संपादकीय:बहुआयामी दौरा

Amrit Vichar Network
Published By Monis Khan
On

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का हालिया इजराइल दौरा भारत की पश्चिम एशिया नीति के युगांतरकारी चरण का स्पष्ट संकेत है। प्रधानमंत्री ने न केवल आतंकवाद के विरुद्ध भारत के ‘जीरो टॉलरेंस’ के रुख को दोहराया, बल्कि गाज़ा शांति प्रस्ताव का समर्थन कर परिपक्व कूटनीति का परिचय दिया। ‘मानवता को संघर्ष का शिकार न बनने देने’ का उनका आह्वान यह दर्शाता है कि भारत ऐसे मामलों में अब केवल मूक दर्शक नहीं हैं, बल्कि वैश्विक शांति और स्थिरता के बारे में सक्रिय हितधारक की भूमिका निभा रहा है। 

इजराइली नेतृत्व के साथ हुई वार्ताओं के दौरान साफ हुआ कि भारत-इजराइल रक्षा संबंध अब केवल ‘क्रेता-विक्रेता’ तक सीमित नहीं हैं; मिसाइल, ड्रोन और साइबर सुरक्षा में सहयोग अब सह-उत्पादन और तकनीक हस्तांतरण की दिशा में बढ़ रहा है। यह बदलाव ‘मेक इन इंडिया’ अभियान को सशक्त करेगा ही साथ ही सामरिक दृष्टि से भारत की आयात-निर्भरता को भी घटाएगा, हालांकि भारत इजराइल के इस बढ़ते रिश्ते के बीच अरब देशों और विशेषकर खाड़ी क्षेत्र के साथ संतुलन बनाए रखने की चुनौती है। भारत ने बीते वर्षों में यह सिद्ध किया है कि वह इजराइल और अरब जगत, दोनों के साथ अपने हितों को स्वतंत्र रूप से साधने की क्षमता रखता है।

भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारा जिसे ‘आईमैक प्लस’ के रूप में देखा जा रहा है, हमारे लिए यूरोप तक पहुंचने का एक क्रांतिकारी मार्ग है। यह गलियारा मात्र माल ढुलाई का रास्ता नहीं, बल्कि भविष्य की ‘डिजिटल और ग्रीन हाईवे’ है। प्रस्तावित फाइबर-ऑप्टिक केबल भारत को यूरोप से सीधे जोड़ेंगी, जिससे डेटा ट्रांसफर सस्ता होगा और फिनटेक एवं एआई जैसे उद्योगों को भारी लाभ होगा। साथ ही, ग्रीन हाइड्रोजन और सौर ऊर्जा की साझेदारी भारत की दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा को पुख्ता करेगी। 

विशेष रूप से सेमीकंडक्टर और रक्षा उद्योग के लिए अनिवार्य ‘रेयर अर्थ मेटल्स’ की आपूर्ति के लिए चीन पर निर्भरता कम करना भारत की बड़ी रणनीतिक जीत होगी। यदि मिस्र और अफ्रीकी नेटवर्क इस गलियारे से जुड़ते हैं, तो भारत की पहुंच स्वेज नहर से परे एक विशाल आर्थिक पट्टी तक हो जाएगी। यह आर्थिक, रणनीतिक मार्ग सस्ता और तेज तो है, पर जटिल भी है। संभव है भविष्य में कस्टम प्रक्रियाओं और रेल-नेटवर्क का पूर्ण डिजिटलीकरण, खाड़ी से भूमध्यसागर तक निर्बाध रेल संपर्क तथा कॉरिडोर की विश्वसनीयता को प्रभावित कर सकने वाली इस क्षेत्र की राजनीतिक अस्थिरता तथा तनाव पर नियंत्रण करने के लिये एक मजबूत सुरक्षा-ढांचा बन सके और यह रास्ता निरापद, आसान तथा सहज, लाभकारी हो सके।
 
इजराइल के साथ संभावित मुक्त व्यापार समझौता उच्च-तकनीक और कृषि में निवेश के नए द्वार खोलेगा, रोजगार के तमाम नये अवसर सृजित करेगा, बशर्ते घरेलू उद्योगों के हितों का ध्यान रखा जाए। कुल मिलाकर यह दौरा केवल द्विपक्षीय संबंधों का विस्तार नहीं, बल्कि भारत की ‘कनेक्टिविटी-डिप्लोमेसी’ का नया चेहरा है। इससे तेज व्यापार और तकनीकी बढ़त की पूरी संभावना तो है, लेकिन क्षेत्रीय अस्थिरता और अधूरी अवसंरचना जैसे जोखिम भी उतने ही वास्तविक हैं।