Bareilly: स्वच्छता सर्वेक्षण...सफाई ही नहीं, व्यवहार और अनुशासन भी मायने रखेंगे
बरेली, अमृत विचार। स्वच्छता सर्वेक्षण को लेकर नगर निगम ने तैयारियों की रफ्तार तेज कर दी है। केंद्रीय टीम के 26 जनवरी के बाद किसी भी दिन शहर में पहुंचने की संभावना के चलते निगम प्रशासन अलर्ट मोड पर है, ताकि शहर स्वच्छ, सुंदर और व्यवस्थित दिखे।
वहीं, इस पर सर्वेक्षण में केवल सफाई और कूड़ा उठान को आधार नहीं माना जाएगा, बल्कि व्यवहार, अनुशासन, सार्वजनिक स्थल पर पान-गुटखा की पीक और खुले में पेशाब-पानी के दाग पर भी निगरानी रखी जाएगी, गंदगी के फोटो और वीडियो रिकॉर्डिंग होगी, जिनके आधार पर शहर को अंक दिए जाएंगे या काटे जाएंगे। हालांकि निगम का दावा है इस बार केवल औपचारिक तैयारियों तक सीमित न रहकर स्थायी सुधारों पर भी फोकस है, ताकि सर्वेक्षण के साथ-साथ आमजन को भी स्वच्छ वातावरण का लाभ मिल सके।
शहर में 80 वार्ड है, इन सभी वार्डों में डोर-टू-डोर कूड़ा कलेक्शन को नियमित और प्रभावी बनाया जा रहा है। नालियों की विशेष सफाई कराई जा रही है, ताकि जलभराव और गंदगी की समस्या न रहे। प्रमुख सड़कों और चौराहों पर डिवाइडरों की रंगाई-पुताई, फुटपाथों की मरम्मत और सार्वजनिक स्थलों की साफ-सफाई का काम युद्धस्तर पर चल रहा है। स्ट्रीट लाइटों को भी दुरुस्त किया जा रहा है, जिससे रात के समय शहर की छवि बेहतर दिखाई दे।
सार्वजनिक शौचालयों की स्थिति लगातार जांची जा रही है। स्वच्छता सर्वेक्षण में बेहतर रैंकिंग हासिल करने के उद्देश्य से मेयर डा. उमेश गौतम और नगर आयुक्त संजीव कुमार मौर्य स्वयं मोर्चा संभाले हुए हैं। दोनों ही नियमित रूप से अफसरों के साथ समीक्षा बैठक कर जमीनी स्तर पर कार्यों की प्रगति का फीडबैक ले रहे हैं। नागरिकों की सहभागिता बढ़ाने के लिए जागरूकता अभियानों पर भी जोर दिया जा रहा है, ताकि लोग गीला-सूखा कचरा अलग करने और खुले में कूड़ा न फेंकने की आदत अपनाएं। इधर, विशेषज्ञों के मुताबिक केवल प्रशासन की कोशिशें ही नहीं, आम नागरिकों की सहभागिता और व्यवहार परिवर्तन भी रैंकिंग को बेहतर बनाने में निर्णायक भूमिका निभाएंगे।
निगरानी व्यवस्था सख्त, हर वार्ड पर है नजर
स्वच्छता सर्वेक्षण के मद्देनजर नगर निगम ने आंतरिक मॉनिटरिंग व्यवस्था को भी सख्त किया है। हर वार्ड में सफाई व्यवस्था की निगरानी के लिए जिम्मेदारियां तय की गई हैं और लापरवाही मिलने पर कार्रवाई के संकेत दिए गए हैं। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि कागजी रिपोर्ट के बजाय मौके पर जाकर स्थिति का आकलन करें। विशेष टीमें बनाकर संवेदनशील इलाकों, बाजारों और भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों पर नजर रखी जा रही है। इसके अलावा शिकायत निवारण प्रणाली को सक्रिय किया गया है, ताकि नागरिकों की समस्याओं का त्वरित समाधान हो सके।
कुछ इस तरह मिलेंगे अंक
पिछले स्वच्छता सर्वेक्षण में बरेली ने बेहतर प्रदर्शन नहीं किया था। पिछली रैंकिंग 38वीं रही थी, इसलिए इस बार नगर निगम को न सिर्फ सफाई व्यवस्था को दुरुस्त करना होगा, बल्कि सरकारी दफ्तरों, सार्वजनिक स्थानों पर गुटखा‑पान निषेध और नागरिक व्यवहार पर भी सख्ती करनी होगी। सरकारी मानदंडों के अनुसार 1500 अंक क्लीनलीनेस, 1000 अंक कचरा पृथक्करण, 1500 अंक सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट सहित अनेक श्रेणियों में मूल्यांकन किया जाता है, जिसमें नागरिकों का फीडबैक भी अहम भूमिका निभाता है। पर्यावरण अभियंता राजीव कुमार राठी का कहना है कि हम इस बार पहले से बेहतर रैंकिंग पाने के लिए तैयार हैं।
बीते पांच सालों में कुछ इस तरह मिली रैकिंग
पांच साल के आंकड़ों की बात करें तो रैंकिंग में काफी उतार-चढ़ाव रहा है। वर्ष 2019 में 117वीं, 2020 में 149वीं, 2021 में 153वीं, 2022 में 137वीं और 2024 में जारी हुई 2023 की रैंकिंग में बरेली को 80वीं रैंकिंग मिली थी। वर्ष 2025 में शहर 20वें पायदान पर आया था। इस बर टॉप 10 में जगह बनाने के लिए नगर निगम की ओर से कवायद जारी है। नगर आयुक्त संजीव कुमार मौर्य ने बताया कि स्वच्छ सर्वेक्षण को देखते हुए तेजी से काम कराए जा रहे हैं। इस बार बेहतर रैंक मिलने की उम्मीद है।
