Bareilly : वित्तमंत्री से उम्मीद... कृषि नीति के बजाय बने किसान नीति
बरेली, अमृत विचार। आम बजट से किसान भी उम्मीदें लगाए बैठे हैं। किसान संगठनों का कहना है कि इस बार बजट में न्यूनतम समर्थन मूल्य पर गारंटी कानून बनाया जाना बेहद जरूरी है, ताकि किसानों को उनकी फसल का वाजिब दाम सुनिश्चित हो सके।
किसान नेताओं का तर्क है कि हरियाणा और पंजाब में जहां करीब 80 प्रतिशत फसल एमएसपी पर खरीदी जाती है, वहीं प्रदेश में यह आंकड़ा महज छह से सात प्रतिशत तक है, जो साफ तौर पर असमानता को दर्शाता है। कहा कि देश में कृषि नीति नहीं, बल्कि किसान केंद्रित नीति बनाने की जरूरत है। किसानों को उम्मीद है कि बजट में उनकी आय बढ़ाने, लागत घटाने और खरीद व्यवस्था मजबूत करने को लेकर ठोस प्रावधान किए जाएंगे।
मंडल अध्यक्ष, भाकियू (अराजनैतिक) अरुण राठी ने बताया कि आम बजट से किसानों को उम्मीदें हैं, लेकिन अब सिर्फ घोषणाओं से काम नहीं चलेगा। देश के किसान की सबसे बड़ी मांग है कि एमएसपी पर खरीद की गारंटी, जिससे उसे फसल का उचित मूल्य मिल सके। इसके अलावा स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशें लागू हों, जिसे पहले सालों में केंद्र सरकार ने माना भी था, लेकिन अब तक इसे लागू नहीं किया गया।
जिलाध्यक्ष भाकियू (महात्मा टिकैत) दुर्गेश मौर्य के मुताबिक हरियाणा और पंजाब में 80 प्रतिशत तक फसल एमएसपी पर खरीदी जाती है, जबकि यूपी जैसे बड़े कृषि राज्य में यह आंकड़ा बेहद कम है। यह भेदभाव क्यों ? किसान सिर्फ दया नहीं, अधिकार चाहता है। बजट में ऐसी नीति बननी चाहिए जिससे हर राज्य के किसान को बराबरी का लाभ मिले। एमएसपी की गारंटी से ही यह असमानता खत्म हो सकती है।
भाकियू (अराजनैतिक) जिलाध्यक्ष तेजपाल गंगवार ने बताया कि बरेली देश को कृषि नीति की बजाय किसान नीति की जरूरत है, जिसमें किसानों के लिए पेंशन की व्यवस्था हो, जी राम जी योजना से भी किसानों को जोड़ा जाना चाहिए। हालांकि बजट से किसानों को कोई खास उम्मीदें नहीं हैं, क्योंकि सरकार का बजट केवल और केवल उद्यमी आधारित ही होता है। पिछले बजट में भी घोषणाएं खूब हुई थीं, लेकिन हासिल कुछ नहीं हुआ।
किसान एकता संघ राष्ट्रीय संगठन मंत्री -डॉ. रवि नागर ने बताया कि देश में आज भी कृषि नीति बनाई जाती है, लेकिन जरूरत किसान नीति की है। नीति ऐसी हो जो किसान की लागत, उसकी मेहनत और जोखिम को समझे। खाद, बीज, डीजल सब महंगा हो चुका है, लेकिन फसल के दाम वहीं के वहीं हैं। बजट में अगर किसानों की आय बढ़ाने और लागत घटाने के ठोस प्रावधान नहीं हुए तो हालात और बिगड़ेंगे।
