UP में पोस्टमार्टम व्यवस्था को लेकर नई गाइडलाइन जारी, यहां पढ़ें डिटेल

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Edited By Amrit Vichar
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लखनऊ। उत्तर प्रदेश के चिकित्सा शिक्षा विभाग ने प्रदेश के चिकित्सा विश्वविद्यालयों, सरकारी एवं निजी मेडिकल कॉलेजों में शव-विच्छेदन (पोस्टमार्टम) की व्यवस्था को सुव्यवस्थित और मानकीकृत करने के उद्देश्य से नई गाइडलाइन जारी की है। अपर मुख्य सचिव अमित कुमार घोष द्वारा जारी शासनादेश में पोस्टमार्टम प्रक्रिया को पारदर्शी, जवाबदेह और शैक्षणिक दृष्टि से उपयोगी बनाने पर विशेष जोर दिया गया है। 

जारी निर्देशों के अनुसार, निजी मेडिकल कॉलेजों को उत्तर प्रदेश शरीर रचना परीक्षण अधिनियम-1956 के प्रावधानों के तहत शैक्षणिक उद्देश्यों के लिए शव उपलब्ध कराए जाएंगे। इन संस्थानों में नियुक्त फॉरेंसिक मेडिसिन विभाग के शिक्षक और रेजिडेंट चिकित्सक शव परीक्षण की प्रक्रिया संपन्न कर सकेंगे। हालांकि, जिन मामलों में जघन्य अपराध या बोर्ड द्वारा पोस्टमार्टम आवश्यक होगा, ऐसे प्रकरण निजी मेडिकल कॉलेजों को संदर्भित नहीं किए जाएंगे। 

वहीं प्रदेश के प्रमुख चिकित्सा संस्थानों जैसे केजीएमयू, आरएमएलआईएमएस, एसजीपीजीआई, यूपीयूएमएस, बीएचयू, एएमयू तथा एम्स गोरखपुर और रायबरेली में जहां फॉरेंसिक मेडिसिन विभाग उपलब्ध है, वहां पोस्टमार्टम कार्य उसी विभाग के माध्यम से कराया जाएगा। शासनादेश में कहा गया है कि जहां पोस्टमार्टम हाउस की सुविधा उपलब्ध नहीं है, वहां जिलाधिकारी की अध्यक्षता में एक जिला स्तरीय समिति गठित की जाएगी।

इस समिति में मुख्य चिकित्सा अधिकारी, पुलिस अधीक्षक और संबंधित मेडिकल कॉलेज के प्रतिनिधि शामिल होंगे। समिति शवों के आवंटन और प्रक्रिया की निगरानी करेगी। आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि पोस्टमार्टम हाउस का निर्माण और संचालन राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (एनएमसी) के मानकों तथा राज्य सरकार द्वारा निर्धारित दिशानिर्देशों के अनुरूप होगा। पोस्टमार्टम की वीडियोग्राफी, रिपोर्टिंग और अभिलेख संधारण की जिम्मेदारी संबंधित विभागाध्यक्ष की होगी।

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