यूपी में नया ट्रांसमिशन टैरिफ लागू, उपभोक्ताओं को मिलेगी राहत

Amrit Vichar Network
Published By Anjali Singh
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लखनऊ, अमृत विचार: उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग ने वित्तीय वर्ष-26–27 के लिए राज्य के भीतर ट्रांसमिशन टैरिफ तय करते हुए महत्वपूर्ण आदेश जारी किया है। यह आदेश उत्तर प्रदेश पावर ट्रांसमिशन कंपनी लिमिटेड की याचिका पर आधारित है, जिसमें एपीआर और कुल राजस्व आवश्यकता (एआरआर) शामिल थी। आयोग ने 22 जनवरी-26 को याचिका स्वीकार कर 27 फरवरी को सार्वजनिक सुनवाई कर सभी सुझावों पर विचार के बाद बुधवार को अंतिम आदेश जारी किया। 

इस बार आयोग ने टैरिफ निर्धारण की पद्धति में बड़ा बदलाव करते हुए इसे प्रति यूनिट के बजाय आधारभूत ट्रांसमिशन क्षमता पर निर्धारित किया है। राज्य के भीतर डिस्कॉम्स और भारतीय रेलवे के लिए टैरिफ 2,34,375.50 रु प्रति मेगावाट प्रति माह तय किया गया है, जबकि अन्य ओपन एक्सेस उपभोक्ताओं के लिए 0.3075 रु प्रति यूनिट दर लागू रहेगी। 

आयोग ने ओपन एक्सेस उपभोक्ताओं के लिए 15 प्रतिशत की सीमा तय कर टैरिफ शॉक से बचाने का प्रयास किया है। साथ ही कुल ट्रांसमिशन सिस्टम लागत 8,440.13 रु करोड़ और बेस क्षमता 30,009.30 मेगावाट स्वीकृत की गई है।आयोग ने महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए यूपीएसएलडीसी में स्वतंत्र प्रबंध निदेशक की नियुक्ति के भी निर्देश दिए हैं, जिससे पारदर्शिता और दक्षता बढ़ेगी। 

इसके अलावा 220 केवी से ऊपर के सबस्टेशनों का सुरक्षा ऑडिट, साइबर सुरक्षा मजबूत करने, डिजिटल तकनीक अपनाने और कर्मचारियों के कौशल विकास पर जोर दिया गया है। उपभोक्ता परिषद ने इस फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि इससे डिस्कॉम्स पर वित्तीय बोझ कम होगा और अंततः उपभोक्ताओं को राहत मिलेगी।

यूपीएसएलडीसी और ट्रांसमिशन की टैरिफ दरें तय

उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग (यूपीईआरसी) ने यूपी स्टेट लोड डिस्पैच सेंटर (यूपीएसएलडीसी) और पावर ट्रांसमिशन कॉरपोरेशन के लिए बुधवार को वित्तीय वर्ष 2026-27 का नया टैरिफ जारी कर दिया है। साथ ही यूपीएसएलडीसी में स्वतंत्र प्रबंध निदेशक (एमडी) की नियुक्ति प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि सिस्टम ऑपरेशन को अधिक पारदर्शी और स्वतंत्र बनाया जा सके।

स्वतंत्र एमडी भी होगा, उप्र विद्युत नियामक आयोग का बड़ा फैसला

आयोग के आदेश के अनुसार, अब ट्रांसमिशन और सिस्टम ऑपरेशन को स्पष्ट रूप से अलग कर दिया गया है, जिससे ग्रिड प्रबंधन अधिक प्रभावी हो सकेगा। इस फैसले से वितरण कंपनियों (डिस्कॉम) के खर्च में कमी आने की संभावना है और इसका अप्रत्यक्ष लाभ उपभोक्ताओं तक पहुंचेगा। टैरिफ निर्धारण के तहत राज्य के भीतर डिस्कॉम और रेलवे के लिए ट्रांसमिशन शुल्क प्रति मेगावॉट प्रति माह के आधार पर तय किया गया है, जबकि ओपन एक्सेस उपभोक्ताओं के लिए अलग यूनिट आधारित शुल्क रखा गया है। आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि सौर ऊर्जा नीति-2022 और डेटा सेंटर नीति-2021 के तहत मिलने वाली छूट जारी रहेगी।

सेक्टर में पारदर्शिता बढ़ाने और संचालन सुधारने की दिशा में कदम

विशेषज्ञों का मानना है कि इस नई व्यवस्था से ट्रांसमिशन सिस्टम का वित्तीय ढांचा मजबूत होगा और ग्रिड संचालन में पारदर्शिता बढ़ेगी। यूपीएसएलडीसी के लिए स्वतंत्र एमडी की नियुक्ति से सिस्टम ऑपरेशन को कॉरपोरेट प्रभाव से अलग कर पेशेवर ढंग से संचालित करने में मदद मिलेगी। आयोग का यह निर्णय बिजली क्षेत्र में संरचनात्मक सुधार की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है, जिससे ट्रांसमिशन और सिस्टम ऑपरेशन दोनों अधिक कुशल और जवाबदेह बनेंगे।

टैरिफ के प्रमुख आंकड़े (वर्ष 2026-27)

• ट्रांसमिशन टैरिफ (डिस्कॉम/रेलवे): ₹2,34,375.50 प्रति मेगावॉट/माह

• ओपन एक्सेस उपभोक्ता शुल्क: ₹0.3075 प्रति यूनिट

• कुल ट्रांसमिशन सिस्टम लागत: ₹8,440.13 करोड़

• कुल बेस ट्रांसमिशन क्षमता: 30,009.30 मेगावॉट

 

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