नववर्ष पर आस्था का सैलाब, राजधानी बना धार्मिक पर्यटन का बड़ा केंद्र
लखनऊ, अमृत विचार : नववर्ष 2026 के अवसर पर राजधानी लखनऊ में धार्मिक आस्था का अभूतपूर्व दृश्य देखने को मिला। शहर के प्रमुख मंदिरों, गुरुद्वारों और जैन धार्मिक स्थलों पर लाखों श्रद्धालुओं की भीड़ से स्पष्ट होता है कि राजधानी अब धार्मिक पर्यटन के एक प्रमुख केंद्र के रूप में उभर रही है। पर्यटन विभाग की योजनाओं और सुविधाओं के विस्तार का असर नववर्ष पर साफ नजर आया।
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अलीगंज स्थित हनुमान मंदिर में गुरुवार को पूरे दिन श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। मंदिर के मुख्य पुजारी जगदंबा प्रसाद ने बताया कि मंदिर को 501 किलो फूलों से सजाया गया था और भंडारे का आयोजन निरंतर चलता रहा। यहां करीब 2.50 लाख श्रद्धालुओं ने दर्शन किए। वहीं हनुमान सेतु मंदिर में भी 1.50 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने भगवान हनुमान के दर्शन किए। मनकामेश्वर मंदिर की महंत दिव्या गिरी के अनुसार आंग्ल नववर्ष पर भव्य शोभायात्रा निकाली गई और डेढ़ लाख से अधिक भक्तों ने बाबा भोलेनाथ के दर्शन किए।
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चंद्रिका देवी मंदिर, हनुमंत धाम, आलमबाग हनुमान मंदिर सहित अन्य प्रमुख मंदिरों में भी आरती, भजन, हवन-पूजन और भंडारों का आयोजन हुआ। जैन मंदिरों में शांति धारा और अभिषेक हुए, जबकि यहियागंज, आलमबाग, इंदिरानगर और खालसा चौक के गुरुद्वारों में विशेष दीवान सजे। इससे लखनऊ का बहुधार्मिक और समावेशी स्वरूप सामने आया।
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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उप्र. को धार्मिक और सांस्कृतिक पर्यटन का केंद्र बनाने की दिशा में निरंतर कार्य हो रहा है। राजधानी के धार्मिक स्थलों पर बुनियादी सुविधाओं, सौंदर्यीकरण और सुगम आवागमन पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। नववर्ष पर उमड़ी भारी भीड़ ने यह स्पष्ट कर दिया कि धार्मिक पर्यटन न केवल आस्था को सशक्त कर रहा है, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था और रोजगार को भी मजबूती दे रहा है।
जयवीर सिंह , मंत्री पर्यटन एवं संस्कृति विभाग उप्र.
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