डेंगू से बचाव के लिए जन-जागरूकता आवश्यक
डेंगू आज विश्व के सबसे तेजी से फैलने वाले मच्छरजनित रोगों में से एक है। भारत सहित अनेक उष्णकटिबंधीय देशों में प्रत्येक वर्ष वर्षा ऋ तु और उसके बाद डेंगू के मामलों में वृद्धि देखी जाती है। मानसून की सक्रियता के साथ ही डेंगू का खतरा बढ़ने लगता है। हमारे देश में हर वर्ष जुलाई से सितंबर के बीच डेंगू के मरीजों की संख्या में तेजी से बढ़ोतरी होती है। यह रोग समय पर पहचान और उचित उपचार मिलने पर अधिकांश मामलों में ठीक हो जाता है, किंतु लापरवाही या देर होने पर गंभीर रूप धारण कर सकता है। इसलिए डेंगू के कारणों, लक्षणों, उपचार और बचाव की सही जानकारी प्रत्येक नागरिक के लिए आवश्यक है।-विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, डेंगू एक वायरल संक्रमण है, जो संक्रमित एडीज एजिप्टी तथा एडीज एल्बोपिक्टस मच्छरों के काटने से फैलता है। जन-जागरूकता ही इस रोग से बचाव का सबसे प्रभावी उपाय है।
क्या है डेंगू
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डेंगू एक विषाणु जनित संक्रामक रोग है। यह डेंगू वायरस (DENV) के कारण होता है, जिसके चार प्रमुख प्रकार (Serotypes) माने जाते हैं—DENV-1, DENV-2, DENV-3 तथा DENV-4। एक प्रकार का संक्रमण होने के बाद उसी प्रकार के प्रति प्रतिरक्षा विकसित हो जाती है, लेकिन अन्य प्रकार के वायरस से पुनः संक्रमण संभव है और दूसरी बार संक्रमण कभी-कभी अधिक गंभीर हो सकता है।
क्यों होती है डेंगू बीमारी
डेंगू का मुख्य कारण संक्रमित एडीज मच्छर का काटना है। यह मच्छर किसी संक्रमित व्यक्ति का रक्त चूसने के बाद दूसरे स्वस्थ व्यक्ति को काटता है, जिससे वायरस उसके शरीर में प्रवेश कर जाता है।
डेंगू फैलने के प्रमुख कारण
- घरों और आसपास पानी का जमा होना।
- कूलर, गमले, टायर, ड्रम, बाल्टी, बोतल, नारियल के खोल आदि में रुका पानी।
- वर्षा ऋ तु में जलभराव।
- सफाई की कमी।
- घनी आबादी वाले क्षेत्रों में मच्छरों की अधिक संख्या।
- मच्छरदानी या पूरे शरीर को ढकने वाले कपड़ों का उपयोग न करना।
ध्यान देने योग्य बात यह है कि डेंगू एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति को सीधे छूने, साथ बैठने, भोजन करने या सांस लेने से नहीं फैलता।
डेंगू फैलाने वाले मच्छर की विशेषताएं
- शरीर पर काले और सफेद धारियां होती हैं।
- प्रायः दिन में, विशेषकर सुबह और शाम के समय काटता है।
- साफ एवं रुके हुए पानी में अंडे देता है।
- इसकी उड़ान की सीमा अपेक्षाकृत कम होती है, इसलिए घर के आसपास सफाई अत्यंत आवश्यक है।
डेंगू के लक्षण
- संक्रमित मच्छर के काटने के लगभग 4 से 10 दिनों के भीतर लक्षण दिखाई देने लगते हैं।
- अचानक तेज बुखार (102–104°F तक)
- तेज सिरदर्द
- आंखों के पीछे दर्द
- मांसपेशियों एवं जोड़ों में तीव्र दर्द
- अत्यधिक कमजोरी
- त्वचा पर लाल चकत्ते
- पेट में तेज दर्द
- लगातार मतली और उल्टी
- भूख कम लगना
- गले में दर्द
- शरीर में कंपकंपी
इसी कारण इसे कई बार ‘हड्डी तोड़ बुखार’भी कहा जाता है। यदि ये लक्षण दिखाई दें, तो तुरंत अस्पताल जाना चाहिए-
- लगातार उल्टी होना
- पेट में तेज दर्द
- सांस लेने में कठिनाई
- नाक या मसूड़ों से रक्तस्राव
- मल या उल्टी में खून आना
- अत्यधिक कमजोरी या बेहोशी
- हाथ-पैर ठंडे पड़ना
- रक्तचाप कम होना
- प्लेटलेट्स तेजी से कम होना
यह स्थिति जानलेवा हो सकती है और तत्काल चिकित्सकीय देखभाल आवश्यक होती है।
डेंगू की जांच
डॉक्टर रोगी के लक्षणों एवं रक्त परीक्षण के आधार पर डेंगू की पुष्टि करते हैं।
मुख्य जांचें हैं-
- NS1 एंटीजन टेस्ट
- IgM एवं IgG एंटीबॉडी टेस्ट
- CBC (Complete Blood Count)
- प्लेटलेट्स की संख्या
- हेमाटोक्रिट
डॉक्टर की सलाह के बिना बार-बार अनावश्यक जांच कराने की आवश्यकता नहीं होती। डेंगू का कोई विशेष एंटीवायरल उपचार उपलब्ध नहीं है, इसलिए उपचार मुख्यतः लक्षणों के अनुसार किया जाता है।
- चिकित्सीय परामर्श
- पर्याप्त आराम करें
- अधिक मात्रा में पानी पिएं।
- ओआरएस, नारियल पानी, सूप, फलों का रस एवं अन्य तरल पदार्थ लें।
- डॉक्टर की सलाह पर केवल पैरासिटामोल का प्रयोग करें।
- नियमित रूप से चिकित्सक के निर्देशानुसार प्लेटलेट्स और अन्य जांच कराएं।
- चिकित्सक की सलाह के बिना कोई दवा न लें।
- स्वयं से एंटीबायोटिक न लें।
एस्पिरिन, आइबुप्रोफेन या डाइक्लोफेनाक जैसी दर्द निवारक दवाएँ बिना चिकित्सकीय सलाह के न लें, क्योंकि इससे रक्तस्राव का खतरा बढ़ सकता है।
प्लेटलेट्स के बारे में सही जानकारी
अक्सर लोगों में यह भ्रम रहता है कि डेंगू में केवल प्लेटलेट्स कम होना ही सबसे बड़ा खतरा है। वास्तव में डॉक्टर रोगी की संपूर्ण स्थिति, रक्तचाप, रक्तस्राव, हेमाटोक्रिट तथा अन्य लक्षणों को देखकर उपचार करते हैं। हर कम प्लेटलेट्स वाले रोगी को प्लेटलेट्स चढ़ाने की आवश्यकता नहीं होती। प्लेटलेट्स केवल विशेष परिस्थितियों में और चिकित्सकीय निर्णय के आधार पर ही चढ़ाए जाते हैं।
क्या पपीते के पत्ते या बकरी का दूध लाभकारी हैं?
