बरेली: सिर्फ दो घंटे की होगी परीक्षा, 13 प्रश्नों के देने होंगे उत्तर

परीक्षा समिति की बैठक में नई शिक्षा नीति के तहत परीक्षा कराने का लिया गया निर्णय, प्रश्नपत्र में 10 प्रश्न अतिलघु, दो लघु और एक दीर्घ उत्तरी प्रश्न पूछे जाएंगे

बरेली: सिर्फ दो घंटे की होगी परीक्षा, 13 प्रश्नों के देने होंगे उत्तर

बरेली, अमृत विचार: महात्मा ज्योतिबा फुले रुहेलखंड विश्वविद्यालय ने नई शिक्षा नीति के तहत सभी विषयों की परीक्षा का समय और प्रश्नपत्रों की संख्या निर्धारित कर दी है। इसके तहत अब स्नातक विषम सेमेस्टर की परीक्षा दो घंटे की होगी। जिसमें प्रश्नपत्र में 10 अतिलघु, दो लघु (चार जिनमें से कोई दो) और एक दीर्घ उत्तरी (तीन में से कोई एक) प्रश्न पूछे जाएंगे।

शुक्रवार को कुलपति प्रो. केपी सिंह की अध्यक्षता में समिति कक्ष में ऑनलाइन और ऑफलाइन मोड में परीक्षा समिति की बैठक हुई। राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 से आच्छादित स्नातक स्तर पर बीए, बीएससी, बीकाम, बीबीए, बीएससी गृहविज्ञान प्रथम, तृतीय और पंचम सेमेस्टर सत्र 2023-24 की परीक्षा के समय निर्धारण पर विचार किया गया।

परीक्षाओं के लिए गोपनीय पत्राजात परीक्षा केंद्रों को हस्तगत करने के लिए विभिन्न जिलों में बनाए गए नोडल सेंटर पर नियुक्त शिक्षकों और कर्मचारियों के पारिश्रमिक की दरों को पुनरीक्षित किया गया। जिसमें शिक्षक का 250 से 400, तृतीय श्रेणी कर्मचारी का 125 से 150 और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी का 90 से 100 रुपये पारिश्रमिक किया गया।

सूचना का अधिकार अधिनियम के अंतर्गत उत्तर पुस्तिकाओं के अवलोकन करने के संबंध में परीक्षा परिणाम घोषित होने एक माह के भीतर इसे पूरा करने का समय निर्धारित किया गया। बैठक में परीक्षा नियंत्रक संजीव कुमार, डॉ. चमन सिंह, प्रो. शोभना सिंह, प्रो. दुष्यंत कुमार, प्रो. एसके पांडेय, डॉ. अमित सिंह, डॉ. यशपाल सिंह, प्रो. यतेंद्र कुमार, डॉ. दीपक गंगवार उपस्थित रहे।

परीक्षाओं में देरी पर कॉलेज की मान्यता भी की जाएगी रद: अकसर आंतरिक या प्रायोगिक परीक्षा कराने और अंक अपलोड करने में महाविद्यालय देरी करते हैं, जिसकी वजह से परिणाम में देरी होती है। इस पर परीक्षा समिति ने दंड का निर्धारण किया है। इसके तहत कालेजों को परीक्षा की समाप्ति से एक सप्ताह के भीतर अंक अवश्य अपलोड करने होंगे।

ऐसा न होने पर ऐसे महाविद्यालयों को अर्थदंड, अगले सत्र में प्रवेश से वंचित करने, परीक्षा का भुगतान न करने और मान्यता की समाप्ति या अन्य कोई समुचित दंड विश्वविद्यालय द्वारा लगाया जाएगा। अर्थदंड छात्रों की संख्या के परिणाम प्रभावित होने के आधार पर किया जाएगा।

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