Bhojshala Case: सुप्रीम कोर्ट में जल्द होगी सुनवाई, हिंदू पक्ष ने कैविएट दाखिल कर रखी ये बड़ी मांग

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Published By Anjali Singh
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दिल्ली। उच्चतम न्यायालय (सुप्रीम कोर्ट) ने विवादित भोजशाला परिसर को देवी सरस्वती को समर्पित मंदिर बताए जाने संबंधी मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय के फैसले को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई करने के लिए सोमवार को अपनी सहमति जता दी है। शीर्ष अदालत इन याचिकाओं को जल्द ही सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करेगी।

मुस्लिम पक्ष ने की तत्काल सुनवाई की मांग

मामले में मुस्लिम अपीलकर्ताओं की ओर से पेश हुए वरिष्ठ वकील हुजेफा अहमदी और वकील निजाम पाशा ने प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ के समक्ष दलीलें पेश कीं। वकीलों ने पीठ से आग्रह किया कि इस संवेदनशील मामले की गंभीरता को देखते हुए याचिकाओं पर तत्काल सुनवाई की जानी बेहद जरूरी है।

इस पर प्रधान न्यायाधीश ने अपीलकर्ताओं के वकीलों को याचिकाओं में मौजूद तकनीकी कमियों को जल्द से जल्द दूर करने के निर्देश दिए। साथ ही उन्होंने भरोसा दिलाया कि कमियां दूर होते ही इन्हें जल्द ही किसी पीठ के सामने सुनवाई के लिए सूचीबद्ध कर दिया जाएगा।

क्या था मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय का फैसला?

गौरतलब है कि मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने बीते 15 मई को इस विवाद पर एक बड़ा फैसला सुनाया था। उच्च न्यायालय ने अपने आदेश में कहा था कि धार जिले में स्थित यह विवादित भोजशाला-कमाल मौला मस्जिद परिसर वास्तव में देवी सरस्वती को समर्पित एक मंदिर है।

इसके साथ ही, अदालत ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) के दशकों पुराने उस आदेश को भी पूरी तरह से रद्द कर दिया, जिसके तहत मुस्लिम समुदाय को इस परिसर में प्रत्येक शुक्रवार को नमाज पढ़ने की इजाजत दी गई थी। उच्च न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया था कि केंद्र सरकार और एएसआई मिलकर भोजशाला परिसर के प्रशासन और प्रबंधन के संबंध में अंतिम फैसला ले सकते हैं।

दोनों पक्षों के अपने-अपने दावे

इस ऐतिहासिक और पुरातत्व महत्व की इमारत को लेकर दोनों पक्षों के अपने-अपने दावे हैं, भोजशाला को वाग्देवी (देवी सरस्वती) को समर्पित एक पवित्र मंदिर मानता है। इस 11वीं सदी की प्राचीन इमारत को कमाल मौला मस्जिद कहता है। वर्तमान में यह पूरा विवादित परिसर एएसआई (ASI) के संरक्षण में है।

सुप्रीम कोर्ट पहुंचे दोनों पक्ष

उच्च न्यायालय के इस फैसले से असहमत होकर मुस्लिम पक्ष ने इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर की है। वहीं दूसरी ओर, हिंदू पक्ष ने भी उच्चतम न्यायालय में पहले ही 'कैविएट' (पूर्व सूचना याचिका) दायर कर दी है। हिंदू पक्ष की इस कैविएट में मांग की गई है कि भोजशाला परिसर विवाद मामले में उच्च न्यायालय के आदेश के खिलाफ किसी भी अपील पर सुनवाई करते समय, उनका पक्ष सुने बिना अदालत द्वारा कोई भी एकतरफा आदेश जारी न किया जाए।

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