बरेली: दवाएं न होने से मरीजों की आंखों के ऑपरेशन बंद, वार्ड पड़ा खाली
जिला अस्पताल के नेत्र विभाग में एक माह से दवाओं का टोटा
यह लापरवाही नहीं तो और क्या है। जिला अस्पताल के नेत्र विभाग में दवाओं का अभाव है। इसके चलते करीब एक माह से मरीजों के
बरेली, अमृत विचार। यह लापरवाही नहीं तो और क्या है। जिला अस्पताल के नेत्र विभाग में दवाओं का अभाव है। इसके चलते करीब एक माह से मरीजों के आंखों के ऑपरेशन नहीं किए जा रहे हैं। उन्हें मायूस होकर घर लौटना पड़ रहा है। विभाग के बाहर और अंदर ऑपरेशन बंद संबंधी नोटिस भी चस्पा कर दिया गया है। नेत्र वार्ड में बेड खाली पड़े हैं।
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अधिकांश रोगी आंख के ऑपरेशन के लिए नवंबर माह की शुरुआत का ही इंतजार करते हैं, ऐसा इसलिए कि हल्की ठंड का मौसम होने से आंखों में परेशानी कम होती है, लेकिन यहां दवाओं का टोटा है। ऐसे में जानकारी के अभाव के चलते जो मरीज यहां ऑपरेशन की आस लिए पहुंच रहे हैं, उन्हें मायूसी हाथ लग रही है।
विभाग क्यों नहीं कर रहा स्थानीय स्तर पर दवाओं की खरीद?
सरकारी अस्पतालों में अगर जीवन रक्षक दवाओं का टोटा हो जाता है तो नियम संख्या 39 औषधी के तहत स्थानीय स्तर पर दवाओं की खरीद की जा सकती है, मगर इसके बाद भी विभाग मूक दर्शक बना हुआ है। मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
आंख संबंधी रोग की दवाएं खत्म होने से पहले ही सीएमओ को पत्र भेजकर उपलब्ध कराने को कहा था, राष्टीय अंधता निवारण कार्यक्रम के तहत दवाएं मुहैया कराई जाती हैं, लेकिन टेंडर प्रक्रिया पूर्ण न होने के चलते दवाएं नहीं मिल सकी हैं-डा. मेघ सिंह, एडीएसआईसी, जिला अस्पताल।
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