पहाड़ों पर बर्फ़बारी..दिल्ली पर घने कोहरे की चादर, 5 जनवरी तक शीतलहर की संभावना

Amrit Vichar Network
Edited By Anjali Singh
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दिल्ली। राष्ट्रीय राजधानी में शुक्रवार सुबह घना कोहरा छाया रहा और शीत दिवस जैसी परिस्थितियां बनी रहीं। मौसम विभाग ने यह जानकारी दी। भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के अनुसार, सफदरजंग में न्यूनतम तापमान 9.1 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। वही हिमाचल प्रदेश में लगभग चार महीने से चल रहे लंबे सूखे के बाद, मंडी में हुई हल्की बारिश और मौसम की पहली बर्फबारी ने जिले के किसानों और बाग मालिकों को राहत प्रदान की है। हाल में हुई बारिश से कृषि और बागवानी की संभावनाओं में सुधार होने की उम्मीद जगी है। इससे खासकर ऐसे सेब किसानों को मदद मिलेगी जो सर्दियों की ठंडक और मिट्टी में नमी पर अत्यधिक निर्भर होते हैं।

अन्य केंद्रों का तापमान

पालम और लोधी रोड में न्यूनतम तापमान 9 डिग्री सेल्सियस, 

रिज में 8.7 डिग्री सेल्सियस और आया नगर में 8.1 डिग्री सेल्सियस दर्ज 

मौसम विभाग ने कहा कि दो जनवरी से पांच जनवरी के बीच अलग-अलग स्थानों पर शीतलहर का असर रहने की संभावना है। विभाग के अनुसार, जब न्यूनतम तापमान सामान्य औसत से 4.5 से 6.5 डिग्री सेल्सियस नीचे चला जाता है, तो शीतलहर घोषित की जाती है। वहीं, अधिकतम तापमान सामान्य से 4.5 डिग्री सेल्सियस कम होने पर शीत दिवस की स्थिति मानी जाती है। 

मौसम कार्यालय ने यह भी बताया कि दिल्ली के कई इलाकों में रात और सुबह के समय घने से बहुत घने कोहरे की स्थिति बनी रह सकती है। अधिकतम तापमान लगभग 18 डिग्री सेल्सियस रहने की संभावना है। इस बीच, राष्ट्रीय राजधानी में वायु गुणवत्ता ‘बहुत खराब’ श्रेणी में बनी रही, हालांकि इसमें मामूली सुधार दर्ज किया गया। सुबह वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 302 रिकॉर्ड किया गया। 

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के वर्गीकरण के अनुसार, 0 से 50 के बीच एक्यूआई ‘अच्छा’, 51 से 100 ‘संतोषजनक’, 101 से 200 ‘मध्यम’, 201 से 300 ‘खराब’, 301 से 400 ‘बहुत खराब’ और 401 से 500 ‘गंभीर’ माना जाता है। सीपीसीबी के ‘समीर’ ऐप के आंकड़ों के अनुसार, 19 निगरानी केंद्र ‘बहुत खराब’, 15 ‘खराब’ और एक ‘गंभीर’ श्रेणी में रहा।

एनएसआईटी द्वारका में सबसे खराब वायु गुणवत्ता दर्ज की गई, जहां एक्यूआई 423 रहा। बृहस्पतिवार को 24 घंटे का औसत एक्यूआई 380 था। वायु गुणवत्ता पूर्व चेतावनी प्रणाली के अनुसार, चार जनवरी तक वायु गुणवत्ता ‘बहुत खराब’ श्रेणी में बनी रहने की संभावना है और इसके बाद के छह दिनों में भी इसी तरह की स्थिति रहने के आसार हैं। 

हिमाचल प्रदेश के मंडी में मौसम की पहली बर्फबारी 

इस जिले की सबसे ऊंची पर्वत चोटियां बर्फ की पतली चादर से ढंकी हुई है, जिनमें शैताधार पर्वत श्रृंखला के पवित्र धार्मिक स्थल भी शामिल हैं। करसोग और थुनाग उपखंडों के ऊंचे इलाकों में हल्की बर्फबारी हुई। इससे एक मनमोहक दृश्य देखने को मिला और यह इस मौसम की पहली घटना है। भारी बर्फबारी के मद्देनजर जिला प्रशासन ने एहतियात के तौर पर शिकारी देवी मंदिर के द्वार बंद कर दिए हैं और दुकानदारों एवं सेवादारों को परिसर खाली करने का निर्देश दिया है। 

हालांकि, अधिकारियों ने कहा कि कामरुनाग मंदिर के द्वार अभी औपचारिक रूप से बंद नहीं किए गए हैं और स्थिति पर नजर रखी जा रही है। निचले और मध्य पहाड़ी क्षेत्रों में हल्की बारिश से मिट्टी नरम हो गई है, जिससे किसानों को गेहूं की बुवाई करने में मदद मिलेगी। स्थानीय किसानों ने कहा कि बारिश और हिमपात खड़ी फसलों और पौधों के लिए फायदेमंद साबित हुए हैं, हालांकि उन्होंने कहा कि एक और बारिश की आवश्यकता है। 

बागवानी विशेषज्ञ डॉ. एस. पी. भारद्वाज ने हिमपात और बारिश को सेब के बागों के लिए वरदान बताया और कहा कि सर्दियों की बर्फबारी मिट्टी और पौधों में फैलने वाले रोगजनकों का नाश, मिट्टी के स्वास्थ्य में सुधार एवं फलों की बेहतर पैदावार सुनिश्चित करती है और एक प्राकृतिक चिकित्सा के रूप में काम करती है। इस बीच, विद्युत विभाग और सिंचाई एवं जन स्वास्थ्य विभाग सहित अन्य विभागों ने तैयारियां शुरू कर दी है। 

वरिष्ठ अधिकारियों ने कर्मचारियों को मौसम संबंधी किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए सतर्क रहने का निर्देश दिया है। किसान और बाग मालिक आशावादी बने हुए हैं, उन्हें उम्मीद है कि व्यापक बारिश एवं बर्फबारी का एक और दौर आगामी कृषि एवं बागवानी की संभावनाओं को और मजबूत करेगा। 

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