भगवान परशुराम की जन्मभूमि परशुरामपूरी
शाहजहांपुर जनपद की तहसील जलालाबाद, जो प्राचीन समय में परशुरामपुरी के नाम से जानी जाती थी। 2010 से लगातार हो रहे आंदोलनों के बाद हाल ही में जलालाबाद का नाम सरकार ने बदलकर परशुरामपुरी रख दिया है। इसी धरती पर भगवान परशुराम का जन्म होना न केवल माना जाता है, बल्कि इस अनुश्रुति को प्रमाणिक बनाते कई स्थल और साक्ष्य भी मौजूद हैं। साथ ही कई शोधकर्ताओं ने भी जलालाबाद को ही उनकी जन्मस्थली होना स्वीकारा है।
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कस्बे के मोहल्ला खेड़ा में स्थित हजारों साल पुराना भगवान परशुराम का मंदिर, पास के ही गांव ढकियाइन में उनकी माता रेणुका देवी का मंदिर और वहीं पर ऋ षि जमदग्नि का आश्रम आज भी भगवान परशुराम के गौरवशाली अतीत की गाथा कह रहे हैं। इसके अलावा इस महापुरुष के कार्यों से जुड़े उबरिया, कटका बहादुरपुर और गुनारा आदि गांव भी इस क्षेत्र में मौजूद हैं।
मुगल शासन में बदला था नाम
हजारों साल पहले जोगी खेड़ा के नाम से पुकारा जाने वाला यह इलाका बाद में परशुरामपुरी के नाम से मशहूर रहा और कई प्राचीन जगहों पर इसी नाम के शिलालेख भी मिले हैं। इतिहासकारों के अनुसार, मुगल शासन के दौरान यहां शासक रहे हाकिम रहमत खां ने अपने मंझले पुत्र जलालुददीन का विवाह करने के बाद इस पूरे इलाके को अपनी पुत्रवधू को मेहर में दे दिया, तभी से यह नगर पहले मेहराबाद और बाद में जलालाबाद के नाम से प्रचलित हो गया। हालांकि इसका नाम पुन: परशुरामपुरी सरकार ने रख दिया है।
माता रेणुका के पांचवें पुत्र रूप में जन्मे थे परशुराम
भगवान परशुराम के जन्म एवं जनस्थान की महिमा के बारे में महंत सत्यदेव पांडेय ने बताया कि ऋषि जमदग्नि और माता रेणुका के पांचवें पुत्र एवं विष्णु भगवान के छठे अवतार भगवान परशुराम जी का जन्म जलालाबाद के खंडहर रोड स्थिति जमदग्नि आश्रम में हुआ था, जिसे अब ढकियाइन देवी स्थान के नाम से जाना जाता है। जलालाबाद के मोहल्ला खेड़ा में जो प्राचीन काल में परशुराम खेड़ा कहलाता था, जहां एक प्राचीन दिव्य भगवान परशुराम मंदिर स्थिति है, जिसके समक्ष एक धनुषाकार एक तालाब है, जिसे परशुरामताल के नाम से जाना जाता है, जो मंदिर से जमदग्नि आश्रम तक फैला हुआ है।
कटकाबहादुरपुर में किया था सहस्त्राबाहु का वध
जलालाबाद में ही एक गांव कटकाबहादुरपुर भी हैं, जहां भगवान परशुराम ने अतातायी सहस्त्राबाहु का वध किया था और आज भी इस ग्राम की मिट्टी खोदने पर रक्त जैसी लाल निकलती है, जिस पर कई शोध हुए हैं और प्रमाणित भी हुए हैं। ऐसा बताया जाता है। मोहल्ला खेड़ा स्थित मंदिर में एक फरसा खुदाई में मिला था, जो कि जानकारों के आधार से हजारों वर्ष पुराना बताया जाता है। इस मंदिर की प्राचीनता को मानते हुए 1905 में तत्कालीन तहसीलदार प्रभुदयाल ने इसका जीर्णोद्धार कराया था।
मिला करोड़ों का बजट
भाजपा सरकार के पर्यटन राज्यमंत्री रहे डॉ. महेश शर्मा जनपद शाहजहांपुर आए थे। इसी दौरान पूर्व सांसद कृष्णा राज के आग्रह पर वह जलालाबाद में मोहल्ला खेड़ा स्थित परशुराम मंदिर आए थे। इस दौरान उन्हें भगवान परशुराम जन्म भूमि प्रबंध समिति ने आंदोलन का ब्योरा देने के बाद ज्ञापन सौंपा था, जिसमें तब वह परशुराम जन्मभूमि को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित कराने एवं भव्य निर्माण के लिए बजट निर्माण का वायदा किया। इसके बाद से केंद्रीय मंत्री जितिन प्रसाद के प्रयास के बाद मंदिर के भव्य निर्माण को करोड़ों का बजट स्वीकृत हुआ, जिससे निर्माण कार्य अभी भी चल रहा है।
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विवेक सेंगर, वरिष्ठ पत्रकार
