बिजली निगमों में बढ़ता खर्च, संविदा कर्मियों की छंटनी पर उपभोक्ता परिषद ने उठाए सवाल
लखनऊ, अमृत विचार: प्रदेश में बिजली उपभोक्ताओं की लगातार बढ़ती संख्या के बावजूद बिजली निगमों में नियमित भर्ती लंबे समय से लंबित है। वर्तमान में प्रदेश में लगभग तीन करोड़ 72 लाख बिजली उपभोक्ता हैं, लेकिन इसके अनुपात में स्थाई पदों पर नियुक्तियां नहीं हो पा रही हैं। दूसरी ओर बिजली कंपनियों का परिचालन और अनुरक्षण (ऑपरेशन एंड मेंटेनेंस) खर्च लगातार बढ़ता जा रहा है। वर्ष 2025-26 के लिए जहां 8,990 करोड़ रुपये का परिचालन और अनुरक्षण खर्च अनुमोदित किया गया था, वहीं वर्ष 2026-27 के लिए इसे बढ़ाकर 9,452 करोड़ रुपये प्रस्तावित किया गया है। इस बीच बिजली निगमों में संविदा कर्मियों की लगातार छंटनी का मामला भी सामने आया है, जिसे लेकर उपभोक्ता परिषद ने गंभीर चिंता जताई है।
उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि एक ओर बिजली कर्मियों के परिचालन और रखरखाव पर खर्च बढ़ रहा है, वहीं दूसरी ओर प्रदेश में संविदा कर्मियों की छंटनी की जा रही है, जो चिंताजनक है। उन्होंने कहा कि संविदा कर्मियों के साथ भेदभावपूर्ण रवैया उचित नहीं है। उन्होंने बताया कि ट्रांसमिशन से जुड़ी सुनवाई के दौरान उपभोक्ता परिषद ने बिजली निगमों में संविदा कार्मिकों की छंटनी, उन्हें प्रदेश सरकार के संविदा सेवा निगम से अलग रखने और लंबे समय से स्थाई पदों पर भर्ती न किए जाने का मुद्दा उठाया था। परिषद ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला देते हुए संविदा कर्मियों को समान काम के लिए समान वेतन दिए जाने की भी मांग की है।
इस मामले को गंभीरता से लेते हुए नियामक आयोग ने पावर ट्रांसमिशन कॉरपोरेशन के प्रबंध निदेशक से तीन दिनों के भीतर विस्तृत रिपोर्ट तलब की है। परिषद ने मांग की है कि प्रदेश में बिजली उपभोक्ताओं की संख्या को देखते हुए सभी बिजली निगमों में नियमित स्थाई पदों पर भर्ती प्रक्रिया जल्द शुरू की जाए, ताकि उपभोक्ता सेवाएं प्रभावित न हों और बिजली निगमों की कार्यप्रणाली सुचारू बनी रहे।
