Bareilly : बजट से छोटे करदाताओं और स्टार्टअप्स को राहत...चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ने की सराहना

Amrit Vichar Network
Published By Monis Khan
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बरेली, अमृत विचार। केंद्रीय बजट 2026-27 की चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ने सराहना की और कहा कि यह बजट कर सुधार, निवेश प्रोत्साहन और दीर्घकालिक आर्थिक विकास पर केंद्रित रहा है।

बजट में छोटे कारोबारियों को मिली टीडीएस छूट, अपील के प्री डिपॉजिट टैक्स में राहत, विदेश में पढ़ाई को जाने वाले बच्चों की फीस जमा करने पर फॉरेन एक्सचेंज के टैक्स (टीसीएस) को पांच प्रतिशत से घटाकर दो प्रतिशत करने को अच्छा कदम बताया। वहीं, बजट में कैपिटल गेन टैक्स में बेस एक्सेप्शन राशि बढ़ाने की उम्मीद पूरी तरह लागू नहीं हुई।

बजट में एमएसएमई, स्टार्टअप्स और बायोफार्मा जैसे क्षेत्रों को विशेष प्रोत्साहन देने का प्रयास किया गया है, जिससे निवेश और रोजगार के नए अवसर खुलेंगे। कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि विदेशी यात्रा, शिक्षा और संपत्ति लेन-देन में कर बोझ कम करना, जुर्माना और न्यूनतम कर में सुधार, निवेश और कर अनुपालन को बढ़ावा देने के संकेत हैं।

कर अधिवक्ता रमेश पांडेय ने बताया कि बजट में टीडीएस और टीसीएस नियमों में बदलाव करके कर प्रणाली को सरल बनाने का प्रयास किया गया है, जिससे करदाता आसानी से अनुपालन कर सकें। कैपिटल गेन टैक्स में बेस एक्सेप्शन राशि को सवा लाख से बढ़ाकर दो लाख रुपये करने की संभावना थी, जो पूरी तरह लागू नहीं हुई। यह बजट दीर्घकालिक आर्थिक संतुलन और कर अनुपालन को बढ़ावा देने पर केंद्रित है, जिससे करदाताओं और अर्थव्यवस्था दोनों को लाभ मिलेगा। 

मंडलाध्यक्ष रोटरी मंडल सीए राजेन विद्यार्थी ने बताया कि यह बजट विशेष रूप से एमएसएमई और स्टार्टअप्स को प्रोत्साहित करेगा। बायोफार्मा और तीन नए आयुर्वेदिक मेडिकल हब विकास के नए अवसर खोलेंगे। आयकर में रिटर्न फाइलिंग की समय सीमा बदलने और एकमुश्त फीस की व्यवस्था से राहत मिलेगी। यह बजट लंबी अवधि के आधारभूत संरचना, औद्योगिक विकास और निवेश पर केंद्रित है, जिससे समृद्धि और जनकल्याण को बल मिलेगा।

सीए पवन अग्रवाल ने बताया कि उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्यों के लिए कोई बड़ा ऐलान नजर नहीं आया। अधिकांश धन निवेश उत्तर-पूर्वी राज्यों और बिहार की तरफ जाता दिख रहा है। इनकम टैक्स के कई प्रावधानों में पेनल्टी की जगह फीस की व्यवस्था की गई है। ऐसा लगता है कि सरकार का मुख्य फोकस ज्यादा से ज्यादा राजस्व एकत्रित करना है, जबकि बड़े राज्यों की विकास जरूरतों पर अपेक्षित ध्यान कम दिखाई देता है।

सीए अमित टंडन के मुताबिक बजट में सरकार ने विकास और वित्तीय अनुशासन के बीच संतुलन साधने का प्रयास किया है। इंफ्रास्ट्रक्चर, एमएसएमई, कृषि और ग्रामीण क्षेत्रों को प्राथमिकता दी गई है। डिजिटल इंडिया, तकनीक, शिक्षा और कौशल विकास में निवेश से दक्षता बढ़ेगी और युवा तैयार होंगे। कुल मिलाकर यह बजट स्थिरता, विकास और समावेशी अर्थव्यवस्था की दिशा में संतुलित कदम लगता है।

पूर्व अध्यक्ष आईसीएआई सीए मनोज मंगल ने बताया कि बजट आम जनता के लिए निराशाजनक रहा। आयकर के प्रावधानों में कोई महत्वपूर्ण बदलाव नहीं किए गए हैं। बेसिक टैक्स छूट और वेतनभोगी वर्ग के लिए स्टैंडर्ड डिडक्शन में कोई वृद्धि नहीं हुई। शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन टैक्स की दर 20 प्रतिशत से कम करने की उम्मीद भी पूरी नहीं हुई। कैपिटल गेन एक्सेम्प्शन बढ़ाने की मांग भी अनसुनी रह गई।

इनकम टैक्स बार एसोसिएशन पूर्व अध्यक्ष सीए अरविंद सिंह ने कहा कि बजट में सीधे कर प्रावधानों में कई महत्वपूर्ण सुधार किए गए हैं, जो करदाताओं के लिए सरलता और राहत लेकर आए हैं। टीसीएस और टीडीएस में छूट, विदेशी यात्रा और शिक्षा पर कर बोझ कम करना, संपत्ति लेन-देन में प्रक्रियात्मक सरलता, मध्यम वर्ग के लिए राहत के रूप में सामने आए हैं। बजट करदाताओं और देश की अर्थव्यवस्था दोनों के लिए सकारात्मक संदेश देता है।

सीए ऋषि पुरी ने बताया कि बजट स्वागतयोग्य है। जुर्माना और कानूनी कार्रवाई में बदलाव से छोटे करदाताओं का डर कम होगा। विदेशी आय और संपत्ति की घोषणा और अद्यतन रिटर्न प्रावधानों में कड़ाई के बावजूद ईमानदार करदाताओं को राहत मिलेगी। बजट लंबी अवधि में आर्थिक स्थिरता, निवेश प्रोत्साहन और समावेशी विकास को बढ़ाने की दिशा में एक संतुलित कदम है।

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