रथ यात्रा के बीच एनिमेटेड फिल्म ‘महाप्रभु जगन्नाथ’ पर ब्रेक, हाईकोर्ट ने रिलीज पर लगाई रोक
रथ यात्रा के दौरान रिलीज से बिगड़ सकती है कानून व्यवस्था, धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचने की आशंका
भुवनेश्वर। उड़ीसा हाईकोर्ट ने भगवान जगन्नाथ पर आधारित एनिमेटेड फिल्म ‘महाप्रभु जगन्नाथ’ की रिलीज पर रोक लगा दी है। अदालत ने कहा कि रथ यात्रा उत्सव के दौरान फिल्म रिलीज होने से सार्वजनिक व्यवस्था प्रभावित हो सकती है और श्रद्धालुओं की धार्मिक भावनाएं आहत होने की संभावना है।
17 जुलाई या अगली सुनवाई तक नहीं होगी रिलीज
मुख्य न्यायाधीश हरीश टंडन और न्यायमूर्ति एमएस रमन की खंडपीठ ने अंतरिम आदेश जारी करते हुए निर्देश दिया कि अदालत की अनुमति के बिना या अगली सुनवाई तक फिल्म को 17 जुलाई या उसके बाद रिलीज नहीं किया जाएगा। मामले की अगली सुनवाई पांच अगस्त को तय की गई है।
जनहित याचिका पर आया फैसला
यह आदेश महेश कुमार साहू और अन्य की ओर से दाखिल जनहित याचिका पर आया है। याचिका में केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (सीबीएफसी) द्वारा फिल्म को दिए गए प्रमाणन को रद्द करने और ओडिशा में इसके प्रदर्शन पर रोक लगाने की मांग की गई थी।
फिल्म के कुछ दृश्यों पर जताई गई आपत्ति
याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि फिल्म में भगवान जगन्नाथ के बचपन से जुड़े कुछ काल्पनिक प्रसंग, युद्ध के दृश्य और अन्य घटनाएं दिखाई गई हैं, जो स्कंद पुराण, ब्रह्म पुराण, मंदिर की परंपराओं और धार्मिक मान्यताओं के अनुरूप नहीं हैं। याचिका में कहा गया कि भगवान जगन्नाथ को काल्पनिक रूप से बोलते और व्यवहार करते दिखाना कई भक्तों की भावनाओं को ठेस पहुंचा सकता है।
टीजर रिलीज के बाद शुरू हुआ विवाद
फिल्म का टीजर छह जून को रिलीज किया गया था, जिसके बाद भक्तों, श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन (एसजेटीए) और अन्य लोगों ने आपत्तियां दर्ज कराई थीं। इसके बाद निर्माता ने पुरी के गजपति महाराज और मंदिर अधिकारियों के सामने फिल्म की विशेष स्क्रीनिंग भी की थी। स्क्रीनिंग के दौरान कई सुझाव दिए गए थे और निर्माता ने बदलाव करने का आश्वासन दिया था। हालांकि, आरोप है कि बाद में बिना बदलाव किए फिल्म को 17 जुलाई को रिलीज करने की घोषणा कर दी गई।
निर्माता ने दी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की दलील
फिल्म निर्माता ने अदालत में तर्क दिया कि फिल्म के साथ डिस्क्लेमर दिया गया है कि यह एक काल्पनिक रचना है। उन्होंने संविधान के अनुच्छेद 19(1)(ए) के तहत अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का हवाला देते हुए कहा कि फिल्म में बड़ा निवेश किया गया है।
हाईकोर्ट ने कहा- आस्था से जुड़े मामलों में सावधानी जरूरी
अदालत ने कहा कि फिल्मों को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अधिकार प्राप्त है, लेकिन यह अधिकार संविधान के अनुच्छेद 19(2) के तहत उचित प्रतिबंधों के अधीन है। कोर्ट ने कहा कि सिनेमा का समाज और विशेष रूप से धार्मिक आस्था पर गहरा प्रभाव पड़ता है, इसलिए कलात्मक स्वतंत्रता और धार्मिक भावनाओं व सार्वजनिक व्यवस्था के बीच संतुलन जरूरी है। हाईकोर्ट ने माना कि रथ यात्रा के समय फिल्म रिलीज करने से स्थिति पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है। इसलिए मामले की विस्तृत सुनवाई पूरी होने तक फिल्म की रिलीज पर रोक लगा दी गई है।
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