व्यापारिक साझेदारी में अब खाड़ी की बारी...
जब दुनिया के बड़े देश अपने प्रभुत्व और वर्चस्व के लिए सीमाओं के साथ व्यापार और टैरिफ युद्ध में उलझे हैं, तब भारत लगातार तेजी से अपने व्यापारिक बाजार में विविधता का रंग भरने में जुटा है। वह अब किसी एक देश या क्षेत्र पर आयात और निर्यात के लिए निर्भर नहीं रहना चाहता है। यही वजह है कि भारत ट्रेड डील्स के जरिए नए-नए बाजार और सप्लाहई लाइन खोज रहा है।
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यूरोपीयन यूनियन से मदर ऑफ डील और अमेरिका से महाडील फाइनल होने के बाद अब भारत की नजर खाड़ी देशों पर है। इसके लिए भारत पश्चिमी एशिया के छह देशों के समूह खाड़ी सहयोग परिषद (सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, कतर, कुवैत, ओमान और बहरीन ) के साथ मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) करने की कवायद में जुट गया है। दोनों पक्ष मुक्त व्यापार समझौते पर बातचीत शुरू करने के लिए नियम और शर्तों पर हस्ताक्षर कर चुके हैं। इससे लंबे समय से अटकी बातचीत को फिर से आगे बढ़ाने का रास्ता मिल गया है।
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नियम-शर्तों में प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौते का दायरा, बातचीत का स्वरूप और तौर-तरीका तय किया गया है। इससे यह साफ हो गया है कि व्यापार समझौते में किन सेक्टर्स को शामिल किया जाना है, फिर बातचीत उसी दिशा में आगे बढ़ेगी।
भारत और खाड़ी सहयोग परिषद के बीच मुक्त व्यापार समझौते को लेकर साल 2006 और 2008 में पहले भी दो दौर की बातचीत हो चुकी है। लेकिन परिषद द्वारा सभी देशों और आर्थिक समूहों के साथ वार्ता स्थगित करने के फैसले लिए जाने के बाद तीसरा दौर नहीं हो पाया था।
इस तरह साल 2011 से रुके हुए समझौते के लिए अब फिर से बातचीत शुरू हो रही है। यह समझौता होने से भारत और खाड़ी देशों के बीच वस्तुओं, सेवाओं और निवेश का प्रवाह तेज और आसान हो जाएगा। भारत मई 2022 में संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के साथ पहले ही मुक्त व्यापार समझौता कर चुका है। भारत और ओमान भी बीते वर्ष दिसंबर में व्यापक आर्थिक भागीदारी समझौते पर हस्ताक्षर कर चुके हैं। ऐसे में खाड़ी सहयोग परिषद के साथ प्रस्तावित व्यापार समझौते को अगली कड़ी के तौर पर देखा जा रहा है।
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खाड़ी देशों से व्यापारिक समझौता होने का मतलब है कि पाकिस्तान, बांग्लादेश जैसे भारत विरोधी देशों की कमर और टूट जाएगी, क्योंकि खाड़ी देशों के बाजारों में भारतीय उत्पादों की पहुंच काफी आसान हो जाएगी। अभी बांग्लादेश बड़े पैमाने पर खाड़ी देशों में रेडीमेड गारमेंट्स, निटवेयर, जूट उत्पाद, चमड़े के उत्पाद और कृषि उत्पादों का निर्यात करता है तो पाकिस्तान चावल, वस्त्र, फल, सब्जियां, मांस, चमड़े के उत्पाद और खेल के सामान की आपूर्ति करता है।
खाड़ी देशों के बाजारों में जहां तक भारत की पहुंच की बात है तो, वित्तीय वर्ष 2024-25 के दौरान खाड़ी सहयोग परिषद के साथ भारत का कुल द्विपक्षीय व्यापार 178.56 अरब डॉलर का रहा था, जो भारत के वैश्विक व्यापार का 15.42 प्रतिशत है। इसमें भारत से 56.87 अरब डॉलर का निर्यात किया गया, जबकि आयात 121.68 अरब डॉलर था। इसमें दो राय नहीं कि खाड़ी सहयोग परिषद के साथ भारत का व्यापार लगातार बढ़ रहा है।
