Jagannath Rath Yatra 2026: पुरी रथयात्रा में भगदड़ से 1 श्रद्धालु की मौत, 50 से अधिक घायल

Amrit Vichar Network
Edited By Virendra Pandey
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लखनऊ, अमृत विचार : ओडिशी की तीर्थ नगरी पुरी में रुक-रुक कर हो रही बारिश की परवाह किये बिना लाखों श्रद्धालु गुरुवार को देश के सबसे बड़े और सबसे पवित्र धार्मिक त्योहारों में से एक भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा की वार्षिक रथ यात्रा देखने के लिए जमा हुए।

'जय जगन्नाथ"' और 'हरि बोल' के जयघोष, शंख की ध्वनि और झांझ तथा पारंपरिक वाद्ययंत्रों की ताल के बीच, जब तीन विशाल और शानदार ढंग से सजाए गये लकड़ी के रथ गुंडिचा मंदिर की ओर बढ़े तो उन्हें देखने के लिए श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा, लेकिन इसी बीच वहां भगदड़ मच गई, जिसमें 1 श्रद्धालु की मौत की बात सामने आ रही हैं, वहीं करीब 100 लोग घायल हुये हैं।

पूर्व सीएम ने जताया दुख

ओडिशा के पूर्व सीएम नवीन पटनायक ने बडाडांडा में रथयात्रा के दौरान भगदड़ मचने से श्रद्धालुओं की मौत पर गहरा दुख जताया है। उन्होंने कहा कि दिवंगत आत्माओं की शांति की कामना करते हैं और इस हादसे में घायल हुए 100 से अधिक लोगों के शीघ्र स्वस्थ होने के लिए प्रार्थना करते हैं। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि बीजू जनता दल के सभी कार्यकर्ता दुख की इस घड़ी में हर संभव मदद के लिए पूरा सहयोग देंगे। 

भीड़ में फंसे करीब 100 श्रद्धालुओं को सुरक्षित निकाला गया : आईजीपी

अग्निशमन और आपातकालीन सेवा के आईजीपी डॉ. उमाशंकर दाश ने एक समाचार एजेंसी से बातचीत में बताया कि पुरी रथ यात्रा के दौरान अब तक भीड़ में दबने, दम घुटने या असहज महसूस करने वाले करीब 100 श्रद्धालुओं को सुरक्षित बाहर निकाला गया है। उन्हें तत्काल अस्थायी अस्पतालों और एंबुलेंस तक पहुंचाकर चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराई गई।

डॉ. दाश ने बताया कि श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए पहली बार 25 विशेष रेस्क्यू यूनिट तैनात की गई हैं। प्रत्येक यूनिट में पांच प्रशिक्षित कर्मी और अत्याधुनिक बचाव उपकरण मौजूद हैं। उन्होंने कहा कि ये टीमें लगातार भीड़ के बीच निगरानी कर रही हैं और जरूरत पड़ने पर तुरंत राहत एवं बचाव कार्य में जुट जाती हैं।

समाचार एजेंसी एएनआई के अनुसार, आईजीपी ने यह भी बताया कि लगातार बारिश के कारण प्रशासन का फोकस अब जलभराव वाले क्षेत्रों से पानी निकालने पर है। पिछले दो दिनों में लगभग 60 स्थानों से 3 से 4 लाख लीटर से अधिक पानी निकाला जा चुका है।

बारिश पर भारी आस्था

भारी बारिश के बाद भी लाखों श्रद्धालुओं का उत्साह देखते ही बन रहा है, इस त्योहार की शुरुआत मंदिर की विस्तृत रीतियों जैसे मंगला आरती, मैलम, अवकाश, सकल धूप, रथ प्रतिष्ठा और मंगला अर्पण के साथ हुई। इसके बाद, भक्तिपूर्ण माहौल में देवताओं को 12वीं सदी के जगन्नाथ मंदिर से औपचारिक 'पहांडी' जुलूस के तहत बाहर लाया गया। पवित्र 'बैसी पहाचा' (22 सीढ़ियां) से नीचे उतरने के बाद उन्हें उनके संबंधित रथों पर विराजमान किया गया। गर्भगृह से सबसे पहले देवी सुभद्रा बाहर आईं, उनके बाद भगवान बलभद्र और अंत में भगवान जगन्नाथ। भगवान जगन्नाथ को 16 लकड़ी के पहियों वाले 45 फुट ऊंचे 'नंदीघोष' रथ पर, भगवान बलभद्र को 14 पहियों वाले 44 फुट ऊंचे 'तालध्वज' रथ पर और देवी सुभद्रा को 12 पहियों वाले 43 फुट ऊंचे 'दर्पदलन' रथ पर विराजमान किया गया। पारंपरिक कारीगर हर साल लकड़ी, कपड़े और प्राकृतिक सामग्रियों का उपयोग करके इन रथों को नए सिरे से बनाते हैं। पुरानी परंपरा के अनुसार, पुरी गोवर्धन पीठ के शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती ने अपने शिष्यों के साथ रथों पर विराजमान देवताओं के दर्शन किये। 

रथों की यात्रा शुरू होने से पहले, गजपति महाराजा दिव्यसिंह देव ने सदियों पुरानी 'छेरा पहरा' रस्म निभायी। इसमें उन्होंने देवताओं के प्रति विनम्रता दिखाते हुए सोने की झाड़ू से रथों के चबूतरे की सफाई की और साथ ही सुगंधित पानी और फूल भी छिड़के। जुलूस की शुरुआत देवी सुभद्रा के 'दर्पदलन' रथ से हुई, जिसके बाद भगवान बलभद्र का 'तालध्वज' रथ चला। जब भगवान जगन्नाथ का 'नंदीघोष' रथ मुख्य मंदिर से लगभग दो किलोमीटर दूर स्थित गुंडिचा मंदिर की ओर बढ़ने लगा, तो भक्त खुशी से झूम उठे। 

परंपरा के अनुसार, देवता गुंडिचा मंदिर में नौ दिन बिताते हैं और फिर 'बहुडा यात्रा' के दौरान जगन्नाथ मंदिर लौटते हैं। इस त्योहार के लिए सुरक्षा के कड़े इंतज़ाम किए गए थे, जिसमें ज़मीन, समुद्र और हवा तीनों स्तरों पर सुरक्षा घेरा बनाया गया था। पुलिस ने ड्रोन रोधी प्रणाली तैनात किए, तोड़-फोड़ विरोधी जांच तेज़ की और अहम जगहों पर बम निरोधक दस्ते, स्निफर डॉग स्क्वाड, राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड (एनएसजी) - प्रशिक्ष विशेष अभियान समूह (एसओजी ) के जवान और के-9 यूनिट्स को तैनात किया था। सालाना त्योहार के सुचारू आयोजन को सुनिश्चित करने के लिए भीड़ को संभालने, यातायात को नियंत्रित करने और आपातकालीन स्थिति से निपटने के व्यापक उपाय भी लागू किए गए। भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा को दुनिया के सबसे बड़े धार्मिक आयोजनों में से एक माना जाता है। यह हर साल देश-विदेश से लाखों श्रद्धालुओं को अपनी ओर आकर्षित करती है। रथों को खींचना बहुत पुण्य का काम माना जाता है। श्रद्धालुओं का मानना है कि इससे ईश्वरीय आशीर्वाद, समृद्धि और सौभाग्य की प्राप्ति होती है। 

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