Supreme Court का समय रैना पर बड़ा एक्शन, CJI बोले- 'अगर यह अहंकार नहीं, तो डिक्शनरी बदलनी पड़ेगी'

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Published By Anjali Singh
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दिव्यांगों पर कथित आपत्तिजनक टिप्पणियों के मामले में समय रैना को फटकार, कोर्ट बोला- हलफनामा तक दाखिल नहीं किया; केंद्र से सख्त कानून बनाने पर भी विचार करने को कहा

दिल्ली। कॉमेडियन समय रैना और यूट्यूबर रणवीर इलाहाबादिया एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणियों के चलते चर्चा में हैं। मंगलवार को सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत ने दोनों समेत अन्य सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स के रवैये पर नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि वे खुद को "युवाओं के स्वयंभू आदर्श (यूथ आइकन)" मानते हैं, इसलिए उनके शब्दों और व्यवहार का समाज पर गहरा असर पड़ता है।

समय रैना पर कोर्ट की नाराजगी, कहा- अदालत को किया गुमराह

प्रधान न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की खंडपीठ ने कहा कि समय रैना ने अदालत के आदेश का पालन नहीं किया। कोर्ट को बताया गया कि रैना ने अपने किसी भी शो में किसी दिव्यांग व्यक्ति को आमंत्रित नहीं किया, जबकि पिछली सुनवाई में ऐसा करने का निर्देश दिया गया था।

इस पर अदालत ने तीखी टिप्पणी करते हुए कहा, "हमें इस बात में कोई संदेह नहीं है कि समय रैना ने अदालत को गुमराह किया है। उसने इस अदालत के सामने दिए गए बयानों और शपथपत्रों का खुलेआम उल्लंघन किया है।"'

अगर यह अहंकार नहीं, तो ऑक्सफोर्ड डिक्शनरी बदलनी पड़ेगी'

सुनवाई के दौरान अदालत ने यह भी कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि संबंधित लोग यह सोचते हैं कि देश से बाहर रहने पर वे अदालत के अधिकार क्षेत्र से बाहर हो जाते हैं। प्रधान न्यायाधीश ने तल्ख अंदाज में कहा, "अब उन्हें भुगतने दीजिए। अगर यह अहंकार नहीं है, तो फिर हमें ऑक्सफोर्ड डिक्शनरी ही बदलनी पड़ेगी।"

क्या है पूरा मामला?

यह मामला 'क्योर एसएमए इंडिया फाउंडेशन' की याचिका से जुड़ा है। संस्था का आरोप है कि समय रैना ने स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी (SMA) जैसी गंभीर आनुवंशिक बीमारी के इलाज की महंगी लागत को लेकर असंवेदनशील टिप्पणी की और इस बीमारी से पीड़ित व्यक्ति का मजाक उड़ाया। सुनवाई के दौरान संस्था की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता अपराजिता सिंह ने अदालत को बताया कि समय रैना ने संगठन से कभी संपर्क ही नहीं किया और न ही किसी शो में दिव्यांग व्यक्ति को बुलाया।

'इंडियाज़ गॉट लैटेंट' के अन्य नाम भी याचिका में शामिल

याचिका में केवल समय रैना ही नहीं, बल्कि रणवीर इलाहाबादिया, आशीष चंचलानी, विपुल गोयल, बलराज परमजीत सिंह घई, सोनाली ठक्कर और निशांत जगदीश तनवर द्वारा कथित रूप से की गई आपत्तिजनक टिप्पणियों का भी उल्लेख किया गया है।

दिव्यांगों के सम्मान के लिए सख्त कानून बनाने का सुझाव

इससे पहले हुई सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से कहा था कि वह ऐसा कानून बनाने पर विचार करे, जिसके तहत दिव्यांगों या दुर्लभ आनुवंशिक बीमारियों से पीड़ित लोगों का मजाक उड़ाना या उनका अपमान करना दंडनीय अपराध बनाया जा सके। अदालत ने यह भी सुझाव दिया कि इस संबंध में अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम की तर्ज पर कानून बनाने पर विचार किया जा सकता है।

हर महीने दो प्रेरणादायक शो करने का निर्देश

शीर्ष अदालत ने समय रैना और अन्य संबंधित लोगों को भविष्य में अपने आचरण के प्रति सतर्क रहने की हिदायत देते हुए निर्देश दिया था कि वे हर महीने दिव्यांगजनों की प्रेरक और सफल जीवन यात्राओं पर आधारित दो कार्यक्रम आयोजित करें। इन कार्यक्रमों का उद्देश्य दिव्यांगों के प्रति समाज में सकारात्मक सोच विकसित करना और विशेष रूप से SMA मरीजों के इलाज के लिए आर्थिक सहायता जुटाना होगा।

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