अमीर-गरीब देशों की खाई और गहरी, UN रिपोर्ट में हैरान करने वाला खुलासा

Amrit Vichar Network
Published By Muskan Dixit
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नई दिल्लीः दुनिया भर में अमीर और गरीब देशों के बीच आर्थिक असमानता तेजी से बढ़ रही है। संयुक्त राष्ट्र की हालिया रिपोर्ट ने इस चिंताजनक रुझान को और स्पष्ट कर दिया है। रिपोर्ट के अनुसार, विकसित देशों ने विकासशील और गरीब राष्ट्रों को दी जाने वाली आर्थिक सहायता में रिकॉर्ड कटौती की है, जिससे वैश्विक विकास के प्रयासों पर गहरा संकट मंडरा रहा है।

OECD के प्रारंभिक आंकड़ों के आधार पर तैयार UN की रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि वर्ष 2025 में विकसित देशों की आधिकारिक विकास सहायता (ODA) में रियल टर्म्स में 23.1% की भारी गिरावट दर्ज की गई, जो अब तक का सबसे बड़ा सालाना अवरोध है। कुल सहायता घटकर 174.3 अरब डॉलर रह गई। इस गिरावट का लगभग 96% हिस्सा सिर्फ पांच प्रमुख देशों के कारण है, जिनमें अमेरिका सबसे आगे रहा। अमेरिका ने अकेले अपनी सहायता में करीब 57% की कटौती की, जो कुल गिरावट का लगभग तीन-चौथाई हिस्सा है।

इस कमी का सबसे गंभीर असर गरीब और सबसे कम विकसित देशों पर पड़ा है। अफ्रीकी देशों को मिलने वाली मदद में 26.3% की गिरावट आई, जबकि सबसे कम विकसित देशों (LDCs) में यह 25.8% रही। नतीजतन, स्वास्थ्य सेवाएं, शिक्षा, आपदा राहत और बुनियादी ढांचा जैसे जरूरी क्षेत्रों में संसाधनों की कमी गहराने का खतरा बढ़ गया है।

रिपोर्ट में एक और चिंताजनक तथ्य सामने आया है कि गरीब देशों के निर्यात पर लगने वाले औसत टैरिफ में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। यह दर पहले 9% के आसपास थी, जो अब बढ़कर 28% तक पहुंच गई है। इससे इन देशों की अर्थव्यवस्थाओं पर अतिरिक्त बोझ पड़ा है और उनके निर्यात तथा समग्र विकास की गति प्रभावित हो रही है।

इस बढ़ती असमानता के पीछे कई प्रमुख कारण जिम्मेदार हैं। वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव, युद्धों और अस्थिरता ने निवेश के माहौल को कमजोर किया है। साथ ही, जलवायु परिवर्तन और बार-बार होने वाली प्राकृतिक आपदाओं ने गरीब देशों की अर्थव्यवस्थाओं को और अधिक नुकसान पहुंचाया है।

2025 में स्पेन के सेविले में आयोजित चौथे अंतरराष्ट्रीय फाइनेंसिंग फॉर डेवलपमेंट सम्मेलन में देशों ने सस्टेनेबल डेवलपमेंट गोल्स (SDGs) हासिल करने के लिए हर साल 4 ट्रिलियन डॉलर के फाइनेंसिंग गैप को भरने का संकल्प लिया था (Sevilla Commitment)। हालांकि, रिपोर्ट बताती है कि इस दिशा में अभी तक ठोस प्रगति नहीं हो पाई है, जो समस्या को और जटिल बना रही है।

इस कठिन दौर में कुछ देश अपनी जिम्मेदारी निभाते दिख रहे हैं। नॉर्वे, लक्जमबर्ग, स्वीडन और डेनमार्क जैसे राष्ट्र संयुक्त राष्ट्र के 0.7% GNI लक्ष्य को पूरा कर रहे हैं और विकास सहायता में अपना योगदान जारी रखे हुए हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह रुझान जारी रहा तो गरीब देशों में गरीबी, असुरक्षा और अस्थिरता बढ़ सकती है। संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट विकसित देशों से अपील करती है कि वे Sevilla Commitment को प्रभावी रूप से लागू करें और अंतरराष्ट्रीय सहयोग बढ़ाकर विकासशील देशों के वैध हितों की रक्षा करें।

यह रिपोर्ट वैश्विक स्तर पर एक मजबूत चेतावनी है कि अमीर देशों की मदद में कटौती न केवल गरीब राष्ट्रों को प्रभावित कर रही है, बल्कि पूरी दुनिया की आर्थिक स्थिरता और सतत विकास के लक्ष्यों को भी खतरे में डाल रही है।

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