Moradabaad : पढ़ाई के साथ सेहत और खेल का संतुलन जरूरी
पर्याप्त नींद, पौष्टिक आहार, 30 मिनट व्यायाम व डिजिटल डिटॉक्स से बढ़ती है एकाग्रता
मुरादाबाद, अमृत विचार। बोर्ड परीक्षाओं का समय विद्यार्थियों के लिए चुनौतीपूर्ण होता है। बेहतर अंक लाने की होड़ में कई छात्र-छात्राएं देर रात तक जागकर पढ़ाई करते हैं, खेलकूद और शारीरिक गतिविधियों से दूरी बना लेते हैं और खानपान में भी लापरवाही करने लगते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि केवल पढ़ाई ही सफलता की गारंटी नहीं है, बल्कि शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य का संतुलन भी उतना ही जरूरी है।
शिक्षाविदों के अनुसार परीक्षा के दौरान 7 से 8 घंटे की नियमित नींद लेना बेहद जरूरी है। पर्याप्त नींद से दिमाग तरोताजा रहता है और याद की गई बातें लंबे समय तक स्मरण रहती हैं। वहीं जंक फूड, तली-भुनी चीजों और अधिक मीठे से बचना चाहिए। इसके स्थान पर फल, हरी सब्जियां, दालें, दूध, ड्राई फ्रूट्स और पर्याप्त पानी को दिनचर्या में शामिल करना चाहिए। रोजाना हल्का व्यायाम, योग, प्राणायाम या कोई पसंदीदा खेल मानसिक तनाव को कम करता है और एकाग्रता बढ़ाता है। लगातार कुर्सी पर झुककर बैठने से शरीर में दर्द और थकान होती है, इसलिए सही मुद्रा में बैठकर पढ़ाई करना भी जरूरी है। बीच-बीच में छोटे ब्रेक लेने से दिमाग को आराम मिलता है और पढ़ाई अधिक प्रभावी होती है। आज के डिजिटल युग में मोबाइल और सोशल मीडिया भी छात्रों की एकाग्रता भंग करने का बड़ा कारण बन रहे हैं। विशेषज्ञों ने परीक्षा के दौरान ‘डिजिटल डिटॉक्स’ अपनाने की सलाह दी है, ताकि छात्र बिना किसी व्यवधान के पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित कर सकें।
पढ़ाई के बीच में 10-15 मिनट का ब्रेक जरूरी
राजकीय हाईस्कूल हुसैनपुर छिरावली में विज्ञान की शिक्षक बबीता मेहरोत्रा का कहना है बोर्ड परीक्षा जीवन का एक महत्वपूर्ण पड़ाव जरूर है, लेकिन सब कुछ नहीं है। बच्चे पढ़ाई के साथ अपने स्वास्थ्य का पूरा ध्यान रखें। पर्याप्त नींद लेने से दिमाग सक्रिय रहता है और याददाश्त मजबूत होती है। कई छात्र देर रात तक पढ़ते हैं, जिससे अगली सुबह उनींदापन बना रहता है और पढ़ाई का असर कम हो जाता है। संतुलित आहार बहुत जरूरी है। पढ़ाई के बीच 10-15 मिनट का ब्रेक लेकर हल्की स्ट्रेचिंग या टहलना लाभदायक रहता है। माता-पिता को भी बच्चों पर अनावश्यक दबाव नहीं डालना चाहिए, बल्कि उनका मनोबल बढ़ाना चाहिए।
दिमाग को तरोताजा रखती हैं शारीरिक गतिविधियां
क्रीड़ाधिकारी व क्रिकेट कोच सुनील कुमार सिंह ने बताया कि अक्सर छात्र परीक्षा के समय खेलना बंद कर देते हैं, जो बिल्कुल गलत है। खेल और शारीरिक गतिविधियां दिमाग को तरोताजा रखती हैं। रोजाना 30 मिनट से एक घंटा तक खेल, दौड़, योग या प्राणायाम तनाव को काफी हद तक कम करता है। शरीर सक्रिय रहेगा तो दिमाग भी सक्रिय रहेगा। लगातार बैठकर पढ़ने से थकान और पीठ दर्द की समस्या बढ़ती है। सही बॉडी पोश्चर में बैठकर पढ़ाई करें। मोबाइल व टीवी का समय सीमित कर आउटडोर गतिविधियों को प्राथमिकता दें। परीक्षा की तैयारी मैराथन की तरह है, इसमें संतुलन और निरंतरता जरूरी है।
हावी न होने दें परीक्षा का तनाव
मंडलीय मनोविज्ञान केंद्र की मनोवैज्ञानिक रीना तोमर का कहना है कि परीक्षा का तनाव स्वाभाविक है, लेकिन इसे हावी नहीं होने देना चाहिए। सकारात्मक सोच और आत्मविश्वास से आधी चिंता स्वतः खत्म हो जाती है। छात्र अपनी तुलना दूसरों से न करें। समय-समय पर गहरी सांस लेने के अभ्यास, ध्यान और रिलैक्सेशन तकनीक अपनाएं। पर्याप्त नींद मानसिक संतुलन के लिए अनिवार्य है। देर रात तक मोबाइल चलाना नींद की गुणवत्ता को प्रभावित करता है, इसलिए डिजिटल डिटॉक्स जरूरी है। पढ़ाई के दौरान छोटे-छोटे लक्ष्य बनाएं और उन्हें पूरा करने पर खुद को सराहें। परिवार और शिक्षकों का सहयोग बच्चों के आत्मबल को मजबूत करता है।
