मा गांधी का बरेली में स्वागत किया गया। वहीं, वह साहूकारा स्थित कालीचरन के आवास पर ठहरे थे। यहां उन्होंने प्रमुख लोगों से भविष्य की लड़ाई के लिए विचार-विमर्श किया। सभा में ही भाषण से प्रभावित होकर महिला सभा में गांधी जी को सहायता के रूप में 1650 रुपये व मानपत्र भेंट किया गया।

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