तापमान गिरने से रबी फसलों में रोग का खतरा बढ़ा : महेश चन्द्र

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Published By Muskan Dixit
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लखनऊ, अमृत विचार : जिले में तापमान में लगातार गिरावट और आर्द्रता में वृद्धि के चलते रबी फसलों में कीट एवं रोगों के प्रकोप की संभावना बढ़ गई है। राजधानी के जिला कृषि रक्षा अधिकारी महेश चन्द्र ने किसानों को सतर्क रहने और समय रहते बचाव के उपाय अपनाने की सलाह दी है। उन्होंने कहा कि इस स्थिति को देखते हुए किसानों के बीच जागरूकता बढ़ाना आवश्यक है।

जिला कृषि रक्षा अधिकारी गुरुवार को किसानों को उत्तम खेती से अधिक आय अर्जित करने के संबन्ध में आयोजित कार्यशाला में संबोधित कर रहे थे। ब्लॉक स्तर पर आयोजित कार्यशाला में उन्होंने बताया कि गेहूं की फसल में चौड़ी एवं संकरी पत्ती वाले खरपतवार जैसे गुल्ली डंडा, जंगली जई, बथुआ और हिरनखुरी की समस्या देखी जा रही है। इनके नियंत्रण के लिए प्रथम सिंचाई के 25–30 दिन बाद अनुशंसित खरपतवारनाशकों का छिड़काव करना चाहिए। खड़ी फसल में दीमक और गुजिया कीट के नियंत्रण के लिए सिंचाई के पानी के साथ कीटनाशक प्रयोग करने की सलाह दी गई है।

महेश चंद्र ने कहा कि माहू कीट के जैविक नियंत्रण के लिए नीम आधारित दवाओं के छिड़काव की सिफारिश की गई है, जबकि अधिक प्रकोप की स्थिति में रासायनिक दवाओं का प्रयोग किया जा सकता है। पीली गेरूई रोग के नियंत्रण के लिए फफूंदनाशक दवा के छिड़काव की सलाह दी गई है।

साथ ही उन्होंने बताया कि सरसों और तोरिया फसलों में आरा मक्खी, बालदार सूंडी, लीफ माइनर एवं माहू कीट के नियंत्रण के लिए भी उचित कीटनाशकों के प्रयोग की जानकारी दी गई। इसके अलावा अल्टरनेरिया पत्ती धब्बा एवं तुलासिता रोग के नियंत्रण के लिए फफूंदनाशकों के छिड़काव की सलाह दी गई है। इस मौके पर कृषि विभाग द्वारा किसानों से अपील की है कि वे अनुशंसित मात्रा में ही दवाओं का प्रयोग करें और किसी भी समस्या पर कृषि विशेषज्ञों से संपर्क करें।

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