पटना पहुंचे जावेद अख्तर, किताब उत्सव में बोले- फिल्मों में पहले जैसी वो बात नहीं

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Published By Anjali Singh
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पटना। बॉलीवुड के जानेमाने गीतकार और पटकथा लेखक जावेद अख्तर ने बताया कि उनकी दो फिल्मों की स्क्रिप्ट पूरी हो गयी है, जिसपर जल्द ही फिल्में बनायी जायेगी। जावेद अख्तर ने मंगलवार की रात राजधानी पटना में आयोजित 'किताब उत्सव' के समापन समारोह में अपनी किताब 'सीपियां' के सन्दर्भ में चर्चा की। इस किताब में जावेद अख़्तर ने कबीर, तुलसी, रहीम, वृंद सहित अनेक कवियों द्वारा रचित चुनिंदा दोहों की सरल भाषा में व्याख्या की है। जावेद अख्तर को फिल्म इंडस्ट्री में आये हुये साढ़े पांच दशक से अधिक का समय हो गया है। उन्होंने अपने सिने करियर की शुरूआत सत्तर के दशक में शुरू की। 

उन्होंने सलीम खान के साथ मिलकर शोले, दीवार, जंजीर, सीता और गीता, त्रिशूल ,डॉन, क्राति, शक्ति, अंदाज और मिस्टर इंडिया समेत कई सुपरहिट फिल्मों की कहानी, पटकथा और संवाद लिखे हैं। वर्ष 1987 में प्रदर्शित फिल्म मिस्टर इंडिया के बाद सलीम-जावेद की सुपरहिट जोड़ी अलग हो गयी। इसके बाद भी जावेद अख्तर ने फिल्मों के लिये संवाद और कहानी लिखने का काम जारी रखा। जावेद अख्तर ने लंबे अरसे से किसी फिल्म की स्क्रिप्ट नहीं लिखी है।

जावेद अख्तर ने बताया कि हाल ही में उन्होंने दो फिल्मों की स्क्रिप्ट लिखी है, जिसपर जल्द काम शुरू होगा। उन्होंने बताया कि वर्ष 2004 में प्रदर्शित उनके पुत्र फरहान अख्तर की फिल्म लक्ष्य की स्क्रिप्ट लिखने के बाद उन्होंने यह काम छोड़ दिया। उन्होंने बताया कि कोरोना काल के दौरान उन्होंने दो फिल्मों की स्क्रिप्ट पर काम शुरू किया, जो अब पूरा हो गया है। उन्होंने बताया कि वह अपने दोनों बच्चे फिल्मकार फरहान अख्तर और जोया अख्तर को इन फिल्मों की स्क्रिप्ट सुनायेंगे। यदि उन्हें ये स्क्रिप्ट पसंद आती है तो जल्द ही इस पर फिल्में बनायी जायेगी।

उन्होंने मजाकिया लहजे में कहा कि यदि उनके बच्चों को स्क्रिप्ट पसंद नहीं आती है तो वे दूसरे निर्माताओं के पास जायेंगे और उन्हें उनकी स्क्रिप्ट पर फिल्म बनाने को कहेंगे। जावेद अख्तर ने वर्ष 1981 में निर्माता-निर्देशक यश चोपड़ा की कालजयी फिल्म सिलसिला से बतौर गीतकार काम करना शुरू किया। फिल्म ''सिलसिला'' में जावेद अख्तर के गीत ''देखा एक ख्वाब तो सिलसिले हुये और ये कहां आ गये हम..'' श्रोताओं के बीच काफी लोकप्रिय हुये। फिल्म सिलसिला में अपने गीत की सफलता के बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा। उन्होंने एक से बढ़कर एक गीत लिखकर जन जन के हृदय के तार झनझनाये। 

हालांकि अब जावेद अख्तर ने फिल्मीं गीत लिखने कम कर दिये हैं। जावेद अख्तर ने बताया कि आजकल के गानों में कोई गहराई नहीं रही। उन्होंने कहा कि एक पेशे के तौर पर बतौर गीतकार उन्होंने काफ़ी काम कर लिया है। उन्होंने कहा कि आजकल की परिस्थिति उनके अनुकूल नहीं है, इसलिए भी वह फ़िल्मों से दूरी बना लेते हैं। 

उन्होंने चोली के पीछे क्या है और सरकाई लो खटिया जाड़ा लगे, जैसे फूहड़ गानों का जिक्र करते हुये कहा कि नब्बे के दशक में उन्हें कई बड़े बजट की फिल्मों में इस तरह के गीत लिखने के प्रस्ताव मिले, लेकिन उन्होंने इस तरह के गीत लिखने से इंकार कर दिया। जावेद अख्तर ने कहा उन्होंने अपने करियर के दौरान कई बड़े बजट की सुपरहिट फिल्मों के लिये गीत लिखे और कई फिल्में छोड़ी भी थी। उन्होंने बताया कि फूहड़ गीतों के कारण उन्होंने कई मशहूर फिल्मकारों के लिये गीत लिखने के लिये मना कर दिया। उन्होंने जोर देते हुये कहा कि उन्होंने अपने करियर में जितने भी गीत लिखे हैं, उसमें से किसी भी गीत में अभद्र भाषा का प्रयोग नहीं किया गया है।

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