यूपी में बदले मौसम ने बढ़ाई किसानों की चिंता....ओला से फसलों और बारिश से आम को नुकसान, गेहूं को फायदा
लखनऊ, अमृत विचार : अचानक मंगलवार सुबह मौसम के बदले मिजाज ने किसानों और बागवानों की चिंता बढ़ा दी है। कहीं बारिश फसलों के लिए फायदेमंद हुई तो कहीं ओलावृष्टि और तेज हवाओं से फसलों को नुकसान पहुंचा है। बागवानी पर भी इसका असर दिखाई दिया। बारिश से आम के बौर काले पड़ने की संभावना जताई गई। इससे आम की पैदावार घटेगी।
कृषि विज्ञान केंद्र के अध्यक्ष/वरिष्ठ विज्ञानी डॉ. अखिलेश कुमार दुबे ने बताया जिन क्षेत्रों में बारिश के साथ ओलावृष्टि हुई है वहां गेहूं, आलू, सरसों, मटर, टमाटर समेत अन्य फसलों में नुकसान होने की संभावना है। वहीं, जिन इलाकों में सिर्फ बारिश हुई वह फसलों के लिए रामबाण है। खासकर गेहूं की दूसरी टाप ड्रेसिंग हो चुकी फसलों की बारिश से गुणवत्ता और उत्पादकता बढ़ेगी। किसानों को सिंचाई करने की जरूरत नहीं है। जहां जलभराव की स्थिति है वहां निकासी करें। और खेत सूखने तक सिंचाई न करें।
इसके अलावा बाग में जिन आम के पेड़ों में बौर आए वो बारिश से काले पड़ने की संभावना है। जिन पेड़ों में जाला व कीट लगा था वह बारिश के पानी से धुलकर साफ हो गया है। इससे किसानों को पेड़ों की धुलाई करने की जरूरत नहीं है। ऐसी स्थिति में बागवानों को बौर बचाने की जरूरत है। फूल यानी बौर लगे पेड़ों में एक ग्राम थायोफिनेट मिथाइल प्रति लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करें। इसके अलावा सभी पेड़ों पर दो ग्राम सल्फर प्रति लीटर पानी में मिलाकर जरूर छिड़कें। इससे गर्मी आएगी और फफूंदी नहीं लगेगी।
सर्वे शुरू, बीमित फसलों का 72 घंटे के अंदर करें व्यक्तिगत दावा
इधर, बारिश से प्रभावित फसलों का उपनिदेशक कृषि विनय कौशल ने सर्वे कराकर न्याय पंचायत वार रिपोर्ट मांगी है। इससे की नुकसान का आकलन किया जा सके। साथ ही किसानों से प्रधानमंत्री फसल बीमा के तहत बीमित फसलों का व्यक्तिगत दावा करने की अपील की है। बताया कि बेमौसम बारिश से फसलों की क्षति होने पर टोल-फ्री नंबर 14447 पर 72 घंटे के अंदर शिकायत दर्ज कराएं। इसके अलावा किसान संबंधित बैंक, जिला कृषि अधिकारी अथवा उपनिदेशक कार्यालय में लिखित शिकायत भी दें। फसल बीमा की टीम स्थलीय सर्वेक्षण करके क्षतिपूर्ति देगी।
