Bareilly : सपा जिलाध्यक्ष का जल्द खुलेगा नाम...मगर वो नहीं जिनकी चर्चाएं आम
बरेली के सपाइयों को लखनऊ बुलाकर अखिलेश ने दिया स्पष्ट मैसेज, कई दावेदारों के उतरे चेहरे, नयों में जागी उम्मीद
महिपाल गंगवार बरेली, अमृत विचार। बहुत कुछ सोचकर '''' लखनऊ मीट'''' में गए सपाइयों को बरेली जिलाध्यक्ष के नाम पर सस्पेंस खत्म होने की उम्मीद थी, लेकिन हुआ बिल्कुल उल्टा। अपना-अपना बायोडाटा सबसे मजबूत बताकर खुद को जिलाध्यक्ष की दौड़ में आगे बताने वाले नेता पार्टी सुप्रीमो के संदेश से मायूस हो गए। एक विधानसभा प्रभारी ने मीटिंग में सवाल दागा तो सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने ऐसा जवाब दिया कि बरेली सपा में कंपन की स्थिति पैदा हो गई है। साफ कहा कि जिलाध्यक्ष का नाम तय तो जल्द होगा मगर वो नहीं जिसको आप लोग सोच रहे हो ! हाईकमान के दो टूक संदेश से अब नए चेहरों में चमकते कल की उम्मीद बंधी है, लेकिन बीते हुए कल के हीरो समाजवादी वीरों के चेहरे कुछ बुझे-बुझे नजर आ रहे हैं।
सपा जिलाध्यक्ष शिवचरन कश्यप की कुर्सी जाने के बाद दावेदारों की भीड़ में सबसे ज्यादा यादवी चेहरे दिखाई दे रहे हैं। हालांकि, लखनऊ में बरेली के नेताओं की हाईकमान की ओर से लखनऊ में की गई मंथन मीटिंग से अप्रत्याशित संकेत बाहर आए हैं। पार्टी सूत्रों कहना है कि सपा प्रमुख के मैसेज ने किसी हद तक यह साफ कर दिया है कि बरेली में सपा नेताओं के बीच की खींचतान-गुटबाजी को हाईकमान बर्दाश्त नहीं करने वाला है। जिलाध्यक्ष की कुर्सी किसी ऐसे चेहरे को सौंपने की तैयारी है, निर्गुट होने के साथ किसी का मोहरा न हो।
सपा हाईकमान यह बात बखूबी जानता है कि बरेली में विधानसभा के गणित में की हालत अच्छी नही है। 2022 में भोजीपुरा और बहेड़ी में भाजपा अपनों की बगावत और गुटबाजी का शिकार न हुई होती तो सपा के लिए जिलों की 9 में इन दो सीटों पर भी जीत आसान नहीं थी। क्योंकि सपा की तैयारी अब 2029 के विधानसभा चुनाव की है, तो हाईकमान पिछली गलतियों से सबक ले रहा है और फूंक-फूंककर कदम बढ़ा रहा है। यही वजह है कि हाईकमान में बरेली में सपा जिलाध्यक्ष की खाली कुर्सी को लेकर जल्दबाजी में कोई फैसला लेने से बच रहे हैं। पार्टी पीडीए फार्मूले पर अपने गोटें बिछा रही हैं और इसी पैमाने पर विधानसभा चुनाव के लिए बरेली में ''''नवरत्न'''' तलाश रही है।
सूत्रों का कहना है कि जिलाध्यक्ष के दावेदारों के बीच लखनऊ स्तर पर जोरदार लॉबिंग का खेल चल रहा है। अपने-अपने दरबारों के जरिए दावेदारी में नाम आगे बढ़ाए जा रहे हैं। हालांकि अखिलेश के ''''टॉप सीक्रेट प्लान'''' से जुड़ी खबर बाहर आते ही दावेदारों में हड़कंप की स्थिति पैदा हो गई है। जिले में सपाई अब इस उलझन में हैं कि आखिर सुप्रीमो की नजरों में जिले का कौन सा चेहरा जगह बना गया है? सबकी नजरें उस उसी नाम को तलाश रही हैं, जिसका सपा में भविष्य चमकने वाला है! रही बात लखनऊ मीटिंग के एजेंडे की तो सूत्रों का कहना है कि पार्टी प्रमुख अखिलेश ने 2027 की रणनीति और जमीनी मजबूती पर जोर दिया। सभी विधानसभा प्रभारियों से विस्तार से एसआईआर रिपोर्ट तलब की और बूथवार समीक्षा की। 14 अप्रैल को बाबा साहब अंबेडकर जयंती पर सभी विधानसभा के सेक्टर स्थलों पर मनाए जाने के निर्देश भी दिए।
साथ छोड़ने वाले साथी नहीं बनाएगी सपा
सपा सूत्रों का कहना है कि पार्टी हाईकमान ऐसे नेताओं को समाजवादी कैंप में वापसी कराने के बिल्कुल भी मूड में नही हैं, जो भाजपा सरकार बनने के बाद अपने फायदे को भगवा कैंप में कूद पड़े थे। सपा छोड़ भाजपा में गए कुछ नेता विधानसभा टिकट की जुगत में फिर सपा में एंट्री लेने की जोड़तोड़ में जुटे नजर आ रहे हैं। ऐसे चेहरे सपा हाईकमान के पास जिले से अपने करीबी नेता-कार्यकर्ताओं की टीम भेजकर वापसी का माहौल बनाने की कोशिश की जा रही है, लेकिन वहां से जवाब नो-एंट्री का ही दिया जा रहा है।
