Devshayani Ekadashi : कल से शुरू होगा चातुर्मास, 4 महीने नहीं होंगे शुभ मांगलिक कार्य; पूजा के लिए बन रहे विशेष योग

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Edited By Anjali Singh
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देवशयनी एकादशी 2026 पर शुरू होगा चातुर्मास। जानिए व्रत की तिथि, पूजा विधि, शुभ मुहूर्त, पारण समय और भगवान विष्णु के योगनिद्रा में जाने से जुड़ी धार्मिक मान्यताएं

लखनऊ। आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी यानी देवशयनी एकादशी इस वर्ष 25 जुलाई को मनाई जाएगी। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इसी दिन भगवान विष्णु क्षीरसागर में योगनिद्रा में चले जाते हैं और इसके साथ ही चातुर्मास की शुरुआत हो जाती है। यह अवधि करीब चार महीने तक चलती है, जिसमें विवाह, गृह प्रवेश जैसे शुभ मांगलिक कार्यों पर विराम लग जाता है।

कब है देवशयनी एकादशी?

एकादशी तिथि प्रारंभ: शुक्रवार सुबह 9:12 बजे

एकादशी तिथि समाप्त: 25 जुलाई सुबह 11:34 बजे

व्रत तिथि: 25 जुलाई (शनिवार)

व्रत पारण का समय: 26 जुलाई सुबह 5:28 बजे से 9:58 बजे तक

इस्कॉन मंदिर के अध्यक्ष अपरिमेय श्याम दास ने बताया कि द्वादशी प्रधान एकादशी का व्रत विशेष फलदायी माना जाता है। उन्होंने कहा कि एकादशी व्रत में अन्न ग्रहण नहीं करना चाहिए और अगले दिन निर्धारित समय पर व्रत का पारण करना भी उतना ही महत्वपूर्ण होता है।

क्यों खास है देवशयनी एकादशी?

धार्मिक मान्यता है कि देवशयनी एकादशी के दिन भगवान विष्णु चार महीने के लिए योगनिद्रा में चले जाते हैं। इस अवधि को चातुर्मास कहा जाता है। मान्यता के अनुसार, भगवान विष्णु के योगनिद्रा में जाने के बाद सृष्टि का संचालन भगवान शिव संभालते हैं।चातुर्मास के दौरान साधु-संत एक स्थान पर रहकर साधना करते हैं। विवाह, मुंडन, गृह प्रवेश जैसे शुभ कार्यों को इस अवधि में टाला जाता है। भगवान विष्णु कार्तिक शुक्ल एकादशी (देवउठनी एकादशी) पर जागते हैं।

देवशयनी एकादशी पर बन रहे विशेष योग

ज्योतिषाचार्य एसएस नागपाल के अनुसार, इस बार देवशयनी एकादशी पर कई शुभ संयोग बन रहे हैं। इस दिन ब्रह्म योग के बाद इंद्र योग रहेगा। सूर्य और उच्च के गुरु का पुष्य नक्षत्र का संयोग बनेगा। इन योगों में पूजा-पाठ और धार्मिक कार्यों का विशेष फल मिलने की मान्यता है।

कैसे करें भगवान विष्णु की पूजा?

देवशयनी एकादशी पर भगवान विष्णु की पूजा के लिए ये विधियां बताई गई हैं,  भगवान विष्णु के विग्रह को पंचामृत से स्नान कराएं। धूप, दीप और पुष्प से पूजा करें। पीले वस्त्र अर्पित करें। दक्षिणावर्ती शंख में केसर मिश्रित दूध या गंगाजल से अभिषेक करें। शाम को तुलसी के पास घी का दीपक जलाएं। "ॐ नमो भगवते वासुदेवाय" मंत्र का जाप करें। तुलसी की 11 परिक्रमा करें। पीली वस्तुओं का दान करें और पीपल पर जल अर्पित करें।

इस्कॉन मंदिर में विशेष आयोजन

इस्कॉन मंदिर में देवशयनी एकादशी के अवसर पर भक्तों के लिए श्रीमद्भागवत कथा की कक्षा आयोजित की जाती है। यह सुबह 6 बजे से शुरू होती है, जिसका ऑनलाइन प्रसारण भी किया जाता है।

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