टनकपुर: मां पूर्णागिरि धाम मेले में पानी के लिए मचा  हाहाकार 

टनकपुर: मां पूर्णागिरि धाम मेले में पानी के लिए मचा  हाहाकार 

टनकपुर, अमृत विचार। भीषण गर्मी होने के बाद भी इस समय देश के सुप्रसिद्ध मां पूर्णागिरि धाम मेले में श्रद्धालुओं की आवाजाही में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। हर रोज 20 हजार से भी अधिक श्रद्धालु इस समय मां पूर्णागिरि धाम में दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं। इस समय मेला क्षेत्र में पानी की दिक्कत होने के कारण श्रद्धालुओं को भारी दिक्कतों से दो चार होना पड़ रहा है।

सरकारी तौर पर 26 मार्च से शुरू पूर्णागिरि धाम मेला 15 जून को संपन्न होगा। भीषण गर्मी और चढ़ते पारे से मेला क्षेत्र की व्यवस्थाएं चरमरा रही हैं, खासकर बिजली और पानी की। तमाम दावों के बावजूद प्रशासन मेला क्षेत्र में इन असुविधाओं से निजात नहीं दिला पा रहा है। मेला क्षेत्र में पानी की किल्लत और बिजली की आंख-मिचौली सबसे ज्यादा सिरदर्द बन रहा है।
पूर्णागिरि धाम के लिए पिछले साल ही चार करोड़ रुपये की पेयजल योजना बनी थी, लेकिन इतनी रकम खर्च होने के बाद भी पानी का संकट कम नहीं हुआ है।

इस वक्त भैरव मंदिर से मुख्य मंदिर तक के 276 उपभोक्ताओं को रोज बमुश्किल एक घंटा पानी मिल पा रहा है। जल संस्थान इसकी वजह गर्मी में जल स्रोत में गिरावट बता रहा है। बताया जाता है कि कई जगह टंकी से कुछ लोगों को अतिरिक्त पानी देने से यह दिक्कत आ रही है। पानी के अलावा बिजली की किल्लत से भी मेला क्षेत्र जूझ रहा है। धाम के पुजारियों और मेले के दुकानदारों का कहना है कि पिछले कई दिनों से तपती गर्मी के बीच बिजली आपूर्ति एकदम अनियमित हो रही है।

बिजली की आंख-मिचौली और वोल्टेज मुसीबत बन रहा है। इससे श्रद्धालुओं को दुश्वारी होने के साथ ही कारोबार पर भी असर पड़ रहा है। इधर मां श्री पूर्णागिरि मंदिर समिति के अध्यक्ष पंडित किशन तिवारी का कहना है कि इन दिनों बड़ी संख्या में श्रद्धालु उमड़ रहे हैं, लेकिन पूर्णागिरि मेला क्षेत्र में पेयजल की जरूरत के अनुरूप आपूर्ति नहीं हो पा रही है। इससे मेला क्षेत्र की व्यवस्था और कारोबार दोनों पर असर पड़ रहा है। इससे निपटने के लिए मंदिर समिति ने कारोबारियों को घोड़े-खच्चरों से पानी ढोने की सशर्त अनुमति देने का निर्णय लिया है।
 
गर्मी और तपिश की वजह से जलकुनिया के स्रोत में 50 प्रतिशत पानी कम हुआहै। इस कारण पूर्णागिरि मेला क्षेत्र के 276 कनेक्शनधारियों को डेढ़ घंटे के बजाय एक घंटे ही पानी की आपूर्ति हो रही है। पेयजल वितरण में विसंगति रोकने के उपाय करने के साथ ही किसी भी तरह की अनियमितता को रोकने के लिए टंकी क्षेत्र में सुरक्षागत कारणों से सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं। 
-विलाल यूनुस, अधिशासी अभियंता, जल संस्थान, चम्पावत 



नगर क्षेत्र में पेयजल संकट से लोग बेहाल

नगर क्षेत्र के लिए बनी 3 पेयजल योजना होने के उपरांत भी नगर इन दिनों  गंभीर पानी संकट का सामना कर रहा है। एक दिन छोड़ कर पानी की सप्लाई की जा रही है। जिसके चलते लोग प्राकृतिक श्रोतों से पानी ढो कर अपना काम चलाने के लिए मजबूर है।

गौरतलब है कि रानीखेत छावनी क्षेत्र को गगास ताड़ीखेत पंपिंग योजना, देवीढुगा व रानीझील के पास स्थित बोरिंग से पेयजल की आपूर्ति होती है। लेकिन इन दोनों गर्मी की बढ़ते पेयजल का संकट नगर क्षेत्र में बढ़ गया है। जिसके चलते स्थानीय लोग दूर दराज के पेयजल स्रोतों से पानी लाने को मजबूर है। वही एक वर्ग ऐसा भी है जो टुल्लू पंप लगाकर दूसरो के हिस्से का पानी भी अपने घरों में खींचने से बाज नहीं आ रहा है।

ऐसे लोगों के लिए कैंट बोर्ड  सख्त रुख इख्तियार करने जा रहा है। कैंट ऐसे लोगों पर जुर्माना लगाने की तैयारी में है। कैंट ने एक पत्र विद्युत विभाग को लिखा है कि सुबह जिस समय पानी खोला जाता है उस समय क्षेत्र की बिजली काट दी जाये। ताकि सभी के घरों तक पानी पहुंच सके।

नगर में पेयजल संकट चलने से होटल व्यवसायियों में मायूसी देखी जा रही है। उनका कहना है कि पर्यटन सीजन के चलते पर्यटक यहां आते हैं। लेकिन पेयजल संकट के चलते वह भी प्रभावित हो रहे हैं। होटल व्यवसायी दूरदराज क्षेत्रो से टैंकरों के माध्यम से पानी की आपूर्ति कर रहे हैं।

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