DGCA रिपोर्ट: जून में कम हुए हवाई यात्री, इंडिगो सबसे आगे, एयर इंडिया और स्पाइसजेट को नुकसान
दिल्ली। जून 2026 में देश में घरेलू हवाई यात्रियों की संख्या में गिरावट दर्ज की गई। नागर विमानन महानिदेशालय (DGCA) के अनुसार, जून में घरेलू एयरलाइंस ने करीब 1.35 करोड़ यात्रियों को सेवाएं दीं, जबकि मई में यह संख्या 1.53 करोड़ थी। यानी एक महीने में यात्रियों की संख्या में करीब 12 प्रतिशत की कमी आई। हालांकि, पिछले वर्ष जून की तुलना में गिरावट मामूली रही है। डीजीसीए के मुताबिक, जून, जुलाई और अगस्त का समय आमतौर पर एयरलाइंस के लिए यात्रियों की संख्या के लिहाज से अपेक्षाकृत धीमा माना जाता है।
इंडिगो की बाजार हिस्सेदारी बढ़ी
जून में इंडिगो की बाजार हिस्सेदारी बढ़कर 66.3 प्रतिशत हो गई, जो मई में 64.9 प्रतिशत थी। वहीं, एयर इंडिया समूह की हिस्सेदारी घटकर 23.9 प्रतिशत रह गई, जो मई में 25.6 प्रतिशत थी। इसके अलावा अकासा एयर की बाजार हिस्सेदारी बढ़कर 6.4 प्रतिशत हो गई, जबकि स्पाइसजेट की हिस्सेदारी घटकर 1.9 प्रतिशत रह गई।
छह महीने में यात्रियों की संख्या बढ़ी
डीजीसीए की रिपोर्ट के अनुसार, जनवरी से जून 2026 के दौरान घरेलू एयरलाइंस से यात्रा करने वाले यात्रियों की संख्या 864.04 लाख रही। पिछले वर्ष इसी अवधि में यह आंकड़ा 851.74 लाख था। इस तरह सालाना आधार पर 1.44 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।
समय पर उड़ान संचालन में इंडिगो सबसे आगे
समय पर उड़ान संचालन (On-Time Performance) के मामले में भी इंडिगो सबसे आगे रही। जून में इंडिगो का ओटीपी 89.4 प्रतिशत दर्ज किया गया। इसके बाद एयर इंडिया समूह (85.9 प्रतिशत), अकासा एयर (82.7 प्रतिशत), अलायंस एयर (74.7 प्रतिशत) और स्पाइसजेट (33.5 प्रतिशत) का स्थान रहा। यह आंकड़े देश के 10 प्रमुख हवाई अड्डों—दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु, हैदराबाद, चेन्नई, कोलकाता, अहमदाबाद, कोच्चि, गुवाहाटी और लखनऊ—के आधार पर तैयार किए गए हैं।
उड़ान रद्द और देरी से यात्रियों को हुई परेशानी
रिपोर्ट के अनुसार, जून में अनुसूचित घरेलू एयरलाइंस की उड़ान रद्द होने की दर 0.63 प्रतिशत रही। उड़ान रद्द होने से प्रभावित 43,968 यात्रियों के मुआवजे और सुविधाओं पर एयरलाइंस ने 61.98 लाख रुपये खर्च किए। वहीं, उड़ानों में देरी से प्रभावित 1.10 लाख से अधिक यात्रियों की सुविधाओं पर एयरलाइंस ने 2.85 करोड़ रुपये खर्च किए। इसके अलावा जून में 1,847 यात्रियों को बोर्डिंग से मना किया गया, जिनके मुआवजे और अन्य सुविधाओं पर एयरलाइंस ने 64.84 लाख रुपये खर्च किए। विशेषज्ञों का मानना है कि पश्चिम एशिया में जारी तनाव और ईंधन की बढ़ती कीमतों का असर एयरलाइंस के परिचालन और यात्री संख्या दोनों पर पड़ा है।