भारत के कारोबारी वहां बड़े पैमाने पर चावल, वस्त्र, मशीनरी, इंजीनियरिंग साजो-सामान, रत्न और आभूषण का निर्यात करते हैं जबकि वहां से भारत को कच्चा तेल, प्राकृतिक गैस-एलएनजी, पेट्रोकेमिकल्स और सोने जैसी कीमती धातुएं आती हैं।
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खाड़ी सहयोग परिषद के साथ मुक्त व्यापार समझौते में भारत की सबसे बड़ी चिंता व्यापार घाटा कम करना है। उम्मीद की जा रही है कि इस समझौते के बाद व्यापार घाटा न सिर्फ कम होगा बल्कि हमारे दक्ष युवाओं को वहां रोजगार और तेजी से मिलेगा।
ऑपरेशन सिंदूर के बाद पाकिस्तान लगातार कोशिश कर रहा है कि किसी तरह मुस्लिम राष्ट्रों को भारत से दूर करे, लेकिन भारतीय कूटनीति के आगे उसकी चाल कामयाब नहीं हो पा रही है। सितंबर 2025 में सऊदी अरब और पाकिस्तान ने एक ‘सामरिक पारस्परिक रक्षा समझौता’ किया था। इसके बावजूद सऊदी अरब चाहता है कि भारत से जल्द मुक्त व्यापार समझौता हो जाए, ताकि व्यापार में सुगमता हो।
यूएई के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान ने भी पिछले दिनों भारत दौरे पर कहा था कि वे चाहते हैं कि दोनों देश आपसी कारोबार को 2032 तक दोगुना कर 200 अरब डॉलर तक ले जाएं। वैसे भी खाड़ी देशों में यूएई और सऊदी अरब भारत के सबसे बड़े व्यापारिक साझेदार हैं। यूएई के साथ द्विपक्षीय व्यापार बढ़कर 100.06 अरब डॉलर हो गया है, जो वित्त वर्ष 2024 में 83.6 अरब डॉलर था।
इसी तरह खाड़ी सहयोग परिषद के देशों में सऊदी अरब भारत का दूसरा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है, जिसके साथ वित्त वर्ष 2025 में द्विपक्षीय व्यापार 41.88 अरब डॉलर था। वित्त वर्ष 2024-25 में कतर के साथ व्यापार 14.15 अरब डॉलर का रहा, इसके बाद ओमान के साथ 10.61 अरब डॉलर, कुवैत के साथ 10.22 अरब डॉलर और बहरीन के साथ 1.64 अरब डॉलर का व्यापार हुआ। खाड़ी सहयोग परिषद की अध्यक्षता बहरीन के पास है।
बहरीन और भारत के बीच घनिष्ट रिश्ते हैं। बहरीन भी चाहता है कि परिषद और भारत के बीच मुक्त व्यापार समझौता हो ताकि कारोबार और सुगम हो सके। ऐसा होने से भारत के चर्म उत्पाद, वस्त्र उत्पादों का निर्यात बड़े पैमाने पर हो सकेगा। अभी वहां की मार्केट में बांग्लादेश की पहुंच अधिक है। व्यापार समझौता होने से वस्तुओं और सेवाओं पर लगने वाला आयात शुल्क या तो बहुत कम हो जाएंगे अथवा खत्म जाएंगे। इसी तरह खाड़ी देशों की बाजार में भारतीय सामानों की लागत पाकिस्तानी और बांग्लादेशी उत्पादों की तुलना में कम होगी, जिसका बड़ा लाभ मिलेगा।
वैसे भी खाड़ी देशों के पास न केवल अपार दौलत है, बल्कि भारत के युवाओं के लिए संभावनाओं का समंदर भी है। वर्तमान में लगभग 89 लाख भारतीय खाड़ी देशों में निवास करते हैं। इसके साथ ही भारत के लिए खाड़ी देश निवेश का भी प्रमुख स्रोत हैं। भारत का खाड़ी सहयोग परिषद में शामिल देशों में एक अनुमान के मुताबिक करीब 30 अरब डॉलर पहुंच चुका है, जो भारत की दीर्घकालिक आर्थिक रणनीति में इस क्षेत्र की बढ़ती भूमिका बताता है।-दिग्विजय सिंह, कानपुर
