Bareilly : रात में दांत घिसने की आदत से बच्चों के मौखिक स्वास्थ्य पर बढ़ता है खतरा
बरेली, अमृत विचार। बच्चों में रात के समय दांत घिसने की आदत को चिकित्सकीय भाषा में ब्रुक्सिज्म कहा जाता है। वर्तमान में यह एक उभरती हुई समस्या बनती जा रही है। अक्सर यह आदत नींद के दौरान होती है, जिसके कारण माता-पिता को इसका समय पर पता नहीं चल पाता। विशेषज्ञों के अनुसार यदि इस समस्या को नजरअंदाज किया गया तो बच्चों के दांतों और जबड़ों पर दीर्घकालिक दुष्प्रभाव डाल सकती है। इंस्टीट्यूट ऑफ डेंटल साइंसेज की ओर से बच्चों के दांतों को बीमारियों से बचाने के लिए जागरूकता माह चलाया जा रहा है।
तनाव और दिनचर्या बन रहे मुख्य कारण
दंत विशेषज्ञों के अनुसार बच्चों में मानसिक तनाव, पढ़ाई का दबाव, पारिवारिक वातावरण में बदलाव तथा अत्यधिक स्क्रीन टाइम इस आदत के प्रमुख कारणों में शामिल हैं। दांतों का असंतुलित जमाव, नींद से जुड़ी समस्याएं और कुछ शारीरिक कारण भी ब्रुक्सिज्म को बढ़ावा दे सकते हैं।
क्या हैं दुष्प्रभाव ?
रात में लगातार दांत घिसने से दांतों की बाहरी परत (एनामेल) घिसने लगती है, जिससे संवेदनशीलता और दर्द की समस्या उत्पन्न हो सकती है। इसके साथ ही जबड़े में दर्द, सिरदर्द, चेहरे की मांसपेशियों में थकान और गंभीर मामलों में दांतों का टूटना या असामान्य घिसाव भी देखा जाता है।
पेडोडॉन्टिस्ट की भूमिका अहम
बच्चों के दंत विशेषज्ञ यानी पेडोडॉन्टिस्ट, इस समस्या के निदान और उपचार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। वे न केवल बच्चे के दांतों और जबड़ों की जांच करते हैं, बल्कि समस्या के मूल कारणों को पहचान कर उचित उपचार योजना तैयार करते हैं। कई मामलों में दांतों को सुरक्षित रखने के लिए नाइट गार्ड की सलाह दी जाती है। विशेषज्ञों का कहना है कि माता-पिता को बच्चों की नींद की आदतों पर विशेष ध्यान देना चाहिए। यदि रात में दांत पीसने की आवाज सुनाई दे या बच्चा सुबह जबड़े में दर्द की शिकायत करे तो तुरंत दंत चिकित्सक से परामर्श लेना चाहिए।
