रुद्रपुर: नहाय-खाय के साथ छठ पर्व कल से शुरू

रुद्रपुर: नहाय-खाय के साथ छठ पर्व कल से शुरू

रुद्रपुर, अमृत विचार। छठ पर्व की शुरुआत शुक्रवार को नहाय-खाय के साथ हो जाएगी। चार दिन तक चलने वाले इस पर्व के दूसरे दिन खरना। इसके बाद तीसरे दिन ढलते सूरज और चौथे दिन उगते हुए सूर्य देवता को अर्घ्य देकर महिलाएं घर परिवार में सुख-समृद्धि की कामना करेंगी। पर्व को लेकर पूर्वांचल समाज के लोगों में काफी उत्साह है। समाज के लोगों ने इसकी तैयारियां शुरू कर दी है।

रुद्रपुर शहर में पूर्वांचल समाज के करीब 25 हजार परिवार निवास करते है। गुरुवार महिलाओं और पुरुषों ने व्रत के लिए छठ घाट समेत कई स्थानों पर और तालाबों पर पूजा के लिए वेदी तैयारी की। पूर्वांचल समाज समिति के अध्यक्ष दिनेश गुप्ता ने बताया कि चार दिनों तक चलने वाला यह छठ महापर्व सबसे कठिन व्रतों में माना जाता है। इसमें भगवान सूर्य और छठी मैया की पूजा की जाती है। नहाय-खाय से शुरू होने वाले इस व्रत में खरना और सूर्य को अर्घ्य देने के बाद ही यह व्रत खत्म होता है।

उन्होंने बताया कि छठ ही एक ऐसा पर्व है जिसमें ढलते सूरज को अर्घ्य दिया जाता है। इसलिए इस व्रत की काफी मान्यता है। पर्व को लेकर समाज के लोगों ने तैयारियां पूरी कर ली है। इसके अलावा छठ पूजा स्थल पर वेदी आदि बनाने का कार्य पूर्ण कर लिया गया है और छठ घाट में सफाई व्यवस्था का पूरा ध्यान रखा गया है। ताकि व्रती महिलाओं और पुरुषों को किसी भी प्रकार की समस्या का सामना न करना पड़े। उन्होंने बताया कि नहाय खाय के दौरान सुबह स्नान कर महिलाएं चने की दाल, कद्दे और लौकी की सब्जी व्रती महिलाएं प्रसाद के तौर पर ग्रहण करती हैं और फिर निर्जला वृत रखती हैं।

व्रत धारकों को 36 घंटे रखना पड़ता है निर्जला उपवास

रुद्रपुर। पूर्वांचल समाज के लोगों ने बताया कि छठ पर्व पर व्रत रखने वालों को करीब 36 घंटे तक निर्जला उपवास रखना पड़ता है। इसके अलावा छठी मैया को खुश रखने लिए कठिन नियमों का पालन करने के साथ ही हर बात का ध्यान रखना पड़ता है।

इन बातों का रखें ध्यान  

-सात्विक भोजन के अलावा लहसुन-प्याज के सेवन से परहेज।

-जिस स्थान पर पूजा का प्रसाद बने वहां भोजन न करें।

-किसी की निंदा करने से बचें और गलत विचारों पर संयम रखें।

-सूर्य को अर्ध्य देते समय लोहे, स्टील या प्लास्टिक के पात्र का इस्तेमाल करना वर्जित है।

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