प्रतापगढ़ : ई रिक्शा चालक कृष्णा सरोज का आईपीएल में चयन, परिजनों ने जताई खुशी

Amrit Vichar Network
Published By Deepak Mishra
On

सामाजिक कार्यकर्ता ने परिजनों का मुंह मीठा कराकर दी बधाई,किया सम्मानित

प्रतापगढ़, अमृत विचार : ई रिक्शा चालक होनहार क्रिकेटर कृष्णा सरोज का आईपीएल टीम में चयन हुआ है। उनके चयन पर परिजनों में खुशी है। सामाजिक कार्यकर्ता ने परिजनों को बधाई देते हुए सम्मानित कर कृष्णा को बेहतर प्रदर्शन की शुभकामनाएं दी है। बिहार ब्लॉक के कोर्रही सराय अंधराय गांव निवासी बाबू लाल सरोज ईंट भट्ठा श्रमिक हैं। उनकी पत्नी मीरा देवी गृहणी हैं। उनकी पांच संताने हैं।

सबसे बड़ी बेटी निशा सरोज व बेटे प्रमोद सरोज की शादी कर दी है। अनूप सरोज प्राइवेट नौकरी करता है। चौथे नम्बर की संतान कृष्णा सरोज के अंदर क्रिकेट में रुचि थी। क्रिकेट के लिए उसने हाईस्कूल के बाद पढ़ाई बंद कर दी। सबसे छोटा निखिल सरोज इस बार बारहवीं की परीक्षा दे रहा है। कृष्णा की क्रिकेट में दीवानगी बढ़ती गई। पिता श्रमिक थे इस कारण पैसा पर्याप्त नहीं हो पा रहा था। इस कारण कृष्णा ई रिक्शा चलाता था, मगर कहीं खेलने का मौका मिलता था तो दो घंटे के लिए ई रिक्शा खड़ा कर क्रिकेट खेलने लगता था।

क्रिकेट खेलते- खेलते उसकी मुलाकात मेडिकल कॉलेज के चिकित्सकों से हो गई। वह सेफ प्रो क्रिकेट एकेडमी में खेलने के लिए यहां आने लगा। जो भी खर्च आता था उसे चिकित्सक सहित अन्य खेल प्रेमी अदा करते थे। बेहतरीन गेंदबाजी व बल्लेबाजी के चलते जिला लीग में शानदार प्रदर्शन करते हुए रणजी ट्रॉफी टीम में खेलने पहुंचा। रणजी ट्रॉफी में बेहतर प्रदर्शन की वजह से उसका चयन आईपीएल के लिए किंग्स इलेवन पंजाब ने किया है। उसे नेट बॉलर के रूप में चयनित किया गया है।

चयन की जानकारी होने पर दादी गायत्री देवी सहित परिजनों में खुशी का ठिकाना नहीं रहा। सामाजिक कार्यकर्ता रवि प्रकाश सिंह चन्दन ने परिजनों का मुंह मीठा कराकर बधाई दी। सम्मानित करते हुए कृष्णा के बेहतर प्रदर्शन की शुभकामनाएं दी। इस दौरान क्षेत्र पंचायत सदस्य राम सजीवन सरोज, ननकू सरोज,राम सुंदर शर्मा,शशांक पांडेय,रोहित सिंह,संजय यादव आदि मौजूद रहे।

चार पहिया वाहन पहुंचने के लिए नहीं है रास्ता 

आईपीएल टीम में चयनित कृष्णा सरोज के घर तक पहुंचने के लिए पंगडंडी वाला रास्ता है। कृष्णा की मां मीरा देवी ने बताया कि कोई बीमार हो जाये तो साइकिल, बाइक ही सहारा है। एम्बुलेंस घर तक नहीं आ सकती है। हम लोगों की तीसरी पीढ़ी है रास्ता नहीं है। ग्राम प्रधान को धन्यवाद देते हुए कहा कि उनके कारण यह रास्ता मिल गया। यह भी रास्ता नहीं था। उन्होंने शासन - प्रशासन से घर तक रास्ता बनवाये जाने की मांग की है।

संबंधित समाचार