बरेली: खेल जालसाजी का... कुछ दिन की जेल और बारे-न्यारे लाखों के

बरेली: खेल जालसाजी का... कुछ दिन की जेल और बारे-न्यारे लाखों के

बरेली, अमृत विचार। सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मौतों पर बीमा कंपनियों से लाखों झटकने के खेल की जांच कर रही एसआईटी ने अब तक कई गहरी साजिशों का पता लगाया है। जालसाजों की इस साजिश का मुख्य किरदार कोई ऐसा ड्राइवर होता था जो दुर्घटना से कोई लेना-देना न होने के बावजूद पैसों के बदले जुर्म कबूल करके जेल जाने को तैयार हो जाए। यह खेल कई सालों तक चला और जालसाज बीमा कंपनियों को लगातार चूना लगाते रहे। ऐसे ही दो और मामलों में पांच लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई गई है।

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बीमा कंपनियों से फर्जी दावों का भुगतान हासिल करने का मामला खुलने के बाद हाईकोर्ट के आदेश पर इसकी जांच के लिए एसआईटी (विशेष जांच दल) गठित की गई थी। एसआईटी की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ी, इसमें कई चौंकाने वाले खुलासे हुए। पता चला कि दुर्घटना का जुर्म कबूल कर जो ड्राइवर जेल गए, उनका उन दुर्घटनाओं से दूर-दूर तक कोई लेना देना नहीं था। यही नहीं, जालसाजी और धोखाधड़ी के इस खेल में दुर्घटना करने वाला वाहन कभी डीसीएम से टैंकर बना दिया गया तो कभी ट्रक से जिप्सी। ऐसे मामलों में बरेली के थाना कोतवाली में अब तक पांच आरोपियों के खिलाफ पहले ही एफआईआर दर्ज कराई जा चुकी है। अब एसआईटी के इंस्पेक्टर और सबइंस्पेक्टर की ओर से दो और मामलों में रिपोर्ट दर्ज कराई गई है।

केस- 1
ट्रक से हादसा, चार महीने बाद दिखा दी जिप्सी
हरियाणा के गांधीनगर जिंद निवासी पारुल गोयल और गौरव अग्रवाल की 13 जनवरी 2010 को नोएडा में सड़क हादसे में मौत हो गई थी। पारूल के भाई अरुण की ओर से नोएडा के थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई गई जिसमें हादसा ट्रक से होना बताया गया, मगर गौरव के पिता मदन गोपाल ने मेरठ जोन के एडीजी को दिए पत्र में जिप्सी से दुर्घटना होना दिखाया। उन्होंने बरेली के एक वकील के जरिए जिप्सी ड्राइवर फरीदपुर के ऊंचा मोहल्ला निवासी दुर्वेश कुमार के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई। 

जांच हुई तो पता चला कि पारुल का भाई अरुण मौके पर मौजूद नहीं था। किसी पुलिसकर्मी के बताने पर उसने रिपोर्ट दर्ज कराई थी। यह भी पता चला कि गौरव के पिता भी दुर्घटना के वक्त नोएडा में नहीं थे। गवाह हितेश कुमार किराए पर रहता था, वह भी वहां से चला गया। दूसरे गवाह प्रमोद कुमार ने घटना के वक्त मौके पर मौजूद होने से मना कर दिया। जिप्सी मालिक ने भी घटना होने से इन्कार किया। पता चला कि ड्राइवर दुर्वेश ने मदन गोपाल से मिलकर नोएडा में जमानत कराई थी। पता चला कि वह एक और मामले में इसी तरह जेल जाकर जमानत करा चुका है। एसआईटी इंस्पेक्टर ने मदन गोपाल, हितेश कुमार और दुर्वेश को दोषी मानते हुए थाना कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज कराई है।

केस-दो
डीसीएम ने मारी टक्कर, रिपोर्ट लिखाई टैंकर पर
एसआईटी के इंस्पेक्टर सतीश कुमार ने दूसरे मामले में दो लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई है। यह मामला 16 सितंबर 2018 है। बदायूं जिले के डहरपुर गांव के पास एक ऑटो को डीसीएम ने टक्कर मार दी थी। इस हादसे में मधुवनी (बिहार) के थाना लौकही के गांव छजना निवासी चलितर राम की मौत हुई थी। टेंपो में सवार कई और लोग भी घायल हुए थे। चलितर राम की पत्नी की ओर से थाना दातागंज में रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी, लेकिन डीसीएम का बीमा न होने के कारण अलापुर (बदायूं) के गांव अतरी कुंइयां निवासी उसके मालिक राजेश कुमार ने चलितर राम की पत्नी से समझौता कर लिया। इसके बाद हादसा दूध भरे टैंकर से होना दिखाया गया।

इस साजिश में टैंकर ड्राइवर दातागंज के गांव गिलटैइया निवासी राजभान के भी शामिल होने के साक्ष्य मिले हैं। टैपो ड्राइवर अमित कुमार और दूसरी सवारियों ने डीसीएम से ही घटना होना बताया। इसके बाद एसआईटी के इंस्पेक्टर सतीश कुमार की ओर से डीसीएम मालिक राजेश कुमार और टैंकर चालक राजभान के खिलाफ थाना कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज कराई है।

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