Barabanki News : रेलवे स्टेशन के पास शराब ठेके को लेकर विवाद, एसपी रेलवे ने जताई सुरक्षा की चिंता
--एसपी रेलवे ने की शराब ठेका हटाने की पैरवी --आबकारी विभाग का जवाब, दुकानें नियमानुसार
योगेश शर्मा/बाराबंकी, अमृत विचार। कानून व्यवस्था, दैनिक यात्रियों से लेकर आमजन का हित छह करोड़ 41 लाख रुपये के सालाना राजस्व की भेंट चढ़ गया। रेलवे स्टेशन से महज 50 मीटर दूर स्थित शराब ठेकाें को हटाने के लिए एसपी रेलवे, स्थानीय पुलिस, दैनिक यात्री एकराय हो गए व पत्राचार तक शुरु हो गया लेकिन ठेकों की सुरक्षा ढाल बनकर आबकारी विभाग ने इस एकता की बलि ले ली। सरकारी आय की आड़ लेकर दुकानें यहां से हटाने को अनुचित साबित कर दिया गया।
बताते चलें कि रेलवे स्टेशन से महज 50 मीटर की दूरी पर विभागीय मानक के विपरीत देशी शराब का ठेका व अंग्रेजी शराब, बियर की दुकानें स्थित है। दुकान खुलने से पहले ही यहां जुटने वाले लोग धुत होने के बाद न सिर्फ यहां वहां पड़े दिखते हैं बल्कि जरायम की वजह भी बनते हैं। आए दिन झगड़ा फसाद, मारपीट आम बात हो गई है।
स्थानीय वासी तो शराबियों की फौज से आहत हैं ही साथ ही स्थानीय व रेलवे पुलिस के यह ठेका बड़ा सिरदर्द है। ठेका नजदीक होने की वजह से तमाम रेल यात्रियों के लिए भी यहां तक पहुंचना आसान है। कुछ समय पहले स्टेशन के प्लेटफार्म पर हुई घटना शराब के नशे की देन बताई जा रही है।
सबसे खास बात यह कि कहने को देशी शराब ठेका सुबह दस बजे से रात दस बजे तक खुलता है बल्कि लुक छिप कर यहां पर बने रहने वाले गुर्गे समय से पहले व बंद होने के बाद भी ऊंचे रेट पर शराब की बिक्री किया करते हैं। नशे मेे होकर उल्टी सीधी हरकतेें करना स्थानीय लोगों से उलझना व घरेलू हिंसा आम बात हो चली है। उस पर कानून व्यवस्था को खतरा तो बना ही रहता है।
एसपी रेलवे ने डीएम को लिखा था पत्र
पुलिस अधीक्षक रेलवे द्वारा जीएम रेलवे के भ्रमण के दिन ही शराब ठेका हटाए जाने का अनुरोध करते हुए जिलाधिकारी को भेजे गए पत्र में कहा गया था कि थाना जीआरपी की रिपोर्ट के अनुसार रेलवे स्टेशन के मुख्य प्रवेश द्वार के सामने अंग्रेजी शराब, बीयर और देशी शराब की दुकानें संचालित होने से कुछ यात्री तथा अन्य लोग शराब का सेवन करने के बाद रेलवे स्टेशन परिसर और प्लेटफार्मों तक पहुंच जाते हैं। नशे की हालत में कुछ लोगों द्वारा असामान्य एवं अशोभनीय हरकतें की जाती हैं, जिससे यात्रियों को असुविधा का सामना करना पड़ रहा। जीआरपी द्वारा नियमित चेकिंग और भ्रमण के दौरान ऐसे लोगों को स्टेशन परिसर से बाहर किया जाता है, फिर भी समस्या बनी हुई है। यह भी आशंका जताई कि नशे की हालत में यात्रा करने वाले यात्रियों के दुर्घटनाग्रस्त या चोटिल होने का खतरा बढ़ जाता है।
ठेकों के पक्ष में खड़ा हुआ आबकारी विभाग
एसपी रेलवे स्थानीय पुलिस व कानून व्यवस्था की चिंताओं को धता बताते हुए आबकारी विभाग ने जो रिपोर्ट तैयार की उसके अनुसार शराब दुकानों का यहां पर बने रहना कत्तई अनुचित नहीं है। आबकारी निरीक्षक इंगिता पांडेय ने आख्या दी कि इन सभी दुकानों से आबकारी विभाग को सालाना छह करोड़ 41 लाख रुपये से अधिक का राजस्व प्राप्त होता है। दूसरे यह दुकानें नियम अनुसार संचालित हो रही हैं। तीसरी वजह यह कि देशी शराब का ठेका रेलवे स्टेशन से 100 मीटर की दूरी पर स्थित है जिससे दूरी को लेकर कोई समस्या नही है। जिला आबकारी अधिकारी कुलदीप दिनकर का कहना है कि विभाग ने अपनी रिपोर्ट भेज दी है। आगे की कार्रवाई पर शासन प्रशासन निर्णय लेगा। इन दुकानों से शासन को खासा राजस्व प्राप्त हो रहा है।
रेलवे स्टेशन पर एंबुलेंस की हो उपलब्धता
हजारों की संख्या में यात्रियों की आवाजाही, सैकड़ों ट्रेनों के आवागमन व आकस्मिक घटनाओं को देखते हुए रेलवे स्टेशन पर एंबुलेंस की जरुरत लंबे समय से महसूस की जा रही थी। इसी सिलसिले में स्थानीय जीआरपी थाना पुलिस की ओर से मुख्य चिकित्सा अधिकारी को भेजे गए पत्र में यात्री हित व दुर्घटना की दशा में एंबुलेंस की तैनाती का अनुरोध किया गया है। पत्र में कहा गया है कि किसी यात्री की अचानक तबीयत बिगड़ने, रेल यात्री की आकस्मिक जरूरत व तत्काल इलाज की दशा में एंबुलेंस के रहते जीवन रक्षा में सहयोग मिल सकेगा।
