'बॉस स्कैम' से अलर्ट! AI डीपफेक वॉयस और वीडियो कॉल से मिनटों में खाली हो सकता है कंपनी का खाता, सेबी ने जारी की चेतावनी
भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र की चेतावनी के बाद सेबी ने सूचीबद्ध कंपनियों और विनियमित संस्थाओं को सतर्क रहने की सलाह दी। ठग AI आधारित डीपफेक वॉयस, वीडियो कॉल और फर्जी ई-मेल के जरिए कर्मचारियों को निशाना बना रहे हैं।
कानपुर। भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) ने देश की सभी विनियमित संस्थाओं और सूचीबद्ध कंपनियों को तेजी से बढ़ रहे नए साइबर फ्रॉड 'बॉस स्कैम' को लेकर सतर्क रहने की सलाह दी है। यह चेतावनी भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) द्वारा इस प्रकार के मामलों में बढ़ोतरी की जानकारी मिलने के बाद जारी की गई है।
AI की मदद से CEO और MD बनकर देते हैं फर्जी निर्देश
सेबी के अनुसार, 'बॉस स्कैम' एक नया साइबर धोखाधड़ी का तरीका है, जिसमें साइबर अपराधी कंपनी के सीईओ, एमडी या अन्य वरिष्ठ अधिकारियों की पहचान का दुरुपयोग करते हैं। वे कर्मचारियों, विशेष रूप से फाइनेंस टीम, को फर्जी ई-मेल, व्हाट्सऐप संदेश और AI आधारित डीपफेक वॉयस एवं वीडियो कॉल के जरिए तत्काल धनराशि ट्रांसफर करने के निर्देश देते हैं।
भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र के मुताबिक, ठग AI जनरेटेड वॉयस क्लोनिंग और डीपफेक वीडियो का उपयोग कर कर्मचारियों का भरोसा जीतते हैं और उन्हें वित्तीय लेनदेन के लिए भ्रमित करते हैं।
गोपनीयता और तत्काल भुगतान का बनाते हैं दबाव
इस साइबर फ्रॉड में अपराधी कर्मचारियों से कहते हैं कि मामला अत्यंत गोपनीय है और किसी बड़े व्यावसायिक नुकसान से बचने के लिए तुरंत भुगतान करना जरूरी है। ऐसे मामलों में धनराशि कथित तौर पर म्यूल खातों में ट्रांसफर कराई जाती है।
ZIP फाइल के जरिए भी फैलाया जा रहा मैलवेयर
सेबी ने यह भी बताया कि ठगी के एक अन्य तरीके में कर्मचारियों को ZIP फाइल भेजी जाती है। इसे डाउनलोड या इंस्टॉल करते ही सिस्टम में मैलवेयर सक्रिय हो जाता है, जिससे व्हाट्सएप वेब और अन्य सिस्टम पर अपराधियों का नियंत्रण हो सकता है। इसके बाद वे फर्जी निर्देश देकर वित्तीय धोखाधड़ी को अंजाम देते हैं।
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सेबी की सलाह: भुगतान से पहले करें पुष्टि
सेबी ने कंपनियों और कर्मचारियों से अपील की है कि केवल व्हाट्सऐप, ई-मेल या सोशल मीडिया पर मिले निर्देशों के आधार पर कोई भी भुगतान न करें। किसी भी वित्तीय निर्देश की पुष्टि संबंधित वरिष्ठ अधिकारी से फोन पर सीधे बातचीत कर अवश्य करें।
साथ ही किसी भी संदिग्ध फाइल को डाउनलोड या इंस्टॉल करने से बचें और अनावश्यक व्हाट्सएप वेब सेशन को तुरंत लॉग आउट करें। यदि साइबर धोखाधड़ी की आशंका हो या घटना हो जाए तो इसकी सूचना राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 या cybercrime.gov.in पर तत्काल दें।
वित्तीय सलाहकार राजीव सिंह ने भी कंपनियों और कर्मचारियों से साइबर सुरक्षा संबंधी सावधानियां बरतने की अपील की है।
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