सांसों पर संकट: पटाखों के धुएं से बढ़ा वायु प्रदूषण, चेस्ट हॉस्पिटल में बेड फुल, दम फूलने से एक की मौत

कानपुर में वायु प्रदूषण से दम फूलने से एक की मौत हो गई।

सांसों पर संकट: पटाखों के धुएं से बढ़ा वायु प्रदूषण, चेस्ट हॉस्पिटल में बेड फुल, दम फूलने से एक की मौत

कानपुर में पटाखों के धुएं से वायु प्रदूषण बढ़ा। चेस्ट हॉस्पिटल में बेड फुल हो गए। जिसमें दम फूलने से एक की मौत हो गई। तमाम लोगों की हालत बिगड़ गई।

कानपुर, अमृत विचार। दीपावली पर हुई जमकर आतिशबाजी से शहर में वायु प्रदूषण और बढ़ गया। पटाखों का धुंआ घरों में घुसने से तमाम लोगों को सांस लेने में दिक्कत के साथ दम घुटने जैसा अहसास हुआ। अधिकतर श्वांस रोगी जहरीले धुएं से बचने के लिए खिड़की-दरवाजे बंद करके कमरों में कैद रहे। इसके बावजूद उनकी तकलीफ बढ़ गई। मुरारी लाल चेस्ट अस्पताल में उपलब्ध सभी 108 बेड मरीजों से फुल हो गए। एक अस्थमा रोगी ने तड़प कर दम तोड़ दिया। 

आतिशबाजी के कारण दीपावली की रात और अगले दिन वायु प्रदूषण बढ़ने की वजह से अस्थमा और श्वांस के रोगियों को सांस लेने में कठिनाई हुई और फेफड़ों से संबंधित बीमारी से जूझना पड़ा। क्रानिक मरीज जो पहले से ही अस्थमा या फेफड़ों की बीमारी से पीड़ित थे, उनके लिए त्योहार पर पटाखों का प्रदूषण मुसीबत बन गया।

पटाखों का धुंआ घरों में घुसा गया तो ऐसे लोगों को पहले खांसी फिर सांस लेने में तकलीफ बढ़ गई। सांस लेने में कठिनाई के चलते मुरारी लाल चेस्ट अस्पताल में रविवार और सोमवार को 20 मरीज इलाज कराने पहुंचे। एक मरीज ने दम तोड़ दिया। मृतक अस्थमा का रोगी था और उसके फेफड़े में निमोनिया हो गया था।

डॉ. मुरारीलाल चेस्ट हॉस्पिटल के विभागाध्यक्ष डॉ. संजय वर्मा ने बताया कि इस समय इमरजेंसी में श्वास तंत्र फेल होने के रोगी आ रहे हैं। ऐसे रोगियों में ऑक्सीजन लेवल की कमी की समस्या देखी जा रही है। रविवार को लखनपुर निवासी विनोद (52) की इसी समस्या के चलते मौत हो गई।

परिजनों के मुताबिक विनोद को अस्थमा की शिकायत थी। वायरल संक्रमण होने के बाद निमोनिया हो गया था। उधर, फजलगंज निवासी अनीस (61) की सांस फूलने से हालत बिगड़ गई। बेटे असगर ने बताया कि अचानक पिता की सांस फूली और बेहोशी आ गई। गंभीर हालत में काकादेव स्थित निजी अस्पताल ले गए। निजी अस्पतालों में दम फूलने की परेशानी  के कारण बड़ी संख्या में लोग पहुंचे। इनमें अधिकतर अस्थमा या श्वांस रोगी थे।    

दीपावली के दौरान फेफड़ों के रोग से संबंधित आठ मरीजों को सेप्टीसीमिया की हालत में हैलट अस्पताल की इमरजेंसी में भर्ती किया गया। वायु प्रदूषण और ठंड के कारण श्वांस रोगी बढ़ गए। ठंड और बढ़ने पर क्रॉनिक रोगियों की दिक्कत ज्यादा हो सकती है। अस्थमा और दमा के रोगी डॉक्टर से दवा की खुराक दुरुस्त करा लें।- डॉ. संजय वर्मा, विभागाध्यक्ष, मुरारीलाल चेस्ट हॉस्पिटल।

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