लोकमान्यताओं में पपीते के पत्तों का रस, गिलोय, बकरी का दूध आदि का उल्लेख मिलता है, किन्तु इनके प्रभाव के पर्याप्त वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध नहीं हैं। इसलिए इन पर निर्भर रहने के बजाय चिकित्सक की सलाह के अनुसार उपचार कराना ही सर्वोत्तम है।
डेंगू से बचाव के उपाय
स्वास्थ्य विभाग की ओर से जारी गाइडलाइंस के अनुसार सरकारी और संबंध अस्पतालों में विशेष डेंगू वार्ड, पर्याप्त बेड, दवाओं की उपलब्धता तथा जाँच की व्यवस्था पहले से सुनिश्चित की जानी चाहिए। डेंगू की रोकथाम का सबसे प्रभावी उपाय है, मच्छरों की संख्या कम करना तथा उनके काटने से बचना है।
- पूरे शरीर को ढकने वाले कपड़े पहनें
- मच्छरदानी का प्रयोग करें।
- मच्छर भगाने वाली क्रीम या रिपेलेंट का उपयोग करें
- घर की खिड़कियों एवं दरवाजों पर जाली लगवाएं
- बच्चों एवं बुजुर्गों की विशेष सुरक्षा करें
- कूलर का पानी सप्ताह में कम-से-कम एक बार बदलें
- गमलों की प्लेटों में पानी जमा न रहने दें
- टायर, डिब्बे, बोतलें आदि खुले में न रखें
- पानी की टंकियों को ढककर रखें
- नालियों की नियमित सफाई करें
- घर के आसपास जलभराव न होने दें
- स्वच्छता अभियान चलाएं
- कीटनाशक दवाओं का छिड़काव करें
- नगर निकायों द्वारा फॉगिंग एवं लार्वा नियंत्रण कार्यक्रमों में सहयोग करें।
- मोहल्लों में जागरूकता फैलाएं।
- विद्यालयों एवं कार्यालयों में स्वास्थ्य शिक्षा कार्यक्रम आयोजित करें।
डेंगू के समय आहार
रोगी को हल्का एवं पौष्टिक भोजन देना चाहिए, जैसे दाल का पानी, खिचड़ी, दलिया, ताजे फल,नारियल पानी, मौसमी एवं संतरे का रस (यदि डॉक्टर मना न करें), सूप, पर्याप्त पानी एवं ओआरएस। तेलयुक्त, अत्यधिक मसालेदार तथा जंक फूड से बचना चाहिए। छोटे बच्चे, गर्भवती महिलाएं, बुजुर्ग, मधुमेह, हृदय या गुर्दे के रोगी, कमजोर प्रतिरक्षा वाले व्यक्ति को अधिक सावधानी रखनी चाहिए क्योंकि इनमें गंभीर डेंगू की संभावना अपेक्षाकृत अधिक हो सकती है।
समाज की भूमिका
जन - जागरूकता लाने के लिए स्वास्थ्य विभाग द्वारा प्रतिवर्ष 1 जुलाई से संचारी रोग नियंत्रण अभियान शुरू किया जाता है। इसमें सभी स्वास्थ्य केन्द्रों पर चिकित्सा को लेकर विशेष दिशा-निर्देश जारी किए जाते हैं। जन - मानस को इसके लिए सचेत रहना चाहिए तथा रोगी को यथाशीघ्र चिकित्सा उपलब्ध करानी चाहिए। डेंगू की रोकथाम केवल सरकार या स्वास्थ्य विभाग का कार्य नहीं है। प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी है कि वह अपने घर, विद्यालय, कार्यालय तथा आसपास के वातावरण को स्वच्छ रखे। यदि प्रत्येक परिवार सप्ताह में केवल दस मिनट घर के आसपास पानी जमा होने की जांच कर ले, तो डेंगू के अधिकांश प्रजनन स्थलों को समाप्त किया जा सकता है।
