लखनऊ : 10 साल बाद बढ़ा वर्दी भत्ता, फिर भी नर्सों में नाराजगी
लखनऊ, अमृत विचार : करीब एक दशक के इंतजार के बाद प्रदेश सरकार ने चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग व चिकित्सा शिक्षा विभाग के नर्सिंग कर्मचारियों के लिए वर्दी भत्ता, वर्दी नवीनीकरण और धुलाई भत्ते में बढ़ोतरी का शासनादेश जारी कर दिया है। राजकीय नर्सेस संघ ने इस फैसले का स्वागत किया है, लेकिन बढ़ाई गई राशि को वर्तमान महंगाई और वास्तविक खर्च के मुकाबले बेहद कम बताते हुए शासन से आदेश की दोबारा समीक्षा की मांग की है।
राजकीय नर्सेस संघ के महामंत्री अशोक कुमार ने कहा कि लंबे समय से लंबित मांग पूरी होने से नर्सिंग कर्मचारियों में संतोष है, लेकिन करीब 10 वर्ष बाद जारी हुए शासनादेश में बढ़ाए गए भत्ते उनकी अपेक्षाओं पर खरे नहीं उतरे। उन्होंने बताया कि शासनादेश के अनुसार वर्दी भत्ता 2500 रुपये से बढ़ाकर 4500 रुपये कर दिया गया है, जबकि धुलाई भत्ता 100 रुपये से बढ़ाकर 150 रुपये प्रतिमाह किया गया है।
संघ का कहना है कि मौजूदा महंगाई के दौर में वर्दी की खरीद, रखरखाव और धुलाई पर होने वाला खर्च काफी बढ़ चुका है। ऐसे में भत्तों में की गई बढ़ोतरी वास्तविक जरूरतों के अनुरूप नहीं है और इसमें संशोधन किया जाना चाहिए।
राजकीय नर्सेस संघ ने सरकार से यह भी मांग की है कि चिकित्सा स्वास्थ्य विभाग और चिकित्सा शिक्षा विभाग के नर्सिंग अधिकारियों एवं कर्मचारियों को भी पीजीआई, केजीएमयू, उत्तर प्रदेश आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय सैफई और लोहिया संस्थान के नर्सिंग कर्मियों की तरह समान वर्दी भत्ता तथा अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं। संघ का कहना है कि समान कार्य करने वाले नर्सिंग कर्मचारियों के बीच केवल संस्थान के आधार पर भत्तों में अंतर न्यायसंगत नहीं है।
संघ ने शासन से शासनादेश की पुनर्समीक्षा कर भत्तों की दरों में व्यावहारिक वृद्धि करने तथा सभी नर्सिंग कर्मचारियों के लिए समान सुविधाएं लागू करने की मांग की है।
