Bareilly: सपा जिला कार्यकारिणी में सियासी रस्साकशी के बीच जातिगत समीकरण साधने पर भी जारी है सर्वेक्षण

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Published By Monis Khan
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बरेली, अमृत विचार। समाजवादी पार्टी के जिला संगठन में चुनावी हलचल चरम पर है और जिलाध्यक्ष की कुर्सी पर बेदाग, निष्पक्ष और संतुलित छवि वाले नेता को ताज पहनाने की तैयारी जोरों पर है। पार्टी नेतृत्व ने साफ कर दिया इस बार किसी एक जाति का वर्चस्व नहीं चलेगा, संगठन में सभी वर्गों और समुदायों का संतुलन बनाए रखा जाएगा।

यादव समाज के नेताओं के लिए रास्ता खुला तो कुर्मी, लोध और गैर बिरादरी समुदाय के नेताओं के लिए भी मौके की चर्चा जोरों पर है। हाईकमान ने पीडीए फार्मूला अपनाने का भी फैसला किया है। इसका मकसद केवल जातिगत समीकरण संतुलित करना ही नहीं, बल्कि आगामी चुनाव में संगठन की ताकत को अधिकतम करना और अंदरूनी विवादों को न्यूनतम करना भी है।

पार्टी के अंदरूनी सूत्र बताते हैं कि यादव, कुर्मी और लोध जातियों के नेताओं के बीच पहले से ही बातचीत शुरू हो चुकी है। अगर, यादव समाज का नेता जिलाध्यक्ष बनता है, तो गैर बिरादरी के नेताओं को अन्य महत्वपूर्ण पद दिए जाने की योजना है। यदि गैर बिरादरी का नेता चुना गया, तो यादव और कुर्मी गुटों को संगठन में महत्वपूर्ण हिस्सेदारी दी जाएगी। पार्टी के अंदर चल रही रणनीतिक बैठकों में हलचल और रस्साकशी भी देखने को मिल रही है। सूत्रों के अनुसार, पीडीए फार्मूला यह सुनिश्चित करता है कि किसी भी जाति या गुट का दबदबा न रहे और संगठन में निष्पक्षता बरकरार रहे। इसके तहत उम्मीदवार की छवि, संगठन में संतुलन और समुदायों के विश्वास को प्रधानता दी जा रही है।

इधर, सियासी जानकारों का कहना है इस बार का जिलाध्यक्ष चुनाव सिर्फ पद के लिए नहीं, बल्कि जिले में नए समीकरण और गठबंधन की परीक्षा भी है। पार्टी का संदेश साफ है चाहे यादव हो, कुर्मी, लोध या गैर बिरादरी, जो भी नेता चुना जाएगा, उसे सभी समुदायों का भरोसा जीतने में सक्षम होना चाहिए। नेतृत्व का चयन सिर्फ जातिगत समीकरण या पुरानी राजनीति के आधार पर नहीं होगा, बल्कि उम्मीदवार की निष्पक्षता और संगठन को मजबूत करने की क्षमता को प्राथमिकता दी जाएगी।

यादव को मौका होता तो अभी तक हो चुका होता फैसला
पूर्व जिलाध्यक्ष को कमान सौंपने की चर्चा फिलहाल जोर पकड़ रही है। वहीं, पार्टी के अंदरूनी सियासी गलियारों में माना जा रहा है कि अगर पूर्व जिलाध्यक्ष और बिरादरी को प्राथमिकता दी जाती, तो हाईकमान अब तक नए जिलाध्यक्ष की घोषणा कर देता, क्योंकि उन्हें नेताओं और समीकरणों की गहन जानकारी है। हालांकि हाईकमान का जोर इस बार स्वच्छ, निष्पक्ष और संतुलित छवि वाले नेता को प्राथमिकता दे रहा है, जो सभी वर्गों का विश्वास जीत सके।

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