मणिपुर में नई सरकार के गठन के महज 24 घंटे बाद फिर भड़की हिंसा, कुकी समुदाय में भारी रोष
मणिपुरः मणिपुर में लंबे समय से चली आ रही जातीय अशांति के बीच राष्ट्रपति शासन हटने और नई सरकार बनने के तुरंत बाद राज्य में एक बार फिर तनाव और हिंसा की लहर दौड़ गई है। बुधवार को युमनाम खेमचंद सिंह के नेतृत्व में बनी नई सरकार के शपथ ग्रहण के महज एक दिन बाद गुरुवार को कुकी-ज़ो बहुल चुराचांदपुर जिले में भारी विरोध प्रदर्शन हुए, जो हिंसक झड़पों में बदल गए।
क्या है विवाद की जड़?
नई सरकार में कुकी-ज़ो समुदाय की भाजपा विधायक नेमचा किपगेन को उपमुख्यमंत्री बनाए जाने से उनके अपने समुदाय में गहरा आक्रोश फैल गया है। नेमचा किपगेन ने नई दिल्ली के मणिपुर भवन से वर्चुअल रूप से शपथ ली, जबकि अन्य कुकी-ज़ो विधायकों ने इंफाल में शपथ समारोह में हिस्सा लिया। कई कुकी संगठनों ने इसे 'गद्दारी' करार देते हुए अपने विधायकों को सरकार में शामिल न होने की चेतावनी दी थी। प्रदर्शनकारियों का मानना है कि जातीय हिंसा और विस्थापन की पीड़ा के बीच राजनीतिक भागीदारी उनके हितों के खिलाफ है।
चुराचांदपुर में क्या हुआ?
तुइबोंग इलाके में सैकड़ों प्रदर्शनकारियों ने सड़कों पर उतरकर टायर जलाए, नारेबाजी की और नेमचा किपगेन के खिलाफ नारे लगाए। सुरक्षा बलों ने स्थिति संभालने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़े और लाठीचार्ज किया। पथराव के जवाब में भीड़ ने सुरक्षा बलों पर हमला किया, जिससे दो लोग मामूली रूप से घायल हो गए। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए अतिरिक्त बलों की तैनाती की गई है, लेकिन इलाका पूरे दिन तनावपूर्ण रहा।
बंद और आगे के आह्वान
कुकी-ज़ो संगठनों के जॉइंट फोरम ऑफ सेवन (JF7) ने कुकी-ज़ो बहुल क्षेत्रों में 12 घंटे के 'पूर्ण बंद' का आह्वान किया है। कई जगहों पर विरोध प्रदर्शन जारी हैं, और समुदाय के कुछ संगठनों ने विधायकों को कड़ी चेतावनी दी है।
मणिपुर में मई 2023 से मैतेई और कुकी समुदायों के बीच जारी हिंसा ने सैकड़ों लोगों की जान ली है और हजारों को बेघर किया है। राष्ट्रपति शासन के बाद नई सरकार को शांति बहाल करने की उम्मीद थी, लेकिन यह घटना दर्शाती है कि जातीय तनाव अभी भी गहरा है और राजनीतिक कदमों से स्थिति और जटिल हो सकती है।
