बजट चर्चा: विधानसभा में गूंजा निजी अस्पतालों की मनमानी और आशा बहुओं का मुद्दा, जानिए क्या बोले डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक
लखनऊ। उत्तर प्रदेश विधानसभा में बजट पर चर्चा के दौरान सोमवार को निजी अस्पतालों की कथित मनमानी का मुद्दा जोर-शोर से उठा। समाजवादी पार्टी (सपा) के सदस्य अतुल प्रधान ने सरकार से सवाल किया कि निजी अस्पतालों पर नियंत्रण के लिए क्या ठोस कदम उठाए जा रहे हैं और मरीजों से मनमाने शुल्क वसूलने की शिकायतों पर क्या कार्रवाई की गई है।
इस पर जवाब देते हुए उपमुख्यमंत्री एवं स्वास्थ्य मंत्री ब्रजेश पाठक ने विपक्ष पर पलटवार किया। उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी के सदस्य अब भी "अपना चश्मा नहीं बदल पा रहे हैं" और पूर्ववर्ती सरकार के नजरिए से ही वर्तमान व्यवस्था को देख रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि राज्य सरकार निजी अस्पतालों की अनियमितताओं के खिलाफ लगातार कार्रवाई कर रही है और किसी को भी मनमानी की अनुमति नहीं दी जाएगी।
पाठक ने बिना नाम लिए यह भी कहा कि कुछ लोग अस्पतालों से उगाही के चक्कर में लगे हुए हैं और सरकार ऐसे तत्वों पर भी नजर रखे हुए है। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना सरकार की प्राथमिकता है। इसी दौरान सदन में आशा बहुओं को राज्य कर्मचारी का दर्जा देने की मांग भी उठी।
समाजवादी पार्टी के विधायक आर के बर्मा ने आशा कार्यकर्ताओं को राज्य कर्मचारी का दर्जा देने और उनके वेतन में वृद्धि की मांग की। उन्होंने कहा कि ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था की रीढ़ मानी जाने वाली आशा बहुएं सीमित मानदेय में व्यापक जिम्मेदारियां निभा रही हैं, ऐसे में उन्हें उचित पारिश्रमिक और सामाजिक सुरक्षा मिलनी चाहिए।
