पान की गुमटी से शुरू हुआ पेट्रोल-डीजल चोरी का खेल

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Published By Indrabhushan Dubey
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पेट्रोल-डीजल चोरी के गिरोह का रविवार देर शाम क्राइम ब्रांच ने किया था खुलासा

कार्यालय संवाददाता, लखनऊ, अमृत विचार: पेट्रोल-डीजल चोरी के नेटवर्क का पर्दाफाश होने के बाद पुलिस की पूछताछ में आरोपी अनिल विश्वकर्मा ने कई अहम राज उगले हैं। पूछताछ में उसने बताया कि वह पहले हाईवे किनारे पान की दुकान चलाता था। दुकान पर अक्सर पेट्रोल और डीजल से भरे टैंकर रुकते थे। इसी दौरान उसकी टैंकर चालकों और परिवहन से जुड़े अन्य लोगों से अच्छी जान-पहचान हो गई। यही पहचान के बाद पेट्रोल-डीजल चोरी के नेटवर्क की नींव पड़ी थी।

पुलिस के मुताबिक, आरोपी ने बताया कि शुरुआत में वह मौका मिलने पर टैंकरों से पांच से छह लीटर पेट्रोल व डीजल निकालकर चोरी से बेचता था। धीरे-धीरे टैंकर चालकों से उसके संबंध मजबूत होते गए और उसने इस अवैध धंधे को बड़े स्तर पर अंजाम देना शुरू कर दिया। पिछले छह महीने के दौरान उसने अपने संपर्कों का इस्तेमाल कर पेट्रोल-डीजल चोरी और उसमें मिलावट का गिरोह तैयार कर लिया।
मास्टर चाबी से खोलते थे टैंकर
पुलिस के मुताबिक, पूछताछ में पता चला कि आरोपी के कब्जे से बरामद मास्टर चाबी पूरे गिरोह के लिए सबसे अहम हथियार थी। इसी मास्टर चाबी की मदद से डिपो से पेट्रोल पंपों के लिए रवाना होने वाले टैंकरों के ताले खोले जाते थे। जबकि इन टैंकरों की मूल चाबी संबंधित पेट्रोल पंप संचालकों के पास रहती है। आरोपी बिना ताला तोड़े मास्टर चाबी से लॉक खोलता, ईंधन निकालता और फिर टैंकर को दोबारा बंद कर देता था, जिससे चोरी का आसानी से पता नहीं चल पाता था। पुलिस ने आरोपी के कब्जे से बरामद मास्टर चाबी को जब्त कर लिया है और उसका उल्लेख बरामदगी में किया गया है। अधिकारियों का कहना है कि अब यह पता लगाया जा रहा है कि इस पूरे नेटवर्क में टैंकर चालक, परिवहन से जुड़े अन्य लोग या किसी तेल कंपनी से जुड़े कर्मचारी की भूमिका तो नहीं रही। चोरी किए गए पेट्रोल-डीजल की सप्लाई किन लोगों तक पहुंचती थी और मिलावट का कारोबार कहां-कहां संचालित हो रहा था, इसकी भी जांच की जा रही है। पुलिस का दावा है कि जल्द ही बड़े नेटवर्क का खुलासा किया जाएगा।

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