कैंपस का पहला दिन, जहां मिली नई दिशा 

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Published By Anjali Singh
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जीवन के कुछ दिन ऐसे होते हैं, जो समय बीतने के बाद भी स्मृतियों में उसी ताजगी के साथ जीवित रहते हैं। कानपुर के क्राइस्ट चर्च कॉलेज में बीकॉम प्रथम वर्ष के छात्र के रूप में बिताया गया पहला दिन मेरे जीवन की ऐसी ही अमिट यादों में शामिल है। स्कूल की सीमित दुनिया से निकलकर कॉलेज के खुले और जीवंत माहौल में कदम रखना किसी नए संसार में प्रवेश करने जैसा अनुभव था।

कॉलेज की भव्य लाल ईंटों वाली इमारत, हरे-भरे परिसर, पुराने पेड़ों की छाया और छात्रों की चहल-पहल ने पहली ही नजर में मन को आकर्षित कर लिया। प्रवेश द्वार से भीतर जाते समय मन में उत्साह भी था और हल्की-सी घबराहट भी। हर ओर नए चेहरे थे, नई आवाजें थीं और नए सपनों की चमक दिखाई दे रही थी। ऐसा लग रहा था कि जीवन का एक नया अध्याय शुरू होने जा रहा है।

पहले दिन परिचयात्मक कक्षाओं का आयोजन हुआ। प्राध्यापकों ने केवल पाठ्यक्रम की जानकारी ही नहीं दी, बल्कि कॉलेज जीवन के मूल्यों, अनुशासन और व्यक्तित्व विकास के महत्व पर भी विस्तार से बात की। उनके शब्दों ने यह एहसास कराया कि कॉलेज केवल डिग्री प्राप्त करने का स्थान नहीं, बल्कि सोच, नेतृत्व और सामाजिक समझ विकसित करने की पाठशाला भी है।

कॉलेज परिसर में घूमते हुए वरिष्ठ छात्रों से मुलाकात हुई। उनसे बातचीत के दौरान पहली बार छात्र राजनीति की सक्रिय दुनिया से परिचय मिला। परिसर में विभिन्न छात्र संगठनों की गतिविधियां, छात्रों के बीच होने वाली चर्चाएं और कॉलेज से जुड़े मुद्दों पर खुलकर अपनी बात रखने का वातावरण मेरे लिए बिल्कुल नया था। धीरे-धीरे यह समझ बनने लगी कि छात्र राजनीति केवल चुनाव तक सीमित नहीं होती, बल्कि विद्यार्थियों की समस्याओं को उठाने, उनके अधिकारों की आवाज बनने और नेतृत्व क्षमता विकसित करने का महत्वपूर्ण माध्यम भी है। 

समय के साथ मेरा जुड़ाव भी कॉलेज की छात्र राजनीति से बढ़ता गया। छात्र हितों से जुड़े मुद्दों पर सक्रिय भागीदारी, साथियों के बीच संवाद और विभिन्न आयोजनों में जिम्मेदारियां निभाने का अवसर मिला। इस प्रक्रिया ने आत्मविश्वास बढ़ाया, लोगों से संवाद करने की कला सिखाई और समाज के प्रति जिम्मेदारी का भाव भी विकसित किया।

आज जब पीछे मुड़कर देखता हूं, तो महसूस होता है कि क्राइस्ट चर्च कॉलेज का वह पहला दिन केवल एक शैक्षणिक यात्रा की शुरुआत नहीं था, बल्कि व्यक्तित्व निर्माण, नेतृत्व और सामाजिक चेतना की दिशा में उठाया गया पहला सशक्त कदम था। वही दिन आगे चलकर जीवन के अनेक निर्णयों और अनुभवों की मजबूत नींव बना, जिसकी स्मृतियां आज भी उतनी ही प्रेरणादायक हैं।


अभिनव तिवारी कानपुर

 

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