सेफ ड्राइविंग: सेंसर ट्रैक पर अब वाहन चालकों की परीक्षा

Amrit Vichar Network
Edited By Anjali Singh
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सड़क हादसों में होने वालीं राष्ट्रीय चिंता का विषय हैं। यूपी में ही हर महीने बड़ी संख्या में लोग रोड एक्सीडेंट में जान गंवा रहे हैं या लंबा समय अस्पतालों में बिताने के बाद भी पूरी तरह ठीक नहीं हो पा रहे । सच ये भी है कि हादसों की सबसे बड़ी वजह ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन और ओवरस्पीड वाहन बन रहे हैं। सभी वाहन चालक नियमों को सही से समझें और उनका पालन भी करें, इसके लिए परिवहन विभाग खास इंतजाम करने में तजुटा है। 

बरेली आरटीओ ने ड्राइवरों की परीक्षा के लिए परसाखेड़ा में आटोमेटिक ड्राइविंग टेस्टिंग ट्रैक पांच हजार वर्ग मीटर में बनाया गया है। पारदर्शी व्यवस्था में केवल दक्ष चालक का ड्राइविंग लाइसेंस हासिल कर सकें, इसके लिए बनाए गए ट्रैक पर कुल 250 सेंसर व सीसीटवी कैमरों को लगाया गया। संचालन की जिम्मेदारी मेसर्स राईज टैक साफ्टवेयर प्रा. लि. न्यू लुक स्टेनलेस प्रा. लि. राजस्थान को दी गई है। सुरक्षित ड्राइविंग को लेकर ट्रैक पर चालकों की परीक्षा ली जाती है। जिसमें टेस्ट देते समय जरा सी चूक भी आवेदक को फेल कर देती है।

परसाखेड़ा में संचलित आटोमेटिक ड्राइविंग टेस्टिंग ट्रैक पर एच, ऑफ एस, पार्किंग, यू टर्न, 8, जेब्रा क्रॉसिंग प्रमुख ट्रैफिक सिग्नल बनाए गए हैं। सभी सिग्नल पर सेंसर लगा हुआ है। जो कि कंट्रोल रूम से कनेक्ट किया गया है। ड्राइविंग के वक्त गाड़ी ट्रैक के किनारे पर टच होती है तो सेंसर गलती पकड़कर आगे कम्प्यूटर को पास कर देगा। टेस्ट के समय दूसरा ड्राइविंग न करे या कोई मदद न करे, इसके लिए सीसीटीवी कैमरे लगे हैं और पूरे प्रोसेस की वीडियो रिकॉर्डिंग होती है। टेस्ट पास करने के लिए तय टाइम भी होगा यानी उतने वक्त में गाड़ी का इन-आउट होना जरुरी है। गाड़ी ट्रैक से बाहर आते ही कम्प्यूटर से फेल या पास की स्लिप जारी करता है। जिसके आधार पर आवेदक को ड्राइविंग लाइसेंस जारी होता है।

ऑटोमेटिक ड्राइविंग टेस्टिंग ट्रैक पर टेस्ट देने से पहले बरतें ये सावधानियां 

ऑटोमेटिक ड्राइविंग टेस्टिंग ट्रैक पर ड्राइविंग लाइसेंस के लिए टेस्ट देने जा रहे आवेदकों को कुछ जरूरी बातों का विशेष ध्यान रखना चाहिए। सेंसर और कैमरों से लैस इस हाईटेक ट्रैक पर हर गतिविधि खुद रिकॉर्ड होती है, इसलिए छोटी-सी गलती भी टेस्ट में असफलता का कारण बन सकती है।

टेस्ट से पहले रखें इन बातों का ध्यान 

-    निर्धारित समय से पहले टेस्टिंग सेंटर पहुंचें।
-    सभी आवश्यक दस्तावेज साथ रखें।
-    वाहन चलाने से पहले सीट बेल्ट अवश्य लगाएं। दोपहिया वाहन के लिए हेलमेट पहनना अनिवार्य है।
-     ट्रैक पर निर्धारित गति सीमा का पालन करें।
-    लेन से बाहर न जाएं और कोन  या बैरियर को न छुएं।
-     स्टॉप लाइन, जेब्रा क्रॉसिंग और ट्रैफिक संकेतों का सही ढंग से पालन करें।
-    यू-टर्न, एच-ट्रैक, एस-ट्रैक और पार्किंग टेस्ट के दौरान जल्दबाजी न करें।
-    वाहन चलाते समय मोबाइल फोन का उपयोग न करें।
-    घबराने के बजाय शांत रहें और आत्मविश्वास के साथ वाहन चलाएं।

सुरक्षित ड्राइविंग के लिए इन बातों का हमेशा ध्यान रखें

-    हमेशा सीट बेल्ट पहनें और दोपहिया वाहन चलाते समय आईएसआई मार्क वाला हेलमेट अवश्य लगाएं।
-    निर्धारित गति सीमा का पालन करें और सड़क व मौसम के अनुसार वाहन की रफ्तार नियंत्रित रखें।
-    मोबाइल फोन का उपयोग न करें। कॉल या मैसेज की आवश्यकता हो तो वाहन सुरक्षित स्थान पर रोकें।
-    नशे की हालत में कभी वाहन न चलाएं।
-    अन्य वाहनों से सुरक्षित दूरी बनाए रखें, ताकि अचानक ब्रेक लगने पर दुर्घटना से बचा जा सके।
-    ट्रैफिक संकेतों और नियमों का पालन करें और रेड लाइट, जेब्रा क्रॉसिंग और लेन अनुशासन का सम्मान करें।
-    ओवरटेक सोच-समझकर करें और केवल सुरक्षित स्थान पर ही करें।
-    वाहन की नियमित जांच कराएं, जैसे ब्रेक, टायर, लाइट, इंडिकेटर और इंजन की स्थिति।
-    बारिश, कोहरे या रात में अतिरिक्त सावधानी बरतें और हेडलाइट का सही उपयोग करें।
-    धैर्य रखें और आक्रामक ड्राइविंग से बचें, क्योंकि संयमित ड्राइविंग ही सुरक्षित ड्राइविंग की पहचान है। 

प्रदेश का दूसरा आटोमेटिक ट्रैक

पांच हजार वर्गमीटर में बना बरेली का सेंसर तकनीक वाला आटोमेटिक ड्राइविंग टेस्ट ट्रैक प्रदेश में कानपुर के बाद दूसरा है। टेस्ट के समय होने वाली गड़बड़ियों को सेंसर रीड करेंगे और सीसीटीवी कैमरे से उसकी नजर रखी जाएगी। गलती पर खुद प्वाइंट कटेंगे। तय प्वाइंट पर पास या फेल कंप्यूटर से ही तय हो जाएगा। हालंकि अब प्रदेश के अन्य जिलो में भी सुरक्षित ड्राइविंग को लेकर ऑटोमेटिक ड्राइविंग टेस्टिंग ट्रैक बनाए जा रहे है। 

आटोमेटिक ड्राइविंग टेस्ट ट्रैक पर सेंसर और सीसीटीवी कैमरे की निगरानी में आवेदकों को टेस्ट कराए जाते है। सभी वाहन चालकों से अपील है कि वह ट्रैफिक संकेतों और नियमों का पालन करें और रेड लाइट, जेब्रा क्रॉसिंग और लेन अनुशासन का सम्मान करे। ओवरटेक सोच-समझकर करें और केवल सुरक्षित स्थान पर ही करें। -पंकज सिंह, आरटीओ प्रशासन,बरेली


आसिफ अंसारी, बरेली