राष्ट्रवाद की चाशनी में लिपटी धुरंधर-2 पर उठे सवाल
इस दौर में राष्ट्रवाद की चाशनी में लपेटकर बनाई जा रही फिल्में क्या वास्तव में जनता के अंदर राष्ट्रवाद पैदा करना चाहती हैं या फिर ऐसी फिल्में किसी राजनीतिक एजेंडे के तहत बनाई जाती हैं? क्या इन दिनों राष्ट्रवाद भुनाने के लिए फिल्में बनाई जा रही हैं ? क्या इन दिनों राष्ट्रवाद को एक फार्मूला बना दिया गया है ? क्या इन दिनों फिल्मों के माध्यम से राष्ट्रवाद को बेचा जा रहा है ? क्या ऐसी फिल्मों के माध्यम से सच्चे अर्थों में जनता के अंदर राष्ट्रवाद पैदा हो सकता है ? सवाल कई हैं लेकिन ऐसी जनता जिनकी आंखों पर पर्दा पड़ा है, वह न ही तो इन सवालों के उत्तर जानता चाहती है और न ही वह ऐसी फिल्मों के पीछे लगे दिमाग को पढ़ पाती है। इन दिनों फिल्म ‘धुरंधर: द रिवेंज’ चर्चा में है।
फिल्म धुरंधर-2 विवादों में आ गई है। अनेक लोग इस फिल्म को देश की एक बड़ी हकीकत मान रहे हैं, तो कई लोग इसे प्रोपेगेंडा फिल्म मान रहे हैं। यह फिल्म निर्देशक आदित्य धर की चर्चित एक्शन फिल्म धुरंधर का दूसरा भाग है। इस फिल्म की कहानी कराची के लियारी इलाके की पृष्ठभूमि पर केन्द्रित है। फिल्म में अंडरवर्ल्ड और खूफिया क्रियाकलापों के संसार को दिखाया गया है। इस फिल्म में कई घटनाओं के संदर्भ भी हैं जैसे कंधार हाईजैक, भारतीय संसद पर हमला और 2008 का मुबंई हमला। इस फिल्म में मुख्य भूमिका रणवीर सिंह ने निभाई है।
इसके साथ ही अर्जुन रामपाल, आर माधवन, संजय दत्त, राकेश बेदी जैसे कलाकारों ने भी फिल्म में काम किया है। तमिलनाडु में विधानसभा चुनाव से पहले इस फिल्म पर रोक लगाने की मांग को लेकर मद्रास हाईकोर्ट में याचिका दायर करने की तैयारी की जा रही है। याचिकाकर्ता का कहना है कि चुनाव से ठीक पहले इस तरह की फिल्म का प्रदर्शन आचार संहिता के उल्लंघन की आशंका पैदा करता है। आदित्य धर के निर्देशन में बनी फिल्म धुरंधर-2 सिनेमाघरों में 19 मार्च को रिलीज हुई थी। बॉक्स ऑफिस पर अच्छा प्रदर्शन करने वाली यह फिल्म अब विवादों में आ गई है।
अब इस फिल्म पर गुरबानी का अपमान करने और सिख भावनाओं को ठेस पहुंचाने का आरोप भी लग रहा है। आरोप है कि फिल्म के एक दृश्य में गुरबानी के एक पवित्र श्लोक का अनुचित प्रयोग किया गया है। साथ ही एक दृश्य में रणवीर सिंह को बढ़ी हुई दाढ़ी, हाथ में कड़ा और पगड़ी पहने हुए दिखाया गया है। आरोप है कि इस दृश्य और लुक से सिखों और गुरु गोविंद सिंह का अपमान हुआ है। इस मुद्दे पर ‘सिख इन महाराष्ट’ संगठन के अध्यक्ष सरकार गुरज्योत सिंह ने फिल्म निर्माताओं से माफी मांगने की मांग की है।
हालांकि इस आपत्ति के बाद आर माधवन ने माफी मांगी है। उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने इस फिल्म के जरिए दूसरों दलों को बदनाम करने का आरोप लगाया है। इस फिल्म में अतीक अहमद की तरह दिखते एक चरित्र के पाकिस्तानी खूफिया एजेंसी आईएसआई और आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा के साथ संबंधों को दिखाया गया है। अब इस मुद्दे पर अतीक अहमद को लेकर चर्चा शुरू हो गई है। निश्चित रूप से अतीक अहमद कोई संत नहीं था। वह अपराधी था, लेकिन उस अपराधी को पाकिस्तान से जोड़ना संदेह पैदा करता है। सवाल यह है कि यदि अतीक अहमद के काफी सालों से पाकिस्तान से संबंध थे और वह वहां से हथियार ले रहा था तो सरकारें क्या कर रही थीं?
एक तरफ कई लोग धुरंधर-2 में फिल्म की कास्टिंग, बैकग्राउंड म्यूजिक, डारेक्शन और रणवीर सिंह के अभिनय की की प्रशंसा कर रहे हैं तो दूसरी तरफ कई लोग इस फिल्म को भाजपा सरकार की प्रशंसा का प्रोपेगेंडा बता रहे हैं। हालांकि इस फिल्म में सीधेतौर पर किसी राजनेता या अन्य व्यक्तित्व के बारे में कुछ नहीं दिखाया गया है, लेकिन चरित्र छिपाए हुए ही बहुत कुछ कह देते हैं। यानी छिपाते हुए वास्तविक चरित्र पर पहुंचा गया है। दर्शक यह चालाकी समझ भी लेते हैं। फिल्म के शुरू में ही यह बता दिया जाता है कि इस फिल्म के सभी पात्र काल्पनिक हैं, लेकिन काल्पनिक पात्र दरअसल काल्पनिक नहीं हैं। दरअसल बाजार फिल्म बनाने वालों से न जाने क्या-क्या करा देता है। इस प्रक्रिया में कई स्तरों पर राजनीति की भूमिका भी होती है।- रोहित कौशिक
