अनुभूति : सुबह की सैर, रसोई की फिक्र

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Published By Anjali Singh
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बीते दिनों सुबह जब पार्क में गई तो घर-घर की कहानी पूछने वाली महिलाओं की जुबान में रसोई गैस की चर्चा थी। यह भी घर की महत्वपूर्ण जरूरत है। इसके बिना चूल्हा ठप्प और चूल्हे के बिना सारे कामकाज। इस बारे में सोचा तो पाया कि भारत अपने कच्चे तेल यानी क्रूड ऑयल की जरूरत का 85 से 88 प्रतिशत से अधिक हिस्सा विदेशों से आयात करता है, जो रोजाना लगभग 50 से 58 लाख बैरल के बीच है। भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक है।

प्रमुख तेल स्रोतों में रूस, इराक, सऊदी अरब और यूएई शामिल हैं। इसमें रूस सबसे बड़ा निर्यातक है, जहां से प्रतिदिन लगभग 18 लाख बैरल कच्चा तेल खरीदा जाता है। कुल आयात का लगभग 40 से 60 प्रतिशत यानी 25-27 लाख बैरल होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते आता है। इसी तरह, एलपीजी की देशभर की जरूरत का लगभग 55-60 प्रतिशत और प्राकृतिक गैस का 50 प्रतिशत आयात किया जाता है।

अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए हम विदेशी कच्चे तेल पर निर्भर हैं। चीन भी अपनी 70 प्रतिशत से अधिक तेल खपत का आयात करता है, जिसमें मुख्य रूप से मध्य पूर्व, रूस, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका शामिल हैं। 90 प्रतिशत से अधिक आपूर्ति समुद्र के रास्ते जलडमरूमध्य के माध्यम से टैंकरों द्वारा जाती है, जबकि रूस और मध्य एशिया से पाइपलाइन और रेल मार्ग का उपयोग किया जाता है।

चीन के तेल का सबसे बड़ा हिस्सा यानि लगभग 90 प्रतिशत समुद्री मार्गों से आता है। रूस, चीन का भी सबसे बड़ा आपूर्तिकर्ता है, जो ‘पावर ऑफ साइबेरिया’ पाइपलाइन और रेल नेटवर्क के माध्यम से तेल भेजता है। इसके अलावा, चीन ईरान और वेनेजुएला से भी बड़ी मात्रा में कच्चा तेल खरीदता है, जिसमें उसे भारी छूट प्राप्त होती है। फर्क मात्र इतना है कि आपूर्ति व्यवधान से बचने के लिए, चीन के पास भारी मात्रा में अपना बफर भंडार यानी पेट्रोलियम रिजर्वायर हैं, जो लगभग 900 मिलियन बैरल तक होने का अनुमान है। इधर हम गैस की कीमत से जूझने लगे हैं। पेट्रोल और गैस के दाम बढ़ने लगे हैं और युद्ध के बढ़ते संकट को देखते हुए आने वाले समय में यह स्थिति और गंभीर होने का अनुमान है। खैर इसका विश्लेषण तो विशेषज्ञ और जानकार ही कर सकते हैं, लेकिन फिलहाल मैं सोच रही हूं कि जो सड़कों को खोदकर गैस पाइपलाइन बिछा दी गई है और दो साल पहले हमारे शहरों में घरों की रसोई तक येन-केन-प्रकारेण पाइप पहुंचा दिए गए हैं, उनमें गैस कब आएगी? लकड़ी, कंडों और स्टोव से आगे बढ़ने की कहानी तो अच्छी है, लेकिन पीछे लौटकर जाना अब कितना मुश्किल है और आगे कितना संशय।-अमृता पांडे, हल्द्वानी