बुलंदी पर भारत-ऑस्ट्रेलिया संबंध

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Published By Deepak Mishra
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पिछले दो दशकों में भारत में आस्ट्रेलिया द्वारा किया गया स्वीकृत पूंजी निवेश काफी महत्वपूर्ण रहा। 1991 से लेकर अभी तक भारत सरकार ने आस्ट्रेलिया के कई संयुक्त उद्यमों को स्वीकृति दी है।

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अरविंद जयतिलक, लेखक

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आस्ट्रेलिया यात्रा ने दोनों देशों के संबंधों को उर्जा से भर दिया है। दोनों देशों के बीच उर्जा सुरक्षा पर ऐतिहासिक समझौते से भारत को अब यूरेनियम मिलने का रास्ता खुल गया है। दोनों देशों के बीच जारी साझा बयान में कहा गया है कि भारत को यूरेनियम का आयात 2015 के भारत-आस्ट्रेलिया परमाणु सहयोग समझौते और अंतर्राष्ट्रीय परमाणु उर्जा एजेंसी की निगरानी व्यवस्था के तहत होगा।

उल्लेखनीय है कि आस्ट्रेलिया के पास विश्व का तकरीबन 28 फीसद यूरेनियम भंडार है, लेकिन कानूनी अड़चनों की वजह से भारत को पर्याप्त मात्रा में नहीं मिल पाता है, लेकिन इस समझौते के उपरांत उम्मीद की जा रही है कि भारत अब आस्ट्रेलिया के सहयोग से वर्ष 2047 तक अपना परमाणु उर्जा उत्पादन 100 गीगावॉट तक पहुंचा सकता है। दोनों देशों ने हिंद-प्रशांत क्षेत्र को स्वतंत्र, शांतिपूर्ण, स्थिर और समृद्ध बनाए रखने की प्रतिबद्धता जताते हुए इस क्षेत्र में मिलकर काम करने की हामी भरी है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मेलबर्न में आस्ट्रेलिया-इंडिया सीईओ फोरम और इकोनॉमिक रोडमैप बिजनेस इवेंट के जरिए आस्ट्रेलियाई निवेशकों को भारत में निवेश करने के लिए प्रेरित किया। इसका प्रभाव यह रहा कि आस्ट्रेलिया की सबसे बड़ी पेंशन फंड कंपनी आस्ट्रेलियन सुपर ने भारत में 50 करोड़ डॉलर के निवेश का एलान किया। गौर करें तो यह पहली बार नहीं है, जब दोनों देशों ने अपने संबंधों को ऐतिहासिक ऊंचाई देने की शानदार पहल की है। 

याद होगा कि वर्ष 2023 में भारत और आस्ट्रेलिया ने दूसरी टू प्लस टू मंत्रिस्तरीय वार्ता के जरिए हिंद-प्रशांत क्षेत्र समेत दुनिया भर में गहराती गंभीर चुनौतियों से मिलकर निपटने का आह्नान किया। तब दोनों देशों ने सूचना आदान-प्रदान के साथ समुद्री व रक्षा क्षेत्र में मिलकर काम करने की हामी भरी थी। आस्ट्रेलिया ने चीन को व्यापारिक भागीदार के साथ अपने व भारत के लिए सबसे बड़ा सुरक्षा खतरा भी कहा था।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दोनों देशों के रिश्ते को परिभाषित करते हुए पहले ही कह चुके हैं कि अब दोनों देशों के रिश्ते ‘ट्रिपल सी’ यानी कॉमनवेल्थ, क्रिकेट और करी तक सीमित नहीं है, बल्कि दोनों देशों के रिश्तों का आयाम बहुत व्यापक है। भले ही दोनों देश भौगोलिक रूप से दूर हैं, लेकिन ऐतिहासिक संबंधों की डोर से बंधे हुए हैं। 

दोनों देशों के बीच आर्थिक रिश्ते लगातार परवान चढ़ रहे हैं। आस्ट्रेलियाई संसद भारत के साथ मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) को मंजूरी दे चुकी है। इस समझौते के बाद कपड़ा, चमड़ा, फर्नीचर, आभूषण और मशीनरी सहित भारत का तकरीबन 6000 से अधिक उत्पाद आस्ट्रेलियाई बाजारों में शुल्क मुक्त पहुंचने लगा है। भारतीय नागरिकों के लिए वीजा आसान हो गया है। पिछले दो दशकों में भारत में आस्ट्रेलिया द्वारा किया गया स्वीकृत पूंजी निवेश काफी महत्वपूर्ण रहा। 

1991 से लेकर अभी तक भारत सरकार आस्ट्रेलिया के कई सैकड़े संयुक्त उद्यमों को स्वीकृति प्रदान कर चुका है। वहीं भारत की सूचना तकनीक से जुड़ी कई महत्वपूर्ण कंपनियों ने आस्ट्रेलिया में वाणिज्य एवं कई संगठनों को अच्छी सुविधाएं प्रदान करने के लिए अपने कार्यालय खोल दिए हैं। इन कंपनियों के ऑफिस अधिकतर सिडनी में हैं। इनमें से आईआईटी, एचसीएल, टीसीएस, पेंटासोफ्ट, सत्यम, विप्रो, इंफोसिस, ऐपटेक, वर्ल्डवाइड, आइटीआइएल, महेंद्रा ब्रिटिश टेलकॉम लिमिटेड, मेगा सॉफ्ट आस्ट्रेलिया प्राइवेट लिमिटेड एवं जेनसार टेक्नोलोजिज इत्यादि प्रमुख कंपनियां हैं। 

मेलबोर्न में विंडसर होटल भी ओबेरॉय होटल समूह का होटल है। टाईटन घड़ियों ने सिडनी में अपना शो रूम खोल दिया है। क्वीनजलैंड में पेसिफिक पेंट कंपनी को एशियन पेंट ने खरीद लिया है। स्टालाइट कंपनी ने माउंट लोयला में दो तांबे की खानें खरीद ली हैं। एयर इंडिया, आईटीडीसी, स्टेट बैंक तथा न्यू इंडिया इंश्योरेंस कंपनी ने आस्ट्रेलिया में अपने कार्यालय खोल लिए हैं। इसी तरह आस्ट्रेलिया के वाणिज्य कर्मियों ने भी भारत में अपना कार्य शुरू कर दिया है। एएनजेड ग्रिंडले बैंक अपनी पांच दर्जन शाखाओं के साथ भारत में किसी भी विदेशी बैंक से सबसे बड़ा बैंक बन गया है।

आस्ट्रेलिया की अन्य महत्वपूर्ण कंपनियां जो भारत में कार्यरत हैं, उनमें आरटीजेड, सीआरए, नेशनल म्यूच्अल, क्वांटास, कोटी कार्पोरेशन, जोर्ड इंजीनियरिंग प्रमुख हैं। विज्ञान एवं तकनीकी समझौते के अंतरगत दोनों देश वित्तीय, शिक्षा सेवाओं, पर्यावरण, कंप्यूटर सॉफ्टवेयर, संचार, रद्दी पदार्थ प्रबंधन, फसल वायरस, रासायनिक खादों का परीक्षण तथा खाद्यान्न इत्यादि क्षेत्रों में मिलकर सुचारु रूप से काम कर रहे हैं। दोनों देशों ने द्विपक्षीय आर्थिक सहयोग के साथ-साथ बहुपक्षीय मंचों जैसे आसियान, हिंद महासागर रिम, विश्व व्यापार संगठन इत्यादि पर भी सहयोगात्मक संबंध विकसित किए हैं। (ये लेखक के निजी विचार हैं)

